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Reading: पिता मोटर मैकेनिक, साइंस की पढ़ाई नहीं… फिर भी बना दी उड़ने वाली कार! 200 KM की रफ्तार का दावा, देखें क्या है खास
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Home - राजनीति - पिता मोटर मैकेनिक, साइंस की पढ़ाई नहीं… फिर भी बना दी उड़ने वाली कार! 200 KM की रफ्तार का दावा, देखें क्या है खास

पिता मोटर मैकेनिक, साइंस की पढ़ाई नहीं… फिर भी बना दी उड़ने वाली कार! 200 KM की रफ्तार का दावा, देखें क्या है खास

Rajat Kumar
Last updated: 2026/08/08 at 1:59 PM
Rajat Kumar
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5 Min Read
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अल्मोड़ा। कल्पना कीजिए कि जिस व्यक्ति ने विज्ञान की पढ़ाई नहीं की, जिसके पिता मोटर मैकेनिक हैं और जिसने अपने कई प्रयोग इंटरनेट से जानकारी जुटाकर किए, वही एक दिन ऐसी मशीन तैयार कर दे जो जमीन से ऊपर उड़ सके। उत्तराखंड के अल्मोड़ा के रहने वाले रवि टम्टा की कहानी इन दिनों इसी वजह से चर्चा में है।

Contents
2015 में देखा था उड़ने वाली कार का सपना200 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार का दावासाइंस की पढ़ाई नहीं, इंटरनेट से सीखापहले भी कई प्रयोग कर चुके हैं रविअब पेटेंट और DGCA से संपर्क की तैयारीक्या भारत में सच में शुरू हो सकती है उड़ने वाली कार?निष्कर्ष

रवि टम्टा ने अपने स्वदेशी पर्सनल एयर व्हीकल ‘हपिडा स्काईनेक्स’ के प्रोटोटाइप का सफल ट्रायल करने का दावा किया है। बताया जा रहा है कि यह एक सीटर इलेक्ट्रिक हेलीकार का प्रोटोटाइप है। शुरुआती परीक्षण के दौरान वाहन करीब एक मिनट तक हवा में रहा।

हालांकि, इसके व्यावसायिक संचालन, सुरक्षा और आधिकारिक उड़ान की अनुमति जैसे पहलुओं पर अभी नियामकीय प्रक्रियाएं बाकी हैं। रवि का कहना है कि वह आगे पेटेंट और संचालन से जुड़ी मंजूरियों के लिए संबंधित विभागों से संपर्क करेंगे।

2015 में देखा था उड़ने वाली कार का सपना

रवि टम्टा के मुताबिक, उन्होंने वर्ष 2015 में उड़ने वाली कार बनाने का सपना देखा था। इस सपने को हकीकत में बदलने के लिए उन्होंने हपिडा स्काई प्राइवेट लिमिटेड नाम से कंपनी बनाई।

करीब एक दशक तक प्रयोग और मेहनत के बाद अब उनके प्रोजेक्ट ने प्रोटोटाइप ट्रायल के स्तर तक पहुंचने का दावा किया है। रवि के अनुसार, उनका उद्देश्य ऐसा व्यक्तिगत एयर व्हीकल तैयार करना है, जो भविष्य में जमीन पर चलने वाले वाहनों के साथ-साथ हवा में भी इस्तेमाल किया जा सके।

पहले ट्रायल के दौरान जब हेलीकार हवा में उठी तो आसपास मौजूद लोगों की भीड़ जमा हो गई। करीब एक मिनट तक हवा में रहने वाले इस प्रोटोटाइप को देखने के लिए स्थानीय लोगों में भी काफी उत्सुकता दिखाई दी।

200 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार का दावा

रवि टम्टा के मुताबिक, हपिडा स्काईनेक्स करीब 200 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ान भरने में सक्षम होगी। फिलहाल यह दावा प्रोटोटाइप के प्रदर्शन से जुड़ा है और वास्तविक परिचालन क्षमता का आकलन विस्तृत परीक्षणों के बाद ही किया जा सकेगा।

यह प्रोजेक्ट ड्रोन तकनीक के एक बड़े और अपग्रेडेड स्वरूप के तौर पर विकसित किए जाने की बात कही जा रही है। इसमें एक व्यक्ति के बैठने की व्यवस्था है।

रवि के मुताबिक, इस परियोजना के लिए उन्होंने कुछ जरूरी उपकरण चीन से मंगवाए, जबकि इंजन तमिलनाडु के मद्रास क्षेत्र से लाया गया। इसके बाद उन्होंने अपने स्तर पर वाहन को तैयार किया।

साइंस की पढ़ाई नहीं, इंटरनेट से सीखा

इस कहानी का सबसे दिलचस्प पहलू रवि की शैक्षणिक पृष्ठभूमि है। उन्होंने विज्ञान की पढ़ाई नहीं की है। इसके बावजूद तकनीक और मशीनों में उनकी रुचि ने उन्हें लगातार प्रयोग करने के लिए प्रेरित किया।

रवि ने अपने कई आविष्कारों के लिए इंटरनेट और उपलब्ध तकनीकी जानकारी का सहारा लिया। इसी प्रयोगधर्मिता ने उन्हें उड़ने वाले वाहन के प्रोजेक्ट तक पहुंचाया।

उन्होंने जूनियर हाईस्कूल की पढ़ाई अपने गांव से की और नैनीताल परिसर से बीए की पढ़ाई पूरी की। उनके पिता हरीश राम मोटर मैकेनिक हैं और काफलीखान में काम करते हैं। मशीनों और तकनीकी चीजों से उनका पारिवारिक जुड़ाव भी इसी वजह से रहा है।

पहले भी कई प्रयोग कर चुके हैं रवि

उड़ने वाली कार से पहले भी रवि टम्टा कई तरह के तकनीकी प्रयोग कर चुके हैं। उनकी ओर से किए गए आविष्कारों में वन विभाग के लिए अग्निशमन यंत्र, दिव्यांगों के लिए छड़ी और स्टिक मोबाइल चार्जर शामिल बताए जाते हैं।

इसके अलावा उन्होंने हपिडा पाइन पीट मशीन और इलेक्ट्रोलाइट पंप मशीन भी तैयार की है।

इन प्रयोगों से यह साफ होता है कि रवि का तकनीकी काम केवल उड़ने वाले वाहन तक सीमित नहीं रहा है। वह अलग-अलग जरूरतों के लिए मशीनें और उपकरण तैयार करने पर काम करते रहे हैं।

अब पेटेंट और DGCA से संपर्क की तैयारी

प्रोटोटाइप के सफल ट्रायल के बाद अब रवि टम्टा का अगला लक्ष्य इसे औपचारिक रूप से आगे बढ़ाना है। उनका कहना है कि वह जल्द ही इस तकनीक के लिए पेटेंट कराने की प्रक्रिया शुरू करेंगे।

इसके साथ ही वाहन के संचालन और उड़ान से जुड़े नियमों को लेकर वह DGCA यानी नागरिक उड्डयन महानिदेशालय से संपर्क करने की तैयारी में हैं।

किसी भी पर्सनल एयर व्हीकल को सार्वजनिक या व्यावसायिक उपयोग में लाने से पहले सुरक्षा, तकनीकी मानकों, उड़ान अनुमति और नियामकीय मंजूरियों जैसी कई प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है। इसलिए फिलहाल हपिडा स्काईनेक्स को एक प्रोटोटाइप और प्रयोगात्मक परियोजना के तौर पर देखना ज्यादा उचित होगा।

क्या भारत में सच में शुरू हो सकती है उड़ने वाली कार?

दुनिया के कई देशों में पर्सनल एयर मोबिलिटी और इलेक्ट्रिक वर्टिकल टेकऑफ एंड लैंडिंग यानी eVTOL तकनीक पर तेजी से काम हो रहा है। ऐसे में अल्मोड़ा जैसे पहाड़ी क्षेत्र से एक स्थानीय इनोवेटर का उड़ने वाले वाहन पर काम करना निश्चित रूप से दिलचस्प है।

रवि टम्टा का प्रोजेक्ट अभी शुरुआती चरण में है। लेकिन अगर आगे इसके तकनीकी परीक्षण, सुरक्षा मानक और नियामकीय मंजूरियां सफलतापूर्वक पूरी होती हैं, तो यह स्थानीय स्तर पर विकसित किए गए एक महत्वाकांक्षी इनोवेशन के रूप में पहचान बना सकता है।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या हपिडा स्काईनेक्स वास्तव में 200 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से सुरक्षित उड़ान भर पाएगी और क्या इसे भविष्य में आम लोगों के इस्तेमाल के लिए मंजूरी मिल सकेगी? इसका जवाब आने वाले परीक्षण और आधिकारिक प्रक्रियाओं के बाद ही साफ होगा।

निष्कर्ष

अल्मोड़ा के रवि टम्टा की कहानी इस बात की मिसाल है कि तकनीक के प्रति जुनून और लगातार प्रयोग किसी व्यक्ति को बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित कर सकते हैं। पिता मोटर मैकेनिक हैं और रवि ने विज्ञान की पढ़ाई नहीं की, फिर भी उन्होंने उड़ने वाले वाहन का प्रोटोटाइप तैयार करने का दावा किया है। अब उनकी नजर पेटेंट और DGCA से जुड़ी औपचारिक प्रक्रियाओं पर है। यदि आगे के परीक्षण सफल होते हैं, तो हपिडा स्काईनेक्स उत्तराखंड के एक अनोखे तकनीकी प्रयोग के रूप में खास पहचान बना सकती है।

TAGGED: Electric Helicopter Car, Flying Car, Hapida Skynex, Innovation News, Ravi Tamta, Uttarakhand News, अल्मोड़ा न्यूज, उड़ने वाली कार, उत्तराखंड न्यूज, रवि टम्टा, हपिडा स्काईनेक्स
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