महिला पहलवानों के कथित यौन उत्पीड़न मामले में बरी हुए बृजभूषण शरण सिंह, बोले- ‘अगर आरोप साबित होता तो खुद फांसी पर लटक जाता’
महिला पहलवानों: द्वारा लगाए गए कथित यौन उत्पीड़न के आरोपों से जुड़े चर्चित मामले में दिल्ली की राउज़ एवेन्यू कोर्ट द्वारा बरी किए जाने के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पूर्व सांसद और भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह ने पहली बार सार्वजनिक प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उन्हें शुरू से ही अपने ऊपर लगे आरोपों पर विश्वास नहीं था और उन्होंने इसे पहले दिन से एक षड्यंत्र बताया था।
कोर्ट के फैसले के बाद उनके समर्थकों ने फूल-मालाओं और गुलदस्तों से उनका स्वागत किया। इस बीच, फैसले को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं, जिससे यह मामला एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया।
‘मैं सिर्फ बरी नहीं, सम्मान के साथ बरी हुआ हूं’
कोर्ट के फैसले के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था।
उन्होंने कहा,
“मैं सिर्फ बरी नहीं हुआ हूं, बल्कि सम्मान के साथ बरी हुआ हूं। संघर्ष इंसान को और मजबूत बनाता है। मुझे शुरू से विश्वास था कि मेरे साथ न्याय होगा और आज वही हुआ है।”
उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने कभी स्वयं को अपराधी नहीं माना और पूरे मामले के दौरान न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा बनाए रखा।
‘अगर आरोप सही होता तो खुद फांसी पर लटक जाता’
बृजभूषण शरण सिंह ने अपने पुराने बयान को दोहराते हुए कहा कि 18 जनवरी 2023 को उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा था कि यदि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप सही साबित होते हैं, तो वह स्वयं फांसी पर लटकने को तैयार हैं।
उन्होंने कहा,
“मैं आज भी उसी बात पर कायम हूं। यदि मेरे खिलाफ कोई आरोप सही पाया जाता तो मैं स्वयं फांसी पर लटक जाता। लगभग तीन साल बाद अदालत ने मुझे और विनोद तोमर को बरी कर दिया है।”
उन्होंने इसे अपने जीवन के सबसे महत्वपूर्ण न्यायिक फैसलों में से एक बताया।
‘संघर्ष ने मुझे मजबूत बनाया’
पूर्व सांसद ने कहा कि बचपन से ही उन्होंने संघर्षपूर्ण जीवन देखा है और हमेशा कमजोर तथा वंचित लोगों के पक्ष में खड़े रहे हैं।
उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों ने उन्हें और मजबूत बनाया तथा पूरे मामले के दौरान उन्होंने अपना आत्मविश्वास नहीं खोया।
समर्थकों में खुशी का माहौल
कोर्ट से राहत मिलने के बाद दिल्ली में उनके समर्थकों ने उनका स्वागत किया। फूल-मालाएं पहनाकर और मिठाइयां बांटकर फैसले का स्वागत किया गया।
समर्थकों ने इसे न्याय की जीत बताते हुए खुशी जताई।
वकील ने क्या कहा?
बृजभूषण शरण सिंह के अधिवक्ता राजीव मोहन ने कहा कि उन्हें अभी तक अदालत के विस्तृत आदेश की प्रति प्राप्त नहीं हुई है।
उन्होंने कहा कि आदेश की प्रति मिलने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि अदालत किन कानूनी आधारों पर इस निष्कर्ष पर पहुंची।
वकील के अनुसार, बचाव पक्ष द्वारा प्रस्तुत दलीलों को अदालत ने स्वीकार किया है।

करण भूषण सिंह की प्रतिक्रिया
बृजभूषण शरण सिंह के पुत्र और भाजपा सांसद करण भूषण सिंह ने अदालत के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह केवल उनके पिता की नहीं, बल्कि “सच्चाई, युवा पहलवानों और कैसरगंज” की जीत है।
उन्होंने कहा कि जो राजनीतिक दल पहले उनके पिता के खिलाफ बयान दे रहे थे, क्या वे अब सार्वजनिक रूप से स्वीकार करेंगे कि उनके साथ गलत हुआ।
यह उनका राजनीतिक दृष्टिकोण है।
प्रियंका गांधी ने उठाए सवाल
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि एक ओर सरकार महिला सशक्तिकरण और महिलाओं के अधिकारों की बात करती है, जबकि दूसरी ओर ऐसे मामलों में अलग संदेश जाता है।
उन्होंने फैसले पर अप्रत्यक्ष रूप से सवाल उठाते हुए महिलाओं की सुरक्षा और न्याय व्यवस्था पर अपनी चिंता व्यक्त की।
यह कांग्रेस का पक्ष है।
मामला क्यों बना था चर्चा का विषय?
महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए कथित यौन उत्पीड़न के आरोपों के बाद यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया था। कई प्रमुख पहलवानों ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर लंबे समय तक विरोध प्रदर्शन किया था और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की थी।
इसके बाद पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया चली। अब राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने इस मामले में बृजभूषण शरण सिंह और सह-आरोपी विनोद तोमर को बरी कर दिया है।
हालांकि, अदालत के विस्तृत आदेश की प्रति सार्वजनिक होने के बाद फैसले के कानूनी आधार और अधिक स्पष्ट हो सकेंगे।
निष्कर्ष:
राउज़ एवेन्यू कोर्ट द्वारा बृजभूषण शरण सिंह को बरी किए जाने के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर नई बहस शुरू हो गई है। बृजभूषण शरण सिंह ने इसे अपने सम्मान और न्याय की जीत बताया है, जबकि विपक्ष ने फैसले को लेकर सवाल उठाए हैं। अदालत के विस्तृत आदेश के सार्वजनिक होने के बाद इस निर्णय के कानूनी पहलुओं पर और स्पष्टता आने की उम्मीद है।

