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Home - राज्य - “RTI एक्टिविज्म अब धंधा बन गया है!” सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी, एक्टिविस्ट को नहीं मिली राहत

“RTI एक्टिविज्म अब धंधा बन गया है!” सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी, एक्टिविस्ट को नहीं मिली राहत

Rajat Kumar
Last updated: 2026/06/15 at 6:47 PM
Rajat Kumar
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4 Min Read
"RTI एक्टिविज्म अब धंधा बन गया है!" सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी, एक्टिविस्ट को नहीं मिली राहत
"RTI एक्टिविज्म अब धंधा बन गया है!" सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी, एक्टिविस्ट को नहीं मिली राहत
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“RTI एक्टिविज्म अब धंधा बन गया है!” सुप्रीम कोर्ट की तीखी टिप्पणी, आरटीआई एक्टिविस्ट को नहीं मिली अग्रिम जमानत

देश: की सर्वोच्च अदालत ने आरटीआई एक्टिविज्म के नाम पर कथित तौर पर सरकारी कार्यों में हस्तक्षेप करने वालों को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने एक आरटीआई एक्टिविस्ट और उसके सहयोगियों की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए ऐसी टिप्पणी की, जिसने कानूनी और सामाजिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है।

Contents
“RTI एक्टिविज्म अब धंधा बन गया है!” सुप्रीम कोर्ट की तीखी टिप्पणी, आरटीआई एक्टिविस्ट को नहीं मिली अग्रिम जमानतक्या है पूरा मामला?हाई कोर्ट से राहत नहीं मिलीसुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी“आप कौन होते हैं निगरानी करने वाले?”किन धाराओं में दर्ज हुआ मामला?आरटीआई और जवाबदेही पर नई बहसनिष्कर्ष:

सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यीय पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई शामिल थे, ने सुनवाई के दौरान कहा कि “आरटीआई एक्टिविज्म अब नया धंधा बन गया है।” अदालत ने यह भी सवाल उठाया कि आखिर किसी सड़क निर्माण परियोजना की निगरानी करने का अधिकार एक आरटीआई कार्यकर्ता को किस हैसियत से मिल जाता है।

क्या है पूरा मामला?

मामला पंजाब के गुरदासपुर जिले के बटाला क्षेत्र से जुड़ा है, जहां एक सड़क निर्माण परियोजना चल रही थी। आरोप है कि आरटीआई एक्टिविस्ट राकेश कुमार बहल और उनके सहयोगी राजीव कुमार उर्फ मिंटू ने निर्माण कार्य में बाधा उत्पन्न की।

एफआईआर के अनुसार, आरोपियों ने निर्माण स्थल पर पहुंचकर न केवल काम में रुकावट डाली बल्कि वहां मौजूद अधिकारियों और मजदूरों को कथित रूप से धमकाया भी। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस दौरान अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया और कुछ लोगों को चोट भी पहुंचाई गई।

इसी मामले में पुलिस ने विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया, जिसके बाद आरोपियों ने गिरफ्तारी से बचने के लिए अग्रिम जमानत की मांग की।

"RTI एक्टिविज्म अब धंधा बन गया है!" सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी, एक्टिविस्ट को नहीं मिली राहत
“RTI एक्टिविज्म अब धंधा बन गया है!” सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी, एक्टिविस्ट को नहीं मिली राहत

हाई कोर्ट से राहत नहीं मिली

इससे पहले पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट भी आरोपियों को राहत देने से इनकार कर चुका था। हाई कोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद राकेश कुमार बहल ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में दलील दी गई कि उन्होंने सड़क निर्माण कार्य में कथित भ्रष्टाचार को उजागर करने की कोशिश की थी। उनके वकील ने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने के कारण ही उन्हें झूठे मामले में फंसाया गया है।

हालांकि अदालत इस तर्क से संतुष्ट नहीं हुई।

सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति संदीप मेहता ने कहा कि सड़क निर्माण कार्य के लिए केंद्र सरकार ने धन जारी किया है और संबंधित एजेंसियां इसकी निगरानी करने में सक्षम हैं।

उन्होंने टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसे तथाकथित आरटीआई कार्यकर्ता खुद को निरीक्षक या अधिकारी समझने लगते हैं, जबकि उनके पास ऐसा कोई वैधानिक अधिकार नहीं होता।

न्यायमूर्ति मेहता की टिप्पणी थी कि आरटीआई का उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना है, लेकिन कुछ लोग इसे अलग तरीके से इस्तेमाल करने लगे हैं।

“आप कौन होते हैं निगरानी करने वाले?”

न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई ने भी इसी भावना को आगे बढ़ाते हुए सवाल किया कि सड़क निर्माण कार्य की निगरानी करने वाले आखिर ये लोग कौन होते हैं?

उन्होंने पूछा कि क्या याचिकाकर्ता कोई वरिष्ठ सरकारी अधिकारी हैं या किसी वैधानिक संस्था का हिस्सा हैं, जो उन्हें इस प्रकार का अधिकार प्राप्त हो।

अदालत की इन टिप्पणियों ने यह संकेत दिया कि न्यायपालिका सरकारी परियोजनाओं में अनावश्यक हस्तक्षेप को गंभीरता से देख रही है।

किन धाराओं में दर्ज हुआ मामला?

पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। इसके अलावा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की संबंधित धाराएं भी लगाई गई हैं।

एफआईआर में सरकारी कार्य में बाधा, धमकी देने, चोट पहुंचाने और कथित रूप से अपमानजनक टिप्पणी करने जैसे आरोप शामिल हैं।

हालांकि मामले की अंतिम सच्चाई का निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया और जांच पूरी होने के बाद ही होगा।

आरटीआई और जवाबदेही पर नई बहस

सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद एक नई बहस शुरू हो गई है। एक तरफ ऐसे लोग हैं जो मानते हैं कि आरटीआई कार्यकर्ता भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, वहीं दूसरी ओर यह तर्क भी दिया जा रहा है कि आरटीआई के अधिकार का इस्तेमाल कानून के दायरे में रहकर ही होना चाहिए।

विशेषज्ञों का कहना है कि सूचना का अधिकार नागरिकों को जानकारी प्राप्त करने का अधिकार देता है, लेकिन इससे किसी सरकारी परियोजना की प्रत्यक्ष निगरानी या कार्य में हस्तक्षेप का अधिकार स्वतः नहीं मिल जाता।

यही कारण है कि अदालत ने इस मामले में कठोर रुख अपनाते हुए अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया।

निष्कर्ष:

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला और सुनवाई के दौरान की गई टिप्पणियां आरटीआई एक्टिविज्म की सीमाओं और जिम्मेदारियों को लेकर महत्वपूर्ण संदेश देती हैं। अदालत ने स्पष्ट संकेत दिया है कि पारदर्शिता और जवाबदेही के नाम पर सरकारी कार्यों में अनावश्यक हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा। अब इस मामले की आगे की जांच और न्यायिक प्रक्रिया पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।

TAGGED: Anticipatory Bail, Breaking News, Court Hearing, India News, Judiciary, Legal News, Punjab News, RTI Act, RTI Activist, Supreme Court
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