हरिद्वार: योग गुरु स्वामी रामदेव और भाजपा सांसद कंगना रनौत के बीच चल रही जुबानी जंग एक बार फिर चर्चा में आ गई है। हरिद्वार में एक कार्यक्रम के दौरान बाबा रामदेव ने कंगना की ओर से किए गए हालिया तंज पर प्रतिक्रिया दी। हालांकि उन्होंने कंगना का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया, लेकिन उनके बयान को इसी विवाद से जोड़कर देखा जा रहा है।
स्वामी रामदेव हरिद्वार में आयोजित संत समागम में ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ विषय पर संवाद कार्यक्रम में पहुंचे थे। कार्यक्रम के दौरान मीडिया ने उनसे कंगना की ओर से दिए गए बयानों को लेकर सवाल किया। जवाब में रामदेव ने कहा कि वह इस विवाद को आगे नहीं बढ़ाना चाहते।
‘ओछे लोगों पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता’
मीडिया के सवाल पर स्वामी रामदेव ने बिना नाम लिए कहा कि वह अभी इस मुद्दे पर ज्यादा कुछ नहीं कहना चाहते। उन्होंने कहा कि वह विवाद को बढ़ावा नहीं देना चाहते।
रामदेव ने अपने जवाब में कहा कि स्वामी रामदेव क्या हैं और उनका देश के लिए योगदान क्या है, यह देश जानता है। इसके बाद उन्होंने कहा कि वह “ओछे लोगों” के बारे में कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते।
रामदेव के इस बयान के सामने आने के बाद एक बार फिर दोनों के बीच चल रही बयानबाजी चर्चा में आ गई है।
हालांकि, उन्होंने अपने जवाब में कंगना का नाम नहीं लिया और यह भी संकेत दिया कि वह विवाद को और आगे बढ़ाने के पक्ष में नहीं हैं।
कहां से शुरू हुआ था विवाद?
रामदेव और कंगना के बीच यह जुबानी विवाद सरकारी नौकरी से जुड़े इंटरव्यू में कथित गड़बड़ियों के मुद्दे से शुरू हुआ था।
दरअसल, बाबा रामदेव ने कुछ दिन पहले सरकारी नौकरी के इंटरव्यू में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाया था। उन्होंने इस मुद्दे पर आंदोलन जैसी चेतावनी भी दी थी।
इसके बाद कंगना रनौत की ओर से रामदेव के बयान पर तंज किए जाने की बात सामने आई। इसके बाद दोनों पक्षों की ओर से बयानबाजी का सिलसिला शुरू हो गया।
अब हरिद्वार में रामदेव की ताजा टिप्पणी ने इस विवाद को फिर सुर्खियों में ला दिया है।
‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ पर क्या बोले रामदेव?
हरिद्वार में रामदेव केवल इस विवाद को लेकर ही चर्चा में नहीं रहे। कार्यक्रम में उन्होंने ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ यानी देश में एक साथ चुनाव कराने के विचार पर भी अपनी राय रखी।
रामदेव का कहना है कि यदि देश में एक साथ चुनाव की व्यवस्था लागू होती है तो शिक्षा और विकास के क्षेत्र में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
उनके मुताबिक, देश में बार-बार चुनाव होने के कारण साल के कई महीने चुनावी प्रक्रिया में निकल जाते हैं। चुनाव के दौरान शिक्षकों और सरकारी कर्मचारियों को भी चुनावी ड्यूटी में लगाया जाता है।
इसका असर नियमित प्रशासनिक और विकास कार्यों पर पड़ सकता है।
शिक्षकों को बच्चों के लिए ज्यादा समय मिलेगा
रामदेव ने कहा कि एक साथ चुनाव होने की स्थिति में शिक्षकों को बार-बार चुनावी ड्यूटी में लगाने की जरूरत कम हो सकती है। इससे वे बच्चों की पढ़ाई पर ज्यादा ध्यान दे सकेंगे।
उन्होंने शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए शिक्षकों के समय को महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार, यदि शिक्षक लगातार विद्यालयों में उपलब्ध रहें तो विद्यार्थियों की पढ़ाई और शैक्षणिक गतिविधियों को बेहतर तरीके से संचालित किया जा सकता है।

विकास कार्यों पर भी पड़ेगा असर
रामदेव ने यह भी कहा कि बार-बार चुनाव होने की प्रक्रिया में सरकारों और प्रशासन का काफी समय चुनावी तैयारियों में चला जाता है। एक साथ चुनाव होने से सरकारें विकास योजनाओं और प्रशासनिक कामकाज पर ज्यादा ध्यान केंद्रित कर सकती हैं।
उनके अनुसार, चुनावी गतिविधियों में कमी आने से सरकारी मशीनरी का अधिक समय शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और विकास से जुड़े कामों में लगाया जा सकता है।
हालांकि, ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ को लेकर देश में राजनीतिक और संवैधानिक स्तर पर व्यापक चर्चा जारी है। इसके समर्थन और विरोध में अलग-अलग तर्क दिए जाते रहे हैं।
रामदेव ने विवाद बढ़ाने से किया इनकार
कंगना से जुड़े सवाल पर रामदेव का सबसे अहम संदेश यही रहा कि वह इस विवाद को और आगे नहीं बढ़ाना चाहते। उन्होंने अपने जवाब में अपने योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके बारे में देश जानता है।
इससे संकेत मिलता है कि रामदेव फिलहाल इस मुद्दे पर लंबी बयानबाजी से बचना चाहते हैं। हालांकि, “ओछे लोगों” वाली उनकी टिप्पणी सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन सकती है।
वहीं, कंगना की ओर से इस बयान पर आगे कोई प्रतिक्रिया आती है या नहीं, इस पर भी लोगों की नजर रहेगी।
निष्कर्ष
हरिद्वार में स्वामी रामदेव का बयान एक बार फिर कंगना रनौत के साथ चल रही जुबानी जंग को चर्चा में ले आया है। रामदेव ने कंगना का नाम लिए बिना कहा कि वह विवाद को बढ़ावा नहीं देना चाहते और “ओछे लोगों” पर टिप्पणी नहीं करना चाहते। वहीं, ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ को लेकर उन्होंने कहा कि इससे शिक्षा और विकास के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव आ सकते हैं। अब देखना होगा कि इस बयान के बाद कंगना की ओर से कोई प्रतिक्रिया आती है या दोनों के बीच चल रही बयानबाजी यहीं थमती है।

