भारत: के लिए नेशनल रिकॉर्ड बनाने वाले खिलाड़ियों की संघर्षभरी तस्वीरें एक बार फिर देश की खेल व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही हैं। रांची में आयोजित एथलेटिक्स फेडरेशन कप में इतिहास रचने वाले मध्य प्रदेश के युवा पोल वॉल्टर देव कुमार मीणा और कुलदीप कुमार की एक तस्वीर सोशल Media पर तेजी से वायरल हो रही है। इस तस्वीर में दोनों खिलाड़ी अपने लंबे और बेहद महंगे फाइबरग्लास पोल ई-रिक्शा में लादकर होटल ले जाते दिखाई दे रहे हैं।
यह वही खिलाड़ी हैं जिन्होंने 5.45 मीटर की छलांग लगाकर मेंस पोल वॉल्ट का नया नेशनल रिकॉर्ड बनाया और कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के लिए क्वालिफाई भी किया। लेकिन रिकॉर्ड बनाने के कुछ घंटों बाद ही उन्हें अपने उपकरण खुद ढोने पड़े, जिसने खेल प्रेमियों को भावुक कर दिया।
रिकॉर्ड बनाया, लेकिन सुविधाएं नहीं मिलीं
रांची में हुए एथलेटिक्स फेडरेशन कप में देव मीणा और कुलदीप कुमार दोनों ने 5.45 मीटर की शानदार छलांग लगाई। यह भारतीय पोल वॉल्ट इतिहास की सबसे ऊंची छलांगों में से एक है।
हालांकि, तकनीकी नियमों के आधार पर देव मीणा को गोल्ड मेडल और कुलदीप कुमार को सिल्वर मिला। दरअसल, पोल वॉल्ट में जब दो खिलाड़ी समान ऊंचाई पार करते हैं, तो विजेता वह माना जाता है जिसने कम प्रयासों में लक्ष्य हासिल किया हो।
इतिहास रचने के बाद खिलाड़ियों को जिस तरह अपने उपकरणों के साथ संघर्ष करना पड़ा, उसने लोगों को हैरान कर दिया।
ई-रिक्शा में पोल ढोते दिखे खिलाड़ी
मंगलवार को वायरल हुई तस्वीर में देव मीणा और उनके साथी लंबी फाइबरग्लास पोल को ई-रिक्शा में लादते नजर आए। पोल वॉल्ट में इस्तेमाल होने वाले ये पोल बेहद संवेदनशील और महंगे होते हैं।
इनकी लंबाई लगभग 15 से 17 फीट तक होती है और इन्हें संभालने के लिए विशेष व्यवस्था की जरूरत पड़ती है। हल्का सा दबाव या स्क्रैच भी इन्हें नुकसान पहुंचा सकता है।
इसके बावजूद खिलाड़ियों को इन्हें खुद ढोना पड़ा। खेल प्रेमियों का कहना है कि देश के लिए रिकॉर्ड बनाने वाले खिलाड़ियों को कम से कम बुनियादी सुविधाएं तो मिलनी ही चाहिए।
पहले भी हो चुका है अपमान
यह पहला मौका नहीं है जब देव मीणा और उनके साथी को ऐसी परेशानी का सामना करना पड़ा हो।
इसी साल ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी चैंपियनशिप से लौटते समय पनवेल रेलवे स्टेशन पर एक टीसी ने दोनों खिलाड़ियों को ट्रेन से उतार दिया था। वजह यह बताई गई कि इतने लंबे पोल ट्रेन की बोगी में ले जाने की अनुमति नहीं है।
उस दौरान खिलाड़ियों और रेलवे कर्मचारियों के बीच बहस भी हुई थी। मामला सामने आने के बाद मध्य प्रदेश के खेल मंत्री विश्वास सारंग ने हस्तक्षेप किया था और रेलवे से खिलाड़ियों को विशेष अनुमति दिलाने की बात कही थी।
लेकिन इसके बावजूद खिलाड़ियों की मुश्किलें कम होती नजर नहीं आ रहीं।

कौन हैं देव कुमार मीणा?
मध्य प्रदेश के देवास जिले की खातेगांव तहसील के छोटे से गांव सिल्फोड़खेड़ा के रहने वाले 19 वर्षीय देव कुमार मीणा भारतीय एथलेटिक्स का उभरता सितारा माने जाते हैं।
उन्होंने फरवरी 2025 में उत्तराखंड नेशनल गेम्स में 5.32 मीटर की छलांग लगाकर राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया था। इसके बाद अप्रैल 2025 में नेशनल फेडरेशन सीनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 5.35 मीटर की छलांग लगाकर अपना ही रिकॉर्ड तोड़ा।
अब रांची में 5.45 मीटर की छलांग लगाकर उन्होंने नया इतिहास रच दिया है।
देव भोपाल के टीटी नगर स्टेडियम में कोच घनश्याम यादव की देखरेख में प्रशिक्षण लेते हैं।
सोशल मीडिया पर फूटा लोगों का गुस्सा
तस्वीर वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोग खिलाड़ियों के समर्थन में उतर आए। कई यूजर्स ने सवाल उठाया कि करोड़ों के खेल बजट के बावजूद खिलाड़ियों को ऐसी परिस्थितियों में क्यों रहना पड़ रहा है।
कुछ लोगों ने इसे भारतीय खेल व्यवस्था की विफलता बताया, जबकि कई यूजर्स ने सरकार और खेल संघों से खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं देने की मांग की।
खिलाड़ियों के संघर्ष की बड़ी तस्वीर
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में क्रिकेट को छोड़ बाकी खेलों के खिलाड़ियों को अब भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ता है।
विशेष रूप से पोल वॉल्ट जैसे खेलों में उपकरण महंगे और संवेदनशील होते हैं। ऐसे में खिलाड़ियों को ट्रांसपोर्ट और सुरक्षा की बेहतर सुविधा मिलना बेहद जरूरी है।
निष्कर्ष
देव कुमार मीणा और कुलदीप कुमार की यह तस्वीर केवल दो खिलाड़ियों की कहानी नहीं, बल्कि भारतीय खेल व्यवस्था की हकीकत भी दिखाती है। एक तरफ खिलाड़ी देश के लिए रिकॉर्ड बना रहे हैं, दूसरी तरफ उन्हें अपने उपकरण ई-रिक्शा में ढोने पड़ रहे हैं। अब सवाल यह है कि क्या देश अपने चैंपियनों को वह सम्मान और सुविधाएं दे पाएगा, जिसके वे असली हकदार हैं?

