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Home - दिल्ली - E20 विवाद पर एक्शन में नितिन गडकरी! बॉम्बे हाई कोर्ट पहुंचे केंद्रीय मंत्री, Meta-X-Google के खिलाफ केस की मिली मंजूरी

E20 विवाद पर एक्शन में नितिन गडकरी! बॉम्बे हाई कोर्ट पहुंचे केंद्रीय मंत्री, Meta-X-Google के खिलाफ केस की मिली मंजूरी

Rajat Kumar
Last updated: 2026/07/27 at 3:51 PM
Rajat Kumar
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5 Min Read
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E20 विवाद पर कोर्ट पहुंचे नितिन गडकरी, Meta-Google-X के खिलाफ सिविल केस की मिली अनुमति

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग: मंत्री नितिन गडकरी ने ई20 एथनॉल ब्लेंड फ्यूल पॉलिसी को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कथित अपमानजनक पोस्ट, झूठे दावों और डीपफेक सामग्री के खिलाफ बड़ा कानूनी कदम उठाया है। उन्होंने बॉम्बे हाई कोर्ट का रुख करते हुए Meta, Google, X (पूर्व में Twitter) सहित अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ सिविल केस दायर करने की अनुमति मांगी थी, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया है।

Contents
E20 विवाद पर कोर्ट पहुंचे नितिन गडकरी, Meta-Google-X के खिलाफ सिविल केस की मिली अनुमतिक्या है पूरा मामला?‘ई20 नीति पेट्रोलियम मंत्रालय के अधीन’बॉम्बे हाई कोर्ट ने क्या कहा?क्या है E20 एथनॉल ब्लेंड फ्यूल पॉलिसी?क्यों हो रही है E20 नीति की आलोचना?आलोचकों को पहले भी दे चुके हैं चुनौतीसोशल मीडिया पर डीपफेक की बढ़ती चुनौतीनिष्कर्ष

यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब ई20 ईंधन नीति को लेकर देशभर में बहस जारी है और सोशल मीडिया पर इस विषय से जुड़े कई दावे तेजी से वायरल हो रहे हैं।


क्या है पूरा मामला?

नितिन गडकरी ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि सोशल मीडिया पर कुछ पोस्ट और डीपफेक वीडियो के माध्यम से यह झूठा प्रचार किया जा रहा है कि ई20 एथनॉल ब्लेंड फ्यूल पॉलिसी से उन्हें और उनके परिवार को आर्थिक लाभ हो रहा है।

याचिका के अनुसार, इन पोस्ट में यह भी दावा किया गया कि ई20 कार्यक्रम के पीछे गडकरी की व्यक्तिगत भूमिका है और इस नीति से उनके निजी हित जुड़े हुए हैं।

गडकरी का कहना है कि यह दावा पूरी तरह निराधार, भ्रामक और उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाला है।


‘ई20 नीति पेट्रोलियम मंत्रालय के अधीन’

याचिका में यह भी स्पष्ट किया गया है कि ई20 एथनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम का संचालन पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा किया जाता है।

गडकरी ने कहा कि उन्हें इस योजना का व्यक्तिगत लाभार्थी बताना तथ्यात्मक रूप से गलत है और सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही ऐसी सामग्री जनता को भ्रमित करने के साथ-साथ उनकी छवि को भी नुकसान पहुंचा रही है।

इसी आधार पर उन्होंने संबंधित डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की अनुमति मांगी।


बॉम्बे हाई कोर्ट ने क्या कहा?

रिपोर्ट के अनुसार, बॉम्बे हाई कोर्ट ने गडकरी को Meta, Google, X और अन्य संबंधित पक्षों के खिलाफ सिविल मुकदमा दायर करने की अनुमति प्रदान कर दी है।

इस आदेश के बाद अब केंद्रीय मंत्री इन प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ कथित मानहानिकारक और भ्रामक सामग्री को हटाने तथा अन्य कानूनी राहत की मांग कर सकते हैं।

हालांकि, मामले के गुण-दोष पर अंतिम फैसला अदालत की आगामी सुनवाई में होगा।


क्या है E20 एथनॉल ब्लेंड फ्यूल पॉलिसी?

ई20 नीति के तहत पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथनॉल मिलाने का लक्ष्य रखा गया है।

सरकार का कहना है कि इस पहल से:

  • कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होगी।
  • किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।
  • ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी आएगी।
  • पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।
  • स्वच्छ ईंधन के उपयोग को प्रोत्साहन मिलेगा।

सरकार इसे ऊर्जा सुरक्षा और हरित अर्थव्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानती है।


क्यों हो रही है E20 नीति की आलोचना?

हाल के महीनों में कई वाहन मालिकों और विशेषज्ञों ने पुराने वाहन मॉडलों में E20 ईंधन के उपयोग को लेकर चिंताएं व्यक्त की हैं।

कुछ लोगों का कहना है कि पुराने इंजन E20 ईंधन के लिए पूरी तरह अनुकूल नहीं हो सकते, जबकि सरकार और वाहन निर्माता कंपनियों का कहना है कि निर्धारित मानकों के अनुसार बनाए गए वाहनों में इसका सुरक्षित उपयोग संभव है।

इसी बहस के बीच सोशल मीडिया पर कई दावे और वीडियो वायरल हुए, जिनमें से कुछ को गडकरी ने भ्रामक बताया है।


आलोचकों को पहले भी दे चुके हैं चुनौती

इस महीने की शुरुआत में नितिन गडकरी ने E20 ईंधन को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए आलोचकों को खुली चुनौती दी थी।

उन्होंने कहा था कि यदि किसी के पास ऐसा एक भी प्रमाणित उदाहरण है जिसमें E20 पेट्रोल के कारण किसी कार में समस्या आई हो, तो उसका नाम सार्वजनिक किया जाए।

गडकरी ने कहा था:

“E20 पेट्रोल की वजह से किसी भी कार में कोई समस्या आने का मामला सामने नहीं आया है। अगर किसी के पास ऐसा उदाहरण है तो वह बताएं।”

उनके इस बयान के बाद भी सोशल मीडिया पर बहस जारी रही।

यह भी पढ़ें- अस्पताल से सीधे राजघाट पहुंचे सोनम वांगचुक, बोले- ‘बापू का रास्ता आज भी सबसे प्रासंगिक’, लद्दाख लौटने से पहले दिया बड़ा संदेश


सोशल मीडिया पर डीपफेक की बढ़ती चुनौती

हाल के वर्षों में डीपफेक तकनीक और AI आधारित फर्जी वीडियो तेजी से बढ़े हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की सामग्री से न केवल किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा प्रभावित होती है बल्कि गलत सूचना भी तेजी से फैलती है।

गडकरी का यह मामला डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही और ऑनलाइन कंटेंट मॉडरेशन को लेकर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


निष्कर्ष

ई20 एथनॉल ब्लेंड फ्यूल पॉलिसी को लेकर फैलाए जा रहे कथित भ्रामक पोस्ट और डीपफेक के खिलाफ नितिन गडकरी का बॉम्बे हाई कोर्ट पहुंचना यह संकेत देता है कि सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर फैलाई जाने वाली गलत सूचनाओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का रास्ता तेजी से मजबूत हो रहा है। अब इस मामले की अगली सुनवाई और अदालत का अंतिम फैसला तय करेगा कि संबंधित प्लेटफॉर्म्स और कथित पोस्ट करने वालों की क्या जिम्मेदारी बनती है।

TAGGED: Deepfake, E20, Google, Latest News, Meta, X, एथनॉल ब्लेंड फ्यूल, नितिन गडकरी, बीजेपी, बॉम्बे हाई कोर्ट, भारत सरकार, सड़क परिवहन मंत्रालय, सोशल मीडिया
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