PM Ujjwala Yojana: सब्सिडी वाले LPG सिलेंडरों की संख्या 9 से घटाकर 4, सरकार का बड़ा फैसला
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के करोड़ों लाभार्थियों के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने योजना के तहत मिलने वाले सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडरों की संख्या सालाना नौ से घटाकर चार कर दी है। इस बदलाव का असर देशभर के उन परिवारों पर पड़ेगा जो घरेलू गैस की खरीद में सरकारी सहायता पर निर्भर हैं।
सरकारी सूत्रों के अनुसार यह फैसला घरेलू गैस की औसत खपत, बढ़ती सब्सिडी लागत और सरकारी खर्च के दबाव को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। सोमवार को एक वरिष्ठ अधिकारी ने इसकी जानकारी दी।
क्या बदला है?
अब तक प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के पात्र लाभार्थियों को साल भर में नौ एलपीजी सिलेंडरों तक सब्सिडी का लाभ मिलता था। नए फैसले के बाद यह संख्या घटकर सिर्फ चार रह गई है।
इसका मतलब है कि लाभार्थियों को साल में केवल चार सिलेंडरों पर ही सरकारी सहायता मिलेगी, जबकि इसके बाद खरीदे जाने वाले सिलेंडरों के लिए बाजार दर के अनुसार भुगतान करना पड़ सकता है।

सरकार ने क्यों लिया यह फैसला?
सरकारी अधिकारियों का कहना है कि देश में अधिकांश उज्ज्वला लाभार्थियों की औसत गैस खपत अपेक्षाकृत कम है। आंकड़ों के आधार पर यह पाया गया कि बड़ी संख्या में परिवार सालभर में चार से पांच सिलेंडरों का ही उपयोग करते हैं।
ऐसे में सब्सिडी व्यवस्था को वास्तविक खपत के अनुरूप बनाने के लिए यह निर्णय लिया गया है। इसके अलावा एलपीजी सब्सिडी पर बढ़ते वित्तीय बोझ को कम करना भी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल बताया जा रहा है।
बढ़ती LPG कीमतें भी बनी वजह
पिछले कुछ वर्षों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। इसका असर एलपीजी की लागत पर भी पड़ा है।
सरकार को घरेलू उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए बड़ी मात्रा में सब्सिडी खर्च करनी पड़ती है। ऐसे में सब्सिडी वाले सिलेंडरों की संख्या कम करके सरकारी व्यय को नियंत्रित करने की कोशिश की जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम वित्तीय संतुलन बनाने की दिशा में उठाया गया है, हालांकि इसका सीधा असर उन परिवारों पर पड़ सकता है जिनकी गैस खपत अपेक्षाकृत अधिक है।

किन लोगों पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर?
ग्रामीण और निम्न आय वर्ग के परिवार प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के सबसे बड़े लाभार्थी हैं। जिन परिवारों में खाना पकाने के लिए एलपीजी का नियमित उपयोग होता है और सालभर में कई सिलेंडर खर्च होते हैं, उन्हें इस बदलाव का असर महसूस हो सकता है।
हालांकि जिन परिवारों की सालाना खपत चार सिलेंडरों के आसपास है, उनके लिए यह बदलाव अपेक्षाकृत कम प्रभावी माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना क्या है?
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना की शुरुआत वर्ष 2016 में की गई थी। इसका उद्देश्य गरीब और वंचित परिवारों को स्वच्छ ईंधन उपलब्ध कराना था ताकि पारंपरिक चूल्हों और लकड़ी के इस्तेमाल से होने वाले स्वास्थ्य जोखिमों को कम किया जा सके।
योजना के तहत पात्र महिलाओं को मुफ्त एलपीजी कनेक्शन उपलब्ध कराया गया। पिछले कुछ वर्षों में इस योजना के जरिए करोड़ों परिवारों तक एलपीजी पहुंची है और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ ईंधन के उपयोग को बढ़ावा मिला है।
आगे क्या?
सरकार की ओर से जारी इस फैसले के बाद लाभार्थियों के बीच इसकी चर्चा तेज हो गई है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सब्सिडी में हुई इस कटौती का घरेलू गैस उपयोग और योजना के लाभार्थियों पर कितना असर पड़ता है।
फिलहाल सरकार का कहना है कि यह कदम वास्तविक खपत के पैटर्न और सब्सिडी प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है।
निष्कर्ष
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडरों की संख्या नौ से घटाकर चार करना सरकार का एक महत्वपूर्ण नीतिगत फैसला माना जा रहा है। जहां इससे सरकारी सब्सिडी खर्च में कमी आने की उम्मीद है, वहीं अधिक गैस खपत करने वाले लाभार्थियों पर इसका आर्थिक प्रभाव पड़ सकता है। आने वाले महीनों में इस फैसले के व्यापक असर पर नजर रहेगी।

