लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से रिश्तों को शर्मसार कर देने वाला एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां चिनहट इलाके में रहने वाले 29 वर्षीय युवक ने अपनी पत्नी पर खांसी की दवा देने के बहाने पानी में जहर मिलाकर पिलाने का गंभीर आरोप लगाया है। युवक का दावा है कि उसकी पत्नी का पिछले एक साल से एक युवक के साथ प्रेम संबंध था और उसी रिश्ते के चलते उसकी हत्या की साजिश रची गई।
फिलहाल पीड़ित युवक लखनऊ के डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के नेफ्रोलॉजी विभाग में भर्ती है, जहां उसका इलाज चल रहा है। अस्पताल में भर्ती युवक ने कहा कि घटना के बाद से उसकी पत्नी एक बार भी उसका हालचाल पूछने नहीं आई। उसने आरोप लगाया कि जहर देने के बाद पत्नी कमरे का दरवाजा बाहर से बंद कर चली गई थी, जिससे उसकी हालत और बिगड़ गई।
आठ साल पहले हुई थी लव मैरिज
पीड़ित दिलेराम मूल रूप से सीतापुर जिले के रामपुर मथुरा का रहने वाला है। करीब आठ वर्ष पहले उसने बाराबंकी निवासी सुषमा से प्रेम विवाह किया था। शादी के बाद दोनों लखनऊ के चिनहट इलाके में किराये के मकान में रहने लगे। शादी के कई साल बीत जाने के बावजूद दोनों की कोई संतान नहीं हुई।
दिलेराम प्लंबर का काम करता है, जबकि उसकी पत्नी हाउसकीपिंग का काम करती है।
काम के दौरान दूसरे युवक से हुई नजदीकी
दिलेराम का आरोप है कि उसकी पत्नी जहां काम करती थी, वहीं उसकी मुलाकात बाराबंकी के हैदरगढ़ निवासी पंकज से हुई। पंकज ई-रिक्शा चालक है। धीरे-धीरे दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और प्रेम संबंध बन गए।
पीड़ित के अनुसार, जब उसने इस रिश्ते का विरोध किया तो पत्नी उससे झगड़ा करने लगी। इतना ही नहीं, उसने आरोप लगाया कि कथित प्रेमी ने भी उसके साथ मारपीट की थी।
रक्षाबंधन पर रंगे हाथ पकड़ा था
दिलेराम का कहना है कि पिछले रक्षाबंधन के दौरान उसने पत्नी और उसके कथित प्रेमी को आपत्तिजनक स्थिति में देख लिया था। उस समय पत्नी ने अपनी गलती मानकर माफी मांग ली थी, लेकिन इसके बावजूद दोनों का मिलना-जुलना जारी रहा।
उसका आरोप है कि पत्नी उसके साथ कहीं जाने से मना कर देती थी, जबकि प्रेमी के साथ खुलेआम घूमती थी।

पहले भी पुलिस से की थी शिकायत
पीड़ित ने बताया कि उसने इसी वर्ष 28 जनवरी को चिनहट थाने में पत्नी और उसके कथित प्रेमी के खिलाफ शिकायत दी थी। उसका आरोप है कि उस समय कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। यदि समय रहते कार्रवाई होती तो शायद यह घटना नहीं होती।
कैसे दिया गया कथित जहर?
दिलेराम के अनुसार, 18 जून को काम से लौटने के बाद उसने पत्नी से खाने के बारे में पूछा। इस बात को लेकर दोनों के बीच विवाद हुआ। कुछ देर बाद पत्नी उसके लिए पानी लेकर आई और कहा कि उसे खांसी है, इसलिए दवा मिला पानी पी ले।
युवक ने बताया कि उसे पहले थोड़ा संदेह हुआ, लेकिन पत्नी पर भरोसा करके उसने पानी पी लिया। पानी पीते ही उसे तेज कड़वाहट महसूस हुई और थोड़ी देर बाद उल्टी-दस्त शुरू हो गए।
कमरे में बंद कर चली गई पत्नी
पीड़ित का दावा है कि जब उसने पत्नी से पानी के बारे में पूछा तो वह कमरे का दरवाजा बाहर से बंद करके दूसरे कमरे में चली गई। हालत लगातार बिगड़ने लगी तो उसने किसी तरह अपने परिजनों को फोन कर जानकारी दी।
अगले दिन वह अपने भाई की मदद से सीतापुर पहुंचा, जहां स्थानीय अस्पताल में प्राथमिक इलाज के बाद उसे बाराबंकी और फिर गंभीर हालत में लखनऊ के राम मनोहर लोहिया अस्पताल रेफर कर दिया गया।
‘अस्पताल में देखने तक नहीं आई’
दिलेराम ने भावुक होते हुए कहा कि अगर उसकी पत्नी निर्दोष होती तो कम से कम अस्पताल में उसका हाल पूछने जरूर आती। उसका आरोप है कि पत्नी अब भी अपने कथित प्रेमी के साथ रह रही है।
पुलिस क्या कह रही है?
पीड़ित का कहना है कि उसने ऑनलाइन शिकायत भी दर्ज कराई है और एक पुलिसकर्मी अस्पताल में बयान लेने आया था। हालांकि, अभी तक इस मामले में कोई औपचारिक एफआईआर दर्ज होने की पुष्टि नहीं हुई है।
वहीं चिनहट थाना प्रभारी दिनेश मिश्रा ने बताया कि अभी तक लिखित तहरीर प्राप्त नहीं हुई है। यदि शिकायत मिलती है तो उपलब्ध साक्ष्यों और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
जांच के बाद ही साफ होगी सच्चाई
फिलहाल यह मामला युवक के आरोपों पर आधारित है। पुलिस का कहना है कि मेडिकल रिपोर्ट, फॉरेंसिक जांच और अन्य साक्ष्यों के आधार पर ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि युवक को वास्तव में जहर दिया गया था या नहीं तथा आरोपों में कितनी सच्चाई है। जांच पूरी होने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी।
निष्कर्ष:
लखनऊ का यह मामला वैवाहिक रिश्तों में बढ़ते अविश्वास और कथित प्रेम संबंधों से जुड़े गंभीर आरोपों की ओर इशारा करता है। हालांकि युवक ने पत्नी और उसके कथित प्रेमी पर हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाया है, लेकिन अंतिम सच पुलिस जांच, मेडिकल रिपोर्ट और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही सामने आएगा। ऐसे मामलों में तथ्यों की पुष्टि होने तक किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।

