जकार्ता: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीन देशों के विदेश दौरे का दूसरा दिन भारत के लिए कई मायनों में ऐतिहासिक साबित हुआ। इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के बीच उच्चस्तरीय द्विपक्षीय वार्ता हुई, जिसके बाद दोनों देशों ने रक्षा, कृषि, स्वास्थ्य, डिजिटल भुगतान, खनिज, इस्पात, तकनीक और चुनावी सहयोग समेत 14 महत्वपूर्ण समझौतों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए।
इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी का इंडोनेशिया के राष्ट्रपति भवन इस्ताना मर्देका में भव्य राजकीय स्वागत किया गया। इतना ही नहीं, राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने प्रधानमंत्री मोदी को इंडोनेशिया का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भी प्रदान किया, जिसे भारत और इंडोनेशिया की मजबूत मित्रता का प्रतीक माना जा रहा है।
भारत-इंडोनेशिया रिश्तों को मिली नई मजबूती
द्विपक्षीय वार्ता के दौरान दोनों नेताओं ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा, समुद्री सहयोग, व्यापार, निवेश, रक्षा उत्पादन और नई तकनीकों पर विस्तार से चर्चा की। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और इंडोनेशिया के संबंध केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और ऐतिहासिक भी हैं।
उन्होंने कहा कि दोनों देश इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए मिलकर कार्य कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आज हुए समझौते भविष्य की साझेदारी को नई दिशा देंगे।
ब्रह्मोस मिसाइल समझौता बना सबसे बड़ा आकर्षण
इस यात्रा का सबसे बड़ा आकर्षण ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल से जुड़ा समझौता रहा। समझौते के तहत भारत इंडोनेशिया की सेना को ब्रह्मोस मिसाइलों की आपूर्ति करेगा।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की रणनीतिक भूमिका को और मजबूत करेगा। इससे दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगा।

UPI पहुंचेगा इंडोनेशिया
प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि भारत का डिजिटल भुगतान सिस्टम UPI (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) जल्द ही इंडोनेशिया से जुड़ने जा रहा है।
इससे दोनों देशों के नागरिकों और व्यापारियों को सीमा पार डिजिटल भुगतान करने में आसानी होगी। पर्यटन, व्यापार और निवेश को भी इससे बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है।
कृषि, मेडिकल और इंडस्ट्री में भी बड़ी साझेदारी
बैठक के दौरान कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीक साझा करने, खाद्य सुरक्षा बढ़ाने और अनुसंधान को बढ़ावा देने पर सहमति बनी।
मेडिकल सेक्टर में दवाइयों, चिकित्सा उपकरणों और हेल्थकेयर टेक्नोलॉजी को लेकर भी समझौते हुए। दोनों देशों ने स्वास्थ्य सेवाओं में सहयोग बढ़ाने का फैसला किया।
खनिज और स्टील सेक्टर में भी अहम समझौते हुए, जिससे सप्लाई चेन को मजबूत किया जाएगा। विशेष रूप से स्टेनलेस स्टील और रेयर अर्थ मैग्नेट के क्षेत्र में दोनों देशों की कंपनियों के बीच नई साझेदारी विकसित होगी।
EVM और तकनीकी सहयोग
भारत और इंडोनेशिया के बीच चुनावी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और तकनीकी रूप से सक्षम बनाने के लिए भी सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। इसके अलावा डिजिटल गवर्नेंस, साइबर सुरक्षा और नई तकनीकों में सहयोग बढ़ाने के लिए कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए।
सर्वोच्च सम्मान मिलने पर क्या बोले पीएम मोदी?
प्रधानमंत्री मोदी ने इंडोनेशिया सरकार और राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मान केवल उनका नहीं बल्कि 140 करोड़ भारतीयों का सम्मान है।
उन्होंने कहा कि भारत और इंडोनेशिया की साझेदारी का एक स्वर्णिम अध्याय चल रहा है और दोनों देश रक्षा, व्यापार, शिक्षा, संस्कृति और तकनीक समेत हर क्षेत्र में तेज़ी से आगे बढ़ रहे हैं।
हिंद-प्रशांत में भारत की बढ़ती भूमिका
विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रह्मोस, डिजिटल भुगतान और रणनीतिक सहयोग से जुड़े समझौते भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ को और मजबूत करेंगे।
इंडोनेशिया, आसियान (ASEAN) का सबसे बड़ा देश है और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में उसकी अहम रणनीतिक स्थिति है। ऐसे में दोनों देशों की बढ़ती साझेदारी क्षेत्रीय सुरक्षा, समुद्री व्यापार और आर्थिक सहयोग के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
निष्कर्ष:
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इंडोनेशिया यात्रा केवल एक राजकीय दौरा नहीं, बल्कि भारत की वैश्विक कूटनीति का मजबूत प्रदर्शन भी साबित हुई। ब्रह्मोस मिसाइल से लेकर UPI, कृषि, स्वास्थ्य, खनिज और तकनीकी सहयोग तक 14 बड़े समझौतों ने दोनों देशों के संबंधों को नई ऊंचाई दी है। वहीं, पीएम मोदी को मिला इंडोनेशिया का सर्वोच्च सम्मान इस बात का संकेत है कि भारत की अंतरराष्ट्रीय साख लगातार मजबूत हो रही है।

