TMC में बढ़ती बगावत के बीच सायोनी घोष का बयान चर्चा में
पश्चिम बंगाल: की राजनीति में इन दिनों तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर चल रही बगावत सबसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनी हुई है। पार्टी के कई सांसदों द्वारा नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोलने की खबरों के बीच रविवार को सांसद सायोनी घोष दिल्ली पहुंचीं, जहां एयरपोर्ट पर पत्रकारों के सवालों ने सियासी माहौल को और गर्म कर दिया।
सायोनी घोष से जब पत्रकारों ने उनके पुराने बयान को लेकर सवाल पूछा, जिसमें उन्होंने कहा था कि “मैं राघव चड्ढा की तरह दल-बदलू नहीं हूं”, तो उन्होंने सीधे जवाब देने से इनकार कर दिया। यही चुप्पी अब राजनीतिक गलियारों में नए सवाल खड़े कर रही है।
एयरपोर्ट पर सवालों से बचती नजर आईं सायोनी
दिल्ली एयरपोर्ट पर मीडिया ने सायोनी घोष से पूछा कि कुछ समय पहले उन्होंने खुद को दल-बदलू राजनीति से अलग बताया था, लेकिन अब वे टीएमसी छोड़कर बागी खेमे में क्यों शामिल हो गईं?
इस सवाल पर सायोनी ने कहा,
“मैं आपको जवाब देने के लिए बाध्य नहीं हूं। मैं जवाब नहीं देना चाहती।”
इसके बाद पत्रकारों ने दोबारा सवाल किया कि यदि वह जवाब नहीं देना चाहतीं तो फिर दूसरों को दल-बदलू कहने का अधिकार कैसे था?
इन सवालों के बाद सायोनी ने बिना कोई प्रतिक्रिया दिए अपनी कार का दरवाजा बंद किया और वहां से रवाना हो गईं।
उनकी यह प्रतिक्रिया सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है।
ममता बनर्जी ने पहले ही कर दिया था बड़ा फैसला
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि हाल के घटनाक्रमों के पीछे पार्टी नेतृत्व और कुछ सांसदों के बीच बढ़ती दूरी अहम कारण हो सकती है।
कुछ समय पहले ही मुख्यमंत्री और टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने सायोनी घोष को पार्टी की युवा इकाई के अध्यक्ष पद से हटा दिया था।
उनकी जगह युवा नेता अर्णब बनर्जी को जिम्मेदारी दी गई। इसके अलावा महिला संगठन तृणमूल महिला कांग्रेस में भी बड़ा बदलाव करते हुए सांसद माला राय को हटाकर अलीफा अहमद को अध्यक्ष बनाया गया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बदलाव पार्टी के अंदर असंतोष को और बढ़ाने वाला साबित हुआ।
बागी खेमे में लगातार बढ़ रही संख्या
टीएमसी के बागी गुट की नेता और सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने हाल ही में दावा किया था कि दो और सांसद जल्द उनके साथ जुड़ने वाले हैं।
यदि ऐसा होता है तो बागी सांसदों की संख्या 22 तक पहुंच सकती है।
काकोली घोष ने कहा कि बागी सांसद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर अलग संसदीय समूह के रूप में मान्यता मांगेंगे।
इस दावे ने बंगाल की राजनीति में हलचल मचा दी है क्योंकि लोकसभा में टीएमसी की ताकत पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।

क्या TMC में बड़ी टूट की तैयारी?
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि पार्टी के कई सांसद लंबे समय से नेतृत्व शैली और संगठनात्मक फैसलों को लेकर नाराज चल रहे हैं।
हालांकि टीएमसी नेतृत्व लगातार यह दावा करता रहा है कि पार्टी पूरी तरह एकजुट है, लेकिन हाल के घटनाक्रम कुछ और संकेत दे रहे हैं।
सायोनी घोष, माला राय और काकोली घोष दस्तीदार जैसे नेताओं का खुलकर सामने आना यह दिखाता है कि असंतोष अब सिर्फ बंद कमरों तक सीमित नहीं है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बागी सांसदों की संख्या बढ़ती है तो इसका असर केवल टीएमसी पर ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय राजनीति और विपक्षी गठबंधन की रणनीति पर भी पड़ सकता है।
लोकसभा समीकरणों पर पड़ सकता है असर
अगर टीएमसी के सांसदों का बड़ा समूह अलग गुट बनाता है, तो लोकसभा में राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं।
हाल के दिनों में एनडीए को लेकर भी चर्चाएं तेज रही हैं कि विपक्षी दलों के कुछ सांसद उनके प्रति नरम रुख अपना सकते हैं।
ऐसे में टीएमसी की आंतरिक बगावत केवल बंगाल तक सीमित मुद्दा नहीं रह जाएगी बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी इसकी गूंज सुनाई दे सकती है।
सोशल मीडिया पर भी तेज बहस
सायोनी घोष का पुराना बयान और मौजूदा राजनीतिक स्थिति सोशल मीडिया पर खूब चर्चा बटोर रही है।
कई यूजर्स सवाल उठा रहे हैं कि यदि उन्होंने पहले दल-बदल की राजनीति की आलोचना की थी तो अब उनकी वर्तमान स्थिति को कैसे देखा जाए।
वहीं उनके समर्थकों का कहना है कि राजनीतिक परिस्थितियां बदलती रहती हैं और नेताओं को अपने क्षेत्र की जनता के हित में फैसले लेने का अधिकार है।
निष्कर्ष
तृणमूल कांग्रेस के भीतर बढ़ती बगावत अब खुलकर सामने आती दिखाई दे रही है। सायोनी घोष की चुप्पी, नेतृत्व से दूरी और बागी सांसदों के बढ़ते दावे इस बात के संकेत हैं कि बंगाल की राजनीति में आने वाले दिनों में बड़ा राजनीतिक भूचाल देखने को मिल सकता है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात के बाद बागी गुट क्या अगला कदम उठाता है और ममता बनर्जी इस चुनौती का सामना कैसे करती हैं।

