भारत-फ्रांस का ‘तृष्णा मिशन’ करेगा कमाल! अंतरिक्ष से बताएगा कहां पड़ेगा सूखा, किसानों को पहले ही मिलेगी चेतावनी
दुनिया: इस समय जल संकट, जलवायु परिवर्तन और बढ़ते तापमान जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे समय में भारत और फ्रांस मिलकर एक ऐसा अंतरिक्ष मिशन लॉन्च करने जा रहे हैं, जो भविष्य में पानी की कमी, खेती और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है। इस मिशन का नाम है ‘तृष्णा मिशन’ (TRISHNA Mission)।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने फ्रांस दौरे के दौरान इस महत्वाकांक्षी परियोजना का उल्लेख करते हुए दोनों देशों के बीच अंतरिक्ष सहयोग को नई ऊंचाई देने की बात कही थी। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और फ्रांस की अंतरिक्ष एजेंसी CNES मिलकर इस मिशन को तैयार कर रही हैं।
क्या है तृष्णा मिशन?
‘तृष्णा’ का पूरा नाम Thermal Infrared Imaging Satellite for High-resolution Natural Resource Assessment (TRISHNA) है। यह एक अत्याधुनिक अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट होगा, जिसे पृथ्वी की सतह के तापमान, जल संसाधनों, वनस्पति और पर्यावरणीय बदलावों की निगरानी के लिए विकसित किया गया है।
यह सैटेलाइट धरती से लगभग 761 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थापित किया जाएगा और करीब पांच वर्षों तक लगातार डेटा उपलब्ध कराएगा। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह बेहद उच्च रिजॉल्यूशन पर धरती की सतह के तापमान और नमी की जानकारी जुटा सकेगा।
दो देशों की तकनीक का शानदार संगम
तृष्णा मिशन में भारत और फ्रांस दोनों की महत्वपूर्ण भूमिका है। फ्रांस ने इस मिशन के लिए थर्मल इन्फ्रारेड कैमरा विकसित किया है, जो धरती की सतह के तापमान को बेहद सटीकता से मापेगा।
वहीं ISRO ने दूसरे प्रमुख पेलोड का निर्माण किया है, जो पृथ्वी पर आने वाली सौर ऊर्जा और उसके संतुलन का अध्ययन करेगा। इन दोनों तकनीकों के संयुक्त उपयोग से वैज्ञानिकों को जलवायु परिवर्तन और जल संसाधनों पर गहरी समझ विकसित करने में मदद मिलेगी।

किसानों के लिए कैसे बनेगा वरदान?
भारत जैसे कृषि प्रधान देश में यह मिशन किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं होगा।
तृष्णा सैटेलाइट यह पता लगाएगा कि खेतों और मिट्टी से कितना पानी वाष्प बनकर उड़ रहा है। इससे वैज्ञानिक यह अनुमान लगा सकेंगे कि किस क्षेत्र में पानी की कमी होने वाली है और कौन-सी फसलें जोखिम में हैं।
इसके आधार पर किसानों को समय रहते सिंचाई, फसल चयन और जल प्रबंधन से जुड़ी सलाह दी जा सकेगी। इससे न केवल फसल उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि पानी की बचत भी होगी।
सूखे की पहले ही मिल जाएगी चेतावनी
जल संकट आज दुनिया के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। तृष्णा मिशन की मदद से वैज्ञानिक किसी भी क्षेत्र में सूखे की स्थिति बनने से पहले संकेत प्राप्त कर सकेंगे।
सैटेलाइट द्वारा जुटाए गए आंकड़ों से यह स्पष्ट हो सकेगा कि किस इलाके में मिट्टी की नमी तेजी से घट रही है और वहां भविष्य में जल संकट उत्पन्न हो सकता है। इससे सरकारों को समय रहते राहत और बचाव योजनाएं बनाने का अवसर मिलेगा।
शहरों की बढ़ती गर्मी पर भी रखेगा नजर
बड़े शहरों में तेजी से बढ़ते कंक्रीट के जंगल और कम होती हरियाली के कारण ‘अर्बन हीट आइलैंड’ प्रभाव बढ़ रहा है। इसके चलते शहरों का तापमान आसपास के क्षेत्रों की तुलना में अधिक हो जाता है।
तृष्णा मिशन ऐसे इलाकों की पहचान करेगा जहां अत्यधिक गर्मी का प्रभाव है। इससे नगर नियोजन एजेंसियां हरित क्षेत्र बढ़ाने, तापमान नियंत्रित करने और हीटवेव से बचाव के बेहतर उपाय कर सकेंगी।
प्रदूषण और आपदा प्रबंधन में भी मिलेगी मदद
तृष्णा मिशन केवल खेती और जल संसाधनों तक सीमित नहीं रहेगा। यह नदियों, झीलों और समुद्री तटीय क्षेत्रों में प्रदूषण की निगरानी में भी मदद करेगा।
इसके अलावा जंगलों में लगने वाली आग, ज्वालामुखीय गतिविधियों और अन्य तापीय असामान्यताओं की पहचान भी तेजी से की जा सकेगी। इससे आपदा प्रबंधन एजेंसियों को समय पर कार्रवाई करने में सहायता मिलेगी।
भारत-फ्रांस साझेदारी का नया अध्याय
तृष्णा मिशन भारत और फ्रांस के बीच मजबूत होते वैज्ञानिक एवं तकनीकी सहयोग का प्रतीक माना जा रहा है। दोनों देश पहले भी कई अंतरिक्ष परियोजनाओं में साथ काम कर चुके हैं, लेकिन यह मिशन जलवायु परिवर्तन और जल सुरक्षा जैसे वैश्विक मुद्दों पर केंद्रित होने के कारण विशेष महत्व रखता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मिशन भविष्य में जल संरक्षण, खाद्य सुरक्षा और पर्यावरणीय निगरानी के क्षेत्र में नई संभावनाएं खोलेगा।
निष्कर्ष
भारत और फ्रांस का संयुक्त ‘तृष्णा मिशन’ केवल एक सैटेलाइट परियोजना नहीं, बल्कि भविष्य के जल संकट, कृषि चुनौतियों और जलवायु परिवर्तन से निपटने की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह मिशन किसानों को बेहतर फसल प्रबंधन, सरकारों को जल संसाधन संरक्षण और वैज्ञानिकों को पर्यावरणीय बदलावों को समझने में मदद करेगा। आने वाले वर्षों में तृष्णा मिशन पृथ्वी की निगरानी के सबसे महत्वपूर्ण अंतरिक्ष अभियानों में शामिल हो सकता है।

