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Home - राष्ट्रीय - E20 नीति पर संकट? इथेनॉल आवंटन विवाद पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, सरकार बोली- एक फैसला बिगाड़ सकता है पूरा सिस्टम!

E20 नीति पर संकट? इथेनॉल आवंटन विवाद पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, सरकार बोली- एक फैसला बिगाड़ सकता है पूरा सिस्टम!

Rajat Kumar
Last updated: 2026/06/30 at 4:55 PM
Rajat Kumar
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4 Min Read
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नई दिल्ली: देश की महत्वाकांक्षी E20 (20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण) नीति अब कानूनी विवाद के केंद्र में आ गई है। इथेनॉल आपूर्ति आवंटन से जुड़ा मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है, जहां केंद्र सरकार और भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL) ने चेतावनी दी है कि यदि किसी एक उत्पादक को अतिरिक्त आवंटन दिया गया, तो इससे पूरे देश की इथेनॉल मिश्रण व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

Contents
क्या है पूरा मामला?सुप्रीम कोर्ट में सरकार ने क्या कहा?कितनी हो चुकी है इथेनॉल आपूर्ति?बीपीसीएल ने क्या दलील दी?E20 नीति क्यों है महत्वपूर्ण?यदि हाईकोर्ट का आदेश लागू हुआ तो क्या होगा?सुप्रीम कोर्ट का अगला कदमनिष्कर्ष:

मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक हाईकोर्ट के उस आदेश पर फिलहाल यथास्थिति (Status Quo) बनाए रखने का निर्देश दिया, जिसमें वर्ष 2025-26 के इथेनॉल सप्लाई ईयर (ESY) के लिए एक निजी कंपनी के आवंटन पर पुनर्विचार करने को कहा गया था।

क्या है पूरा मामला?

भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL) ने कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। हाईकोर्ट ने तेल विपणन कंपनियों (OMCs) को निर्देश दिया था कि वे Vinup Distilleries & Sugars द्वारा किए गए अतिरिक्त इथेनॉल आवंटन के अनुरोध पर विचार करें।

हाईकोर्ट का मानना था कि सरकार की नीति के तहत स्थापित समर्पित इथेनॉल संयंत्रों को प्राथमिकता वाले आवंटन का लाभ मिलना चाहिए और उन्हें इससे वंचित नहीं किया जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट में सरकार ने क्या कहा?

सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने अदालत को बताया कि भारत का E20 कार्यक्रम अभी विकास के चरण में है और इसे स्थिर बनाए रखना बेहद जरूरी है।

उन्होंने कहा कि यदि एक उत्पादक को अतिरिक्त कोटा दिया गया तो बाकी कंपनियां भी समान मांग लेकर अदालत पहुंच सकती हैं। इससे न केवल मुकदमों की संख्या बढ़ेगी बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर लागू पूरी इथेनॉल नीति अस्थिर हो सकती है।

सरकार का कहना है कि इथेनॉल आपूर्ति का पूरा आवंटन पहले ही तय प्रक्रिया के तहत किया जा चुका है और उसमें अब बदलाव करना पूरे सिस्टम को प्रभावित करेगा।

कितनी हो चुकी है इथेनॉल आपूर्ति?

सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि 17 अक्टूबर 2025 को इथेनॉल आवंटन की प्रक्रिया पूरी कर ली गई थी।

इसके तहत:

  • 378 आपूर्तिकर्ताओं को आवंटन मिला।
  • कुल 1,050 करोड़ लीटर इथेनॉल की आपूर्ति तय की गई।
  • 18 जून 2026 तक लगभग 680 करोड़ लीटर इथेनॉल की आपूर्ति की जा चुकी है।

सरकार का तर्क है कि इतनी बड़ी प्रक्रिया के बाद किसी एक कंपनी के लिए नियम बदलना बाकी कंपनियों के साथ असमानता होगी।

बीपीसीएल ने क्या दलील दी?

बीपीसीएल का कहना है कि किसी कंपनी की उत्पादन क्षमता अधिक होने का मतलब यह नहीं कि उसे अतिरिक्त इथेनॉल आवंटन का स्वतः अधिकार मिल जाए।

कंपनी ने अदालत में कहा कि आवंटन पहले से निर्धारित नीति, प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया और राष्ट्रीय आवश्यकता के आधार पर किया जाता है। यदि अदालत किसी एक कंपनी को विशेष राहत देती है तो भविष्य में पूरी आवंटन प्रणाली पर सवाल उठ सकते हैं।

E20 नीति क्यों है महत्वपूर्ण?

भारत सरकार ने पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण (E20) का लक्ष्य तय किया है। इसका उद्देश्य पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम करना, किसानों की आय बढ़ाना, पर्यावरण प्रदूषण घटाना और स्वदेशी जैव ईंधन को बढ़ावा देना है।

इसी नीति के तहत तेल विपणन कंपनियां देशभर के विभिन्न उत्पादकों से इथेनॉल खरीदती हैं। इसके लिए पारदर्शी आवंटन प्रणाली बनाई गई है ताकि सभी पात्र उत्पादकों को समान अवसर मिल सके।

यदि हाईकोर्ट का आदेश लागू हुआ तो क्या होगा?

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी एक कंपनी को अतिरिक्त आवंटन मिलता है तो अन्य कंपनियां भी समान राहत की मांग कर सकती हैं।

ऐसी स्थिति में:

  • मौजूदा आवंटन व्यवस्था प्रभावित होगी।
  • तेल कंपनियों के अनुबंधों में बदलाव करना पड़ेगा।
  • इथेनॉल सप्लाई चेन बाधित हो सकती है।
  • E20 ब्लेंडिंग लक्ष्य समय पर पूरा करने में कठिनाई आ सकती है।
  • कानूनी विवादों की संख्या बढ़ सकती है।

यही कारण है कि केंद्र सरकार इस मामले को राष्ट्रीय ऊर्जा नीति से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय मान रही है।

सुप्रीम कोर्ट का अगला कदम

सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल कर्नाटक हाईकोर्ट के आदेश पर यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया है और बीपीसीएल की याचिका पर नोटिस जारी कर संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है।

अब आने वाली सुनवाई में यह तय होगा कि हाईकोर्ट का आदेश बरकरार रहेगा या राष्ट्रीय इथेनॉल नीति को प्राथमिकता देते हुए उसे संशोधित किया जाएगा।

ऊर्जा क्षेत्र, तेल कंपनियों और इथेनॉल उद्योग की नजरें अब सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले पर टिकी हुई हैं, क्योंकि इसका असर केवल एक कंपनी तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि भारत की पूरी E20 नीति और भविष्य की जैव ईंधन रणनीति पर पड़ सकता है।


निष्कर्ष:

इथेनॉल आवंटन विवाद अब केवल एक कंपनी और तेल कंपनियों के बीच का मामला नहीं रह गया है। यह भारत की महत्वाकांक्षी E20 फ्यूल नीति, ऊर्जा सुरक्षा और जैव ईंधन कार्यक्रम के भविष्य से जुड़ा महत्वपूर्ण कानूनी मुद्दा बन चुका है। सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला आने वाले वर्षों में इथेनॉल उद्योग की दिशा और राष्ट्रीय ऊर्जा नीति दोनों को प्रभावित कर सकता है।

TAGGED: BPCL, Business News, E20 Policy, Energy News, Ethanol, Ethanol Blending, Government Policy, Hindi News, India News, Karnataka High Court, Oil Companies, Petrol, Supreme Court
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