भिवंडी बिल्डिंग हादसे में बड़ा एक्शन, मालिक और ठेकेदार के खिलाफ FIR दर्ज
महाराष्ट्र: के ठाणे जिले के भिवंडी में हुए दर्दनाक बिल्डिंग हादसे के बाद प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए इमारत के मालिक और मरम्मत कार्य कर रहे ठेकेदार के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। गुरुवार देर रात चार मंजिला इमारत के एक हिस्से के ढहने से अब तक 10 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं। राहत एवं बचाव कार्य देर रात से लगातार जारी है और मलबे में अन्य लोगों के फंसे होने की आशंका को देखते हुए तलाशी अभियान जारी रखा गया है।
पहले ही खतरनाक घोषित की जा चुकी थी इमारत
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, हादसे का शिकार हुई इमारत को भिवंडी-निजामपुर नगर निगम पहले ही जर्जर और असुरक्षित घोषित कर चुका था। इसके बावजूद इमारत में लोग रह रहे थे और उसी दौरान पिलरों की मरम्मत का काम भी किया जा रहा था।
बताया गया कि बालाजी नगर स्थित इस चार मंजिला इमारत में कुल 48 कमरे थे। गुरुवार रात करीब 9 बजे इमारत से तेज आवाजें आने लगीं, जिससे आसपास के लोगों को खतरे का अंदेशा हुआ। स्थानीय लोगों ने कई परिवारों को समय रहते बाहर निकालने की कोशिश की, लेकिन कुछ ही मिनटों बाद इमारत का बी-विंग भरभराकर गिर पड़ा।
10 लोगों की मौत, कई घायल
हादसे के बाद मलबे में दबे लोगों को निकालने के लिए बड़े स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। बचाव कार्य में एनडीआरएफ (NDRF), एसडीआरएफ (SDRF), स्थानीय प्रशासन, दमकल विभाग और पुलिस की टीमें जुटी रहीं।
अब तक 10 लोगों के शव मलबे से निकाले जा चुके हैं, जबकि घायलों का इलाज नजदीकी अस्पतालों में जारी है। प्रशासन लगातार मलबा हटाने का काम कर रहा है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई और व्यक्ति अंदर फंसा न हो।
मालिक और ठेकेदार पर गंभीर धाराओं में मामला दर्ज
घटना के बाद नगर निगम की ओर से सख्त कदम उठाया गया है। भिवंडी-निजामपुर नगर निगम के सहायक आयुक्त फैसल अब्दुल कय्यूम टाटली की शिकायत पर इमारत के मालिक बिलाल अहमद अबू बकर खान और मरम्मत कार्य कर रहे ठेकेदार अशोक के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और महाराष्ट्र क्षेत्रीय एवं नगर नियोजन (MRTP) अधिनियम की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आवश्यक अनुमति और सुरक्षा मानकों का पालन किए बिना निर्माण एवं मरम्मत का कार्य कराया जा रहा था। पुलिस पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रही है और जिम्मेदार लोगों की भूमिका की पड़ताल की जा रही है।

प्रत्यक्षदर्शियों ने सुनाई खौफनाक कहानी
हादसे से बच निकले लोगों ने उस भयावह रात का दर्दनाक मंजर बयान किया।
दीपक कुमार यादव ने बताया कि वह खाना खाने के बाद सोने की तैयारी कर रहे थे, तभी अचानक जोरदार धमाका हुआ और पूरी इमारत हिलने लगी। जान बचाने के लिए उन्हें पहली मंजिल से छलांग लगानी पड़ी।
एक अन्य प्रत्यक्षदर्शी संगीता प्रजापति ने बताया कि वह पार्किंग क्षेत्र में थीं, तभी इमारत के टूटने की आवाज सुनाई दी। भागने के दौरान वह घायल हो गईं।
अभय कुमार यादव ने बताया कि बाहर निकलने का रास्ता मलबे से बंद हो गया था। ऐसे में उन्होंने पहली मंजिल से कूदकर अपनी जान बचाई, हालांकि इस दौरान उनके पैर में फ्रैक्चर हो गया।
अब भी जारी है रेस्क्यू ऑपरेशन
प्रशासन का कहना है कि राहत एवं बचाव अभियान तब तक जारी रहेगा, जब तक पूरे मलबे की जांच पूरी नहीं हो जाती। कई परिवार अपने लापता परिजनों की तलाश में अस्पतालों और घटनास्थल के बीच भटक रहे हैं।
इन्हीं में नेहा सिंह भी शामिल हैं, जो अपने पति रणजीत सिंह की तलाश कर रही हैं। घटना के बाद से उनका कोई पता नहीं चल सका है। बचाव दल मलबे की हर परत को हटाकर संभावित फंसे लोगों की तलाश में जुटा हुआ है।
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जर्जर इमारतों पर फिर उठे सवाल
भिवंडी हादसे ने एक बार फिर महानगरों और आसपास के क्षेत्रों में मौजूद जर्जर इमारतों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जिन भवनों को पहले से खतरनाक घोषित किया जा चुका है, उन्हें समय रहते खाली कराना और आवश्यक कार्रवाई करना बेहद जरूरी है।
स्थानीय प्रशासन ने भी संकेत दिए हैं कि शहर की अन्य खतरनाक इमारतों का दोबारा सर्वे कराया जाएगा ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
निष्कर्ष
भिवंडी में चार मंजिला इमारत ढहने की घटना ने एक बार फिर भवन सुरक्षा और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। हादसे में 10 लोगों की जान चली गई, जबकि कई परिवार अभी भी अपने प्रियजनों की तलाश में हैं। प्रशासन ने इमारत के मालिक और ठेकेदार के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि जांच में जिम्मेदार लोगों पर कितनी सख्त कार्रवाई होती है और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।

