Punjab Rail Roko Protest: मांगों पर बात नहीं बनी तो ट्रैक पर उतरे किसान
चंडीगढ़। पंजाब में किसानों और मजदूरों का आंदोलन 17 सितंबर 2026 को एक नए चरण में पहुंच गया। किसान मजदूर मोर्चा चैप्टर पंजाब ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर रेल रोको आंदोलन शुरू किया। संगठन के अनुसार अमृतसर, गुरदासपुर, फिरोजपुर, मोगा, संगरूर और सुनाम समेत छह स्थानों पर रेलवे ट्रैक पर प्रदर्शन किया गया। इससे कई रेल मार्गों पर परिचालन प्रभावित होने की स्थिति बनी।
मोर्चे ने पहले पंजाब सरकार को 17 सितंबर दोपहर 12 बजे तक मांगों पर ठोस समाधान निकालने का समय दिया था। 16 सितंबर को जारी घोषणा में पांच प्रमुख स्थानों—देवीदासपुरा (अमृतसर), संगरूर-सुनाम, गुरदासपुर, मोगा और फिरोजपुर—का उल्लेख किया गया था। 17 सितंबर की रिपोर्टों में छह स्थानों पर रेल यातायात रोके जाने की जानकारी सामने आई।
मोगा में किसानों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की
मोगा में किसान मजदूर मोर्चा से जुड़ी किसान जत्थेबंदियों ने गांव महेश्वरी संधूया के पास रेलवे ट्रैक पर धरना शुरू किया। प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस बल तैनात किया गया था।
किसानों को रेलवे ट्रैक तक पहुंचने से रोकने के लिए बैरिकेडिंग की गई। हालांकि प्रदर्शनकारी बैरिकेड पार कर ट्रैक तक पहुंच गए और वहां बैठकर पंजाब सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। इस दौरान रेलवे स्टेशन के बाहर किसानों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी।
किसान नेता बलदेव सिंह जीरा ने कहा कि किसान पहले से डीसी कार्यालयों और पंजाब सरकार के मंत्रियों के आवासों के बाहर धरना दे रहे थे। उनके मुताबिक मांगों पर पर्याप्त पहल नहीं होने के कारण संगठन ने रेल रोको आंदोलन का रास्ता अपनाया।
छह जगहों पर रेल यातायात रोकने का दावा
किसान मजदूर मोर्चा के अनुसार आंदोलन के पहले चरण में छह स्थानों पर रेल यातायात रोका गया है। इनमें शामिल हैं:
- अमृतसर
- गुरदासपुर
- फिरोजपुर
- मोगा
- संगरूर
- सुनाम
अमृतसर में देवीदासपुरा रेलवे ट्रैक को आंदोलन का प्रमुख केंद्र बनाया गया। 16 सितंबर को मोर्चे ने कहा था कि वहां बारिश के बावजूद किसान धरने पर डटे हुए हैं।
इसके साथ ही पंजाब सरकार के मंत्रियों के घरों के बाहर चल रहे धरनों को भी जारी रखने की बात कही गई है।

सुनाम में जाखल-लुधियाना रेलवे ट्रैक पर धरना
सुनाम में भारतीय किसान यूनियन एकता आजाद ने भी आंदोलन को आगे बढ़ाया। संगठन के मुताबिक मंत्री के आवास के बाहर लगातार तीन दिन धरना देने के बाद आंदोलन के चौथे दिन किसानों ने जाखल-लुधियाना रेलवे ट्रैक पर धरना शुरू किया।
किसान नेताओं ने सरकार पर मांगों को लेकर गंभीर पहल नहीं करने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि पहले शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन किया गया, लेकिन समाधान नहीं निकलने के बाद रेल रोको आंदोलन का सहारा लिया गया।
रेलवे प्रशासन और स्थानीय पुलिस ने स्थिति पर नजर बनाए रखी।
किसान मजदूर मोर्चा की प्रमुख मांगें क्या हैं?
किसान मजदूर मोर्चा ने कई मुद्दों को आंदोलन का आधार बनाया है। संगठन के नेताओं के अनुसार इनमें कृषि नीति, किसानों का मुआवजा, MSP और बिजली से जुड़े विषय शामिल हैं।
मोर्चे की प्रमुख मांगों में फसलों पर MSP की कानूनी गारंटी और सरकारी खरीद, किसानों-मजदूरों की कर्जमाफी, आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले किसानों के परिवारों को नौकरी और मुआवजा तथा घायल किसानों को मुआवजा देने की मांग शामिल है।
इसके अलावा संगठन ने पराली, पुलिस और रेलवे से जुड़े मामलों को वापस लेने तथा पिछले किसान आंदोलनों के दौरान हुए नुकसान की भरपाई की मांग भी रखी है।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर भी स्पष्टीकरण की मांग
किसान मजदूर मोर्चा ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर भी सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। संगठन चाहता है कि कृषि क्षेत्र और किसानों पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर स्पष्ट जानकारी दी जाए।
इसके साथ ही बिजली संशोधन अधिनियम और बीज संशोधन से जुड़े मुद्दों पर भी किसान नेताओं ने स्पष्टीकरण की मांग की है।
शंभू-खनौरी आंदोलन के नुकसान का मुआवजा
किसान नेताओं ने शंभू-खनौरी मोर्चे के दौरान हुए नुकसान को भी प्रमुख मुद्दा बनाया है। संगठन के अनुसार उस दौरान करीब ₹3.77 करोड़ का नुकसान हुआ और सैकड़ों किसान घायल हुए।
यह आंकड़ा किसान संगठनों द्वारा दिया गया दावा है; आंदोलन से जुड़े नुकसान और मुआवजे के अंतिम आंकड़ों का निर्धारण संबंधित सरकारी रिकॉर्ड और प्रक्रिया के आधार पर अलग हो सकता है।
पहले दिया था सरकार को अल्टीमेटम
किसान मजदूर मोर्चा के नेता सरवण सिंह पंधेर के अनुसार, संगठन ने करीब एक महीने पहले मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर अपनी मांगों से अवगत कराया था। इसके बाद 31 अगस्त को डिप्टी कमिश्नर कार्यालयों के बाहर भी प्रदर्शन किए गए।
मोर्चे के नेताओं का कहना है कि इसके बावजूद सरकार के साथ उनकी मांगों पर ठोस बातचीत नहीं हुई। 16 सितंबर को संगठन ने घोषणा की थी कि अगर 17 सितंबर दोपहर 12 बजे तक समाधान नहीं निकला तो रेल रोको आंदोलन शुरू किया जाएगा।
अब आगे क्या होगा?
किसान मजदूर मोर्चा ने 18 सितंबर को अगली बैठक करने की बात कही है। इसमें 17 सितंबर के आंदोलन और पंजाब सरकार की प्रतिक्रिया की समीक्षा की जाएगी। इसके बाद आंदोलन को लेकर आगे की रणनीति तय की जाएगी।
इस बीच रेल ट्रैक पर प्रदर्शन के कारण यात्रियों और रेलवे परिचालन पर असर पड़ सकता है। प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ रेल सेवाओं को सुचारू रखने की चुनौती है।
निष्कर्ष
पंजाब में किसान मजदूर मोर्चा का रेल रोको आंदोलन किसानों और मजदूरों की विभिन्न मांगों को लेकर शुरू हुआ है। अमृतसर, गुरदासपुर, फिरोजपुर, मोगा, संगरूर और सुनाम में प्रदर्शन की रिपोर्ट सामने आई है। मोगा में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की भी हुई।
अब सभी की नजर 18 सितंबर की किसान संगठनों की बैठक और पंजाब सरकार की प्रतिक्रिया पर है। आगे आंदोलन जारी रहता है या बातचीत के जरिए कोई रास्ता निकलता है, यह अगले चरण में स्पष्ट होगा।

