Independence Day 2026: स्वतंत्रता दिवस पर खरगे का मोदी सरकार पर तीखा हमला, बोले- ‘हर चीज का श्रेय लेते हैं’
नई दिल्ली। देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र की भाजपा सरकार पर जमकर निशाना साधा। कांग्रेस मुख्यालय में तिरंगा फहराने के बाद खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लाल किले से दिए गए भाषण और केंद्र सरकार की नीतियों पर कई गंभीर राजनीतिक आरोप लगाए। इस दौरान कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी मौजूद रहे।
अपने संबोधन में खरगे ने कहा कि कांग्रेस के लिए आजादी का अर्थ केवल सत्ता हासिल करना नहीं, बल्कि देश के प्रत्येक नागरिक को शिक्षा, अवसर, सम्मान और अधिकार दिलाना है। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार गरीबों की समस्याओं को नजरअंदाज कर रही है और देश में लोगों को बांटने वाली राजनीति को बढ़ावा दिया जा रहा है।
पीएम मोदी के भाषण पर खरगे ने साधा निशाना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित किया। खरगे ने उनके भाषण पर प्रतिक्रिया देते हुए सरकार के विकास और उपलब्धियों के दावों पर सवाल खड़े किए।
कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री लाल किले से कई ऐसी उपलब्धियों का श्रेय भी लेते हैं, जिनकी नींव पिछली सरकारों के दौरान रखी गई थी। खरगे ने कहा कि इतिहास में यह दर्ज है कि कौन-सी योजना और कानून कब और किस सरकार के कार्यकाल में लागू हुआ।
उन्होंने यूपीए सरकार के दौरान लागू किए गए अधिकार आधारित कानूनों का उल्लेख करते हुए कहा कि भोजन का अधिकार, शिक्षा का अधिकार और मनरेगा जैसे प्रावधानों ने गरीब और आम नागरिकों को अधिकार देने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सोनिया गांधी की भूमिका का किया जिक्र
खरगे ने अपने संबोधन में कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी की भूमिका का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि यूपीए सरकार के दौरान अधिकार आधारित नीतियां तैयार करने में सोनिया गांधी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
खरगे ने कहा कि देश के गरीबों और आम नागरिकों को मिले कई अधिकार कांग्रेस सरकारों के दौरान बनाए गए कानूनों की देन हैं। उन्होंने मौजूदा सरकार पर आरोप लगाया कि उसने इस तरह के कोई नए मूलभूत अधिकार नहीं दिए।
हालांकि, ये खरगे के राजनीतिक दावे हैं और इन पर भाजपा की ओर से अलग-अलग मौकों पर जवाब दिया जाता रहा है।
नेहरू से लेकर इंदिरा गांधी तक का किया जिक्र
कांग्रेस अध्यक्ष ने देश के निर्माण में पूर्व प्रधानमंत्रियों के योगदान को भी याद किया। उन्होंने जवाहरलाल नेहरू का जिक्र करते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में आईआईटी, आईआईएम और सार्वजनिक क्षेत्र के कई संस्थानों की नींव रखी गई।
उन्होंने लाल बहादुर शास्त्री के कार्यकाल में कृषि और दुग्ध क्षेत्र से जुड़े प्रयासों का उल्लेख किया। वहीं, इंदिरा गांधी के कार्यकाल की चर्चा करते हुए उन्होंने 1971 के युद्ध, बांग्लादेश के निर्माण और सिक्किम के भारत में विलय जैसे घटनाक्रमों को कांग्रेस नेतृत्व से जोड़ा।
खरगे ने कहा कि इन नेताओं ने देश की संस्थागत और रणनीतिक क्षमता को मजबूत करने में योगदान दिया।

संसद में जवाबदेही को लेकर भी सवाल
खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर संसद में सवालों के सीधे जवाब देने से बचने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार को संसद के प्रति जवाबदेह होना चाहिए और विपक्ष के सवालों का जवाब सदन के भीतर देना चाहिए।
उन्होंने केंद्र सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि लोकतंत्र में संसद जनता के सवालों पर चर्चा और जवाबदेही का महत्वपूर्ण मंच है।
धर्म और आस्था के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा
खरगे ने धर्म और आस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर भी केंद्र सरकार पर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार ने धार्मिक भावनाओं और आस्था से जुड़े मामलों को भी राजनीतिक बहस का हिस्सा बना दिया है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि उनके लिए स्वतंत्रता का अर्थ तभी पूरा होगा, जब देश का हर बच्चा स्कूल जा सके, गरीब की आवाज सुनी जाए और युवाओं को आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर मिलें।
युवाओं के आंदोलनों का भी किया जिक्र
खरगे ने देश में चल रहे विभिन्न युवा आंदोलनों और प्रदर्शनों का उल्लेख करते हुए कहा कि संविधान नागरिकों को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने का अधिकार देता है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को लेकर कथित नफरत भरे अभियान पर चिंता जताई।
उन्होंने कांग्रेस के ‘मोहब्बत की दुकान’ वाले राजनीतिक संदेश को दोहराते हुए कहा कि देश में नफरत के बजाय भाईचारे और सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
खरगे ने भाजपा और आरएसएस पर विभाजनकारी राजनीति का आरोप लगाया। हालांकि, उनके इन आरोपों पर भाजपा की ओर से जवाब आना बाकी है और इन्हें राजनीतिक आरोपों के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
निष्कर्ष
स्वतंत्रता दिवस 2026 के मौके पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का संबोधन पूरी तरह राजनीतिक तेवरों से भरा रहा। उन्होंने एक ओर कांग्रेस की पिछली सरकारों के कामकाज और अधिकार आधारित योजनाओं को अपनी पार्टी की उपलब्धि बताया, वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर श्रेय लेने, संसद में जवाबदेही से बचने और गरीबों व प्रदर्शनकारियों के मुद्दों पर निशाना साधा।
अब इस बयान पर भाजपा की प्रतिक्रिया राजनीतिक बहस को और तेज कर सकती है। स्वतंत्रता दिवस के मंच से शुरू हुई यह सियासी बयानबाजी आने वाले दिनों में संसद और राजनीतिक मंचों पर भी देखने को मिल सकती है।

