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Home - असम - Assam Election Analysis: परिसीमन ने कैसे पलट दिया पूरा खेल? NDA की 102 सीटों वाली जीत के पीछे का बड़ा गणित

Assam Election Analysis: परिसीमन ने कैसे पलट दिया पूरा खेल? NDA की 102 सीटों वाली जीत के पीछे का बड़ा गणित

Rajat Kumar
Last updated: 2026/05/05 at 3:27 PM
Rajat Kumar
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4 Min Read
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असम: विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने पूर्वोत्तर की राजनीति को नई दिशा दे दी है। 126 सीटों वाली विधानसभा में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने 102 सीटें जीतकर ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। भारतीय जनता पार्टी ने पहली बार अपने दम पर बहुमत का आंकड़ा पार करते हुए 82 सीटों पर जीत दर्ज की। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस प्रचंड जीत के पीछे सबसे बड़ा कारण 2023 में हुआ परिसीमन रहा।

Contents
परिसीमन ने बदला चुनावी गणितSC-ST सीटें बढ़ने से NDA को फायदाभाजपा ने पहली बार अपने दम पर हासिल किया बहुमतहिंदुत्व और “असमिया पहचान” का असरकल्याणकारी योजनाओं ने भी निभाई बड़ी भूमिकाआगे सरकार के सामने क्या चुनौती?निष्कर्ष

परिसीमन के बाद विधानसभा क्षेत्रों की सीमाओं में बड़े बदलाव किए गए थे। कई मुस्लिम बहुल सीटों का स्वरूप बदल गया और अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीटों की संख्या बढ़ाई गई। इन बदलावों का सीधा फायदा भाजपा और उसके सहयोगी दलों को मिला।

परिसीमन ने बदला चुनावी गणित

2023 में हुए परिसीमन के दौरान कई विधानसभा क्षेत्रों की सीमाएं बदली गईं। पहले जिन सीटों पर अल्पसंख्यक मतदाताओं का प्रभाव मजबूत माना जाता था, उनकी संख्या घट गई।

राजनीतिक रिपोर्ट्स के अनुसार पहले करीब 35 सीटों पर मुस्लिम वोट निर्णायक भूमिका में थे, लेकिन परिसीमन के बाद यह प्रभाव घटकर 25 सीटों से भी कम रह गया। कई मुस्लिम बहुल इलाकों को दूसरे क्षेत्रों में जोड़ दिया गया, जिससे विपक्षी दलों का पारंपरिक वोट बैंक कमजोर पड़ गया।

इस बदलाव का सबसे बड़ा नुकसान कांग्रेस और एआईयूडीएफ को हुआ। पहले एआईयूडीएफ जहां 16 सीटों पर मजबूत स्थिति में थी, वहीं इस बार पार्टी केवल 2 सीटों तक सिमट गई।

SC-ST सीटें बढ़ने से NDA को फायदा

परिसीमन के बाद अनुसूचित जनजाति (ST) सीटों की संख्या 16 से बढ़कर 19 हो गई, जबकि अनुसूचित जाति (SC) सीटें 8 से बढ़कर 9 हो गईं।

बारपेटा और गोलपाड़ा (पश्चिम) जैसे क्षेत्रों को आरक्षित किए जाने के बाद राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल गए। इन सीटों पर इस बार NDA ने जीत हासिल की।

बोडोलैंड क्षेत्र में भी आदिवासी सीटों की संख्या बढ़ने से भाजपा गठबंधन को फायदा मिला। यहां उसके सहयोगी दलों ने मजबूत प्रदर्शन किया।

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने परिसीमन के समय ही कहा था कि नए राजनीतिक नक्शे से भाजपा को बड़ा फायदा होगा, और चुनाव परिणामों ने उनकी बात को सही साबित कर दिया।

भाजपा ने पहली बार अपने दम पर हासिल किया बहुमत

असम में भाजपा ने पहली बार अकेले बहुमत का आंकड़ा पार किया है। पार्टी ने 82 सीटें जीतकर इतिहास रच दिया।

इससे पहले 2016 और 2021 के चुनावों में भाजपा को 60-60 सीटें मिली थीं। इस बार पार्टी ने न केवल अपनी सीटें बढ़ाईं बल्कि विपक्ष को भी काफी पीछे छोड़ दिया।

एनडीए के सहयोगी दल असम गण परिषद (AGP) और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (BPF) ने भी 10-10 सीटें जीतकर गठबंधन को मजबूत किया।

वहीं कांग्रेस केवल 19 सीटों पर सिमट गई। रायजोर दल और एआईयूडीएफ को 2-2 सीटें मिलीं, जबकि टीएमसी को केवल 1 सीट से संतोष करना पड़ा।

हिंदुत्व और “असमिया पहचान” का असर

राजनीतिक विश्लेषक ब्रोजेन डेका के मुताबिक भाजपा ने खुद को “असमिया समाज का रक्षक” बताकर चुनाव लड़ा। पार्टी ने घुसपैठ, भूमि अतिक्रमण और सांस्कृतिक पहचान जैसे मुद्दों को जोरदार तरीके से उठाया।

विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा ने हिंदुत्व और क्षेत्रीय अस्मिता दोनों को साथ लेकर रणनीति बनाई, जिसका फायदा चुनाव में साफ दिखाई दिया।

डेका ने कहा कि भाजपा ने पहले ही दावा किया था कि परिसीमन के बाद हिंदू बहुल सीटों की संख्या 103-105 तक पहुंच जाएगी। चुनाव परिणाम उसी दिशा में दिखाई दिए।

कल्याणकारी योजनाओं ने भी निभाई बड़ी भूमिका

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा की जनकल्याणकारी योजनाओं ने भी जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

सरकार द्वारा महिलाओं, युवाओं और गरीब परिवारों के खातों में सीधे पैसे भेजने की योजनाओं का असर जमीनी स्तर पर देखने को मिला। कई मतदाताओं ने माना कि भाजपा सरकार की योजनाओं से उन्हें सीधा फायदा हुआ।

गृहिणी कल्पना कुमार ने कहा कि महिलाओं को छोटे व्यवसाय शुरू करने के लिए आर्थिक मदद मिली, जिससे परिवारों की आय बढ़ी।

वहीं गुवाहाटी के ऐप आधारित टैक्सी चालक दीपक दहल ने कहा कि सरकार द्वारा अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई से स्थानीय लोगों में भरोसा बढ़ा है कि उनकी जमीन और अधिकार सुरक्षित रहेंगे।

आगे सरकार के सामने क्या चुनौती?

हालांकि भाजपा को भारी जीत मिली है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि अगले पांच वर्षों में चुनावी वादों को पूरा करना आसान नहीं होगा।

राज्य पर बढ़ते कर्ज और आर्थिक दबाव के बीच कल्याणकारी योजनाओं को जारी रखना सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। यदि वादे पूरे नहीं हुए तो जनता में नाराजगी भी बढ़ सकती है।


निष्कर्ष

असम विधानसभा चुनाव 2026 में परिसीमन ने राजनीतिक तस्वीर पूरी तरह बदल दी। बदली हुई सीट सीमाओं, SC-ST आरक्षण और भाजपा की आक्रामक रणनीति ने NDA को ऐतिहासिक जीत दिलाई। साथ ही जनकल्याणकारी योजनाओं और “असमिया पहचान” की राजनीति ने भी भाजपा को मजबूत समर्थन दिलाया। अब सबसे बड़ी चुनौती इस जनादेश को विकास और वादों में बदलने की होगी।

TAGGED: AIUDF, Assam Election 2026, Assam Politics, BJP Assam, Congress Assam, Delimitation, Election Analysis, Himanta Biswa Sarma, NDA Victory, Northeast Politics
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