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Home - अंतरराष्ट्रीय - PoK में खूनी बवाल! 12 सीटों के विवाद ने ली 27 जानें, आसिम मुनीर के खिलाफ सड़कों पर उतरे लोग

PoK में खूनी बवाल! 12 सीटों के विवाद ने ली 27 जानें, आसिम मुनीर के खिलाफ सड़कों पर उतरे लोग

Rajat Kumar
Last updated: 2026/06/09 at 3:50 PM
Rajat Kumar
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4 Min Read
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PoK में आरक्षित सीटों को लेकर भड़का जनाक्रोश, हिंसक झड़पों में 27 लोगों की मौत का दावा

पाकिस्तान: अधिकृत कश्मीर (PoK) इन दिनों गंभीर राजनीतिक और सामाजिक उथल-पुथल का सामना कर रहा है। विधानसभा की 12 आरक्षित सीटों को लेकर शुरू हुआ विवाद अब बड़े जनआंदोलन में बदल चुका है। कई इलाकों में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच टकराव की खबरें सामने आई हैं।

Contents
PoK में आरक्षित सीटों को लेकर भड़का जनाक्रोश, हिंसक झड़पों में 27 लोगों की मौत का दावाआखिर क्या है 12 आरक्षित सीटों का विवाद?JAAC क्यों कर रहा है विरोध?कैसे बढ़ा विवाद?मुजफ्फराबाद समझौते से क्यों नहीं निकला समाधान?सरकार का क्या कहना है?क्षेत्र में बढ़ी राजनीतिक बेचैनीनिष्कर्ष

स्थानीय संगठनों का आरोप है कि मौजूदा व्यवस्था क्षेत्र के मूल निवासियों के राजनीतिक अधिकारों को कमजोर करती है। वहीं प्रशासन का कहना है कि संवैधानिक व्यवस्था के तहत प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया गया है।

रिपोर्टों के अनुसार हालिया झड़पों में 27 प्रदर्शनकारियों की मौत और करीब 200 लोगों के घायल होने का दावा किया जा रहा है। हालांकि इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

आखिर क्या है 12 आरक्षित सीटों का विवाद?

PoK विधानसभा में कुल 53 सदस्य हैं। इनमें 45 सीटों पर सीधे चुनाव होते हैं जबकि शेष सीटें विभिन्न वर्गों के लिए आरक्षित हैं।

विवाद उन 12 सीटों को लेकर है जो जम्मू-कश्मीर से पाकिस्तान के अन्य हिस्सों में जाकर बसे शरणार्थी परिवारों के प्रतिनिधित्व के लिए निर्धारित हैं। इनमें 1947, 1965 और 1971 के संघर्षों के दौरान विस्थापित हुए परिवारों के प्रतिनिधि शामिल होते हैं।

स्थानीय संगठनों का कहना है कि इन सीटों के कारण राजनीतिक संतुलन प्रभावित होता है और स्थानीय जनता की वास्तविक भागीदारी कम हो जाती है।

JAAC क्यों कर रहा है विरोध?

जम्मू-कश्मीर जॉइंट आवामी एक्शन कमेटी (JAAC) लंबे समय से इन सीटों को समाप्त करने की मांग कर रही है।

संगठन का आरोप है कि आरक्षित सीटों की वर्तमान व्यवस्था कुछ खास समूहों को राजनीतिक लाभ पहुंचाती है जबकि स्थानीय लोगों की आवाज कमजोर पड़ जाती है।

JAAC का कहना है कि विधानसभा में स्थानीय आबादी के अनुपात के अनुसार प्रतिनिधित्व बढ़ाया जाना चाहिए और चुनावी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाया जाना चाहिए।

कैसे बढ़ा विवाद?

पिछले कुछ महीनों में आंदोलन ने लगातार गति पकड़ी। विभिन्न शहरों और कस्बों में रैलियां, धरने और विरोध प्रदर्शन आयोजित किए गए।

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया गया। इसके बाद कई स्थानों पर आंदोलन उग्र हो गया और सुरक्षा बलों के साथ टकराव की स्थिति बन गई।

स्थिति तब और तनावपूर्ण हो गई जब प्रदर्शनकारियों ने बड़े पैमाने पर हड़ताल और सड़कों पर प्रदर्शन शुरू कर दिए।

मुजफ्फराबाद समझौते से क्यों नहीं निकला समाधान?

अक्टूबर 2025 में सरकार और JAAC के बीच एक समझौता हुआ था, जिसे ‘मुजफ्फराबाद समझौता’ कहा गया।

इस समझौते के तहत सब्सिडी, मुआवजा, प्रशासनिक सुधार और जनहित से जुड़े कई कदम उठाने का आश्वासन दिया गया था।

कुछ समय के लिए हालात सामान्य भी हुए, लेकिन आंदोलनकारी संगठनों का आरोप है कि समझौते के अधिकांश वादे जमीन पर लागू नहीं किए गए।

यही वजह रही कि असंतोष फिर से बढ़ता गया और आंदोलन ने नया रूप ले लिया।

सरकार का क्या कहना है?

प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि कई मांगों पर पहले ही काम किया जा चुका है और विकास योजनाओं को आगे बढ़ाया जा रहा है।

सरकार का दावा है कि राजनीतिक प्रतिनिधित्व की वर्तमान व्यवस्था संवैधानिक ढांचे के अनुरूप है और सभी समुदायों को उचित भागीदारी देने के उद्देश्य से बनाई गई है।

हालांकि प्रदर्शनकारी संगठन इस दावे से सहमत नहीं हैं और व्यापक राजनीतिक सुधारों की मांग पर अड़े हुए हैं।

क्षेत्र में बढ़ी राजनीतिक बेचैनी

विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद केवल 12 सीटों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे राजनीतिक प्रतिनिधित्व, प्रशासनिक जवाबदेही और क्षेत्रीय अधिकारों से जुड़ी व्यापक चिंताएं भी मौजूद हैं।

लगातार बढ़ते विरोध प्रदर्शनों ने क्षेत्र में राजनीतिक अस्थिरता और सामाजिक तनाव को भी बढ़ाया है।

स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त बल तैनात किए गए हैं।

निष्कर्ष

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में 12 आरक्षित सीटों को लेकर शुरू हुआ विवाद अब बड़े राजनीतिक संकट का रूप ले चुका है। एक ओर प्रदर्शनकारी राजनीतिक ढांचे में बदलाव की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्रशासन व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश में जुटा है। आने वाले दिनों में सरकार और आंदोलनकारी संगठनों के बीच बातचीत ही इस संकट के समाधान का रास्ता तय कर सकती है।

TAGGED: JAAC, Kashmir Politics, Muzaffarabad, Pakistan News, Pakistan Occupied Kashmir, PoK News, Protest News, World News
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