उत्तर प्रदेश: के आगरा जिले से एक बेहद दर्दनाक हादसा सामने आया है, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। जैतपुर थाना क्षेत्र के गोपालपुरा गांव में खेलते समय चार साल की मासूम बच्ची 70 फीट गहरे कुएं में गिर गई। करीब तीन घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद बच्ची को बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी।
इस हादसे के बाद गांव में गुस्सा फूट पड़ा। रेस्क्यू में देरी से नाराज ग्रामीणों ने सड़क जाम कर जमकर हंगामा किया। बाद में प्रशासनिक अधिकारियों के आश्वासन के बाद स्थिति को नियंत्रित किया जा सका।
खेलते-खेलते हुआ दर्दनाक हादसा
जानकारी के मुताबिक, गोपालपुरा गांव निवासी किसान अनिल कटारा की बेटी हेमा अपने पति और जुड़वां बेटियों बिट्टू और किट्टू के साथ मायके आई हुई थीं। घर में एकादशी उद्यापन का कार्यक्रम चल रहा था और परिवार के लोग पूजा-पाठ और अन्य तैयारियों में व्यस्त थे।
इसी दौरान दोनों जुड़वां बच्चियां घर के पास बने एक पुराने कुएं के पास खेल रही थीं। बताया जा रहा है कि कुएं को सबमर्सिबल पंप की बोरिंग के बाद प्लाईवुड से ढक दिया गया था।
अचानक प्लाईवुड टूट गया और चार साल की बिट्टू सीधे 70 फीट गहरे कुएं में जा गिरी। पीछे चल रही उसकी जुड़वां बहन किट्टू बाल-बाल बच गई।
बहन को कुएं में गिरता देख किट्टू जोर-जोर से चिल्लाने लगी, जिसके बाद परिजन और गांव के लोग मौके पर पहुंचे।

जहरीली गैस बनी रेस्क्यू में सबसे बड़ी बाधा
घटना की सूचना मिलते ही बाह से अग्निशमन विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई। लेकिन कुएं के अंदर जहरीली गैस होने की वजह से रेस्क्यू ऑपरेशन तुरंत शुरू नहीं हो सका।
करीब तीन घंटे तक बच्ची को बाहर निकालने की कोशिशें चलती रहीं। इस दौरान परिवार के लोग और ग्रामीण लगातार मदद की गुहार लगाते रहे।
ग्रामीणों का आरोप था कि प्रशासन की तरफ से समय पर पर्याप्त संसाधन और विशेषज्ञ टीम नहीं पहुंचाई गई, जिसकी वजह से रेस्क्यू में देरी हुई।
सड़क जाम कर फूटा लोगों का गुस्सा
रेस्क्यू में देरी से नाराज ग्रामीणों का गुस्सा बढ़ता गया। गुस्साए लोगों ने बाह-कचौरा घाट मार्ग पर लकड़ी और अन्य सामान रखकर सड़क जाम कर दी।
स्थिति बिगड़ने की सूचना मिलने पर नायब तहसीलदार सुधीर गिरी और अन्य अधिकारी मौके पर पहुंचे। प्रशासन ने एसडीआरएफ टीम को भी सूचना दी।
इसी बीच अग्निशमन विभाग के एक जवान ने रस्सी के सहारे कुएं में उतरकर रेस्क्यू शुरू किया। काफी मशक्कत के बाद बच्ची को बाहर निकाला गया।
अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों ने किया मृत घोषित
बच्ची को तुरंत एंबुलेंस से बाह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
मासूम की मौत की खबर सुनते ही परिवार में चीख-पुकार मच गई। गांव का माहौल पूरी तरह गमगीन हो गया।
इसके बाद जब शव को पोस्टमार्टम के लिए ले जाया जा रहा था, तब भी ग्रामीणों ने एंबुलेंस रोककर हंगामा किया और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
प्रशासन ने दिया जांच का आश्वासन
मौके पर पहुंचे डीसीपी पूर्वी जोन Abhishek Agarwal ने लोगों को समझाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि मामले की जांच कराई जाएगी और जो भी जिम्मेदार होगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
डीसीपी ने बताया कि बच्ची 70 फीट गहरे कुएं में गिर गई थी। दमकलकर्मियों ने उसे बाहर निकाला, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी।
प्रशासन के आश्वासन के बाद ग्रामीणों का गुस्सा शांत हुआ और जाम खुलवाया गया।
खुले और असुरक्षित कुएं बने खतरा
इस हादसे ने एक बार फिर गांवों और कस्बों में खुले व असुरक्षित कुओं की समस्या को उजागर कर दिया है। कई जगहों पर पुराने कुएं बिना सुरक्षा व्यवस्था के खुले पड़े रहते हैं, जो बच्चों और ग्रामीणों के लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि गांवों में ऐसे कुओं की जांच कर उचित सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए ताकि भविष्य में इस तरह के हादसे दोबारा न हों।
निष्कर्ष:
आगरा के गोपालपुरा गांव में हुई यह दर्दनाक घटना पूरे इलाके को सदमे में छोड़ गई। 70 फीट गहरे कुएं में गिरकर मासूम बिट्टू की मौत ने सुरक्षा व्यवस्था और रेस्क्यू सिस्टम पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब लोगों को उम्मीद है कि प्रशासन इस मामले में सख्त कार्रवाई के साथ भविष्य में ऐसे हादसे रोकने के लिए ठोस कदम उठाएगा।

