अयोध्या: राम नगरी अयोध्या स्थित राम मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे से जुड़े कथित गड़बड़ी के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की प्रारंभिक जांच के आधार पर आठ लोगों के खिलाफ FIR दर्ज होने के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में बड़ा प्रशासनिक बदलाव देखने को मिला है। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा ने अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है।
बताया जा रहा है कि राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान और चढ़ावे के प्रबंधन में कथित अनियमितताओं की शिकायतों के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की जांच के लिए SIT का गठन किया था। जांच के दौरान चढ़ावे के संग्रह, लेखा-जोखा, निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था में कई गंभीर सवाल सामने आए।
आठ लोगों पर FIR, ड्राइवर भी आरोपी
SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से अयोध्या में FIR दर्ज कराई गई। इस FIR में ट्रस्ट महासचिव चंपत राय के ड्राइवर टिन्नू यादव सहित कुल आठ लोगों को आरोपी बनाया गया है।
जानकारी के अनुसार, शिकायत ट्रस्ट सदस्य कृष्ण मोहन की ओर से दर्ज कराई गई, जिन्हें पूर्व ट्रस्टी कामेश्वर चौपाल के निधन के बाद सितंबर 2025 में ट्रस्ट का सदस्य बनाया गया था। शिकायत में चढ़ावे की राशि के प्रबंधन और उसके रिकॉर्ड को लेकर गंभीर अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है।

इस्तीफे से मचा राजनीतिक और धार्मिक हलकों में भूचाल
FIR दर्ज होने के एक दिन बाद ट्रस्ट महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। दिल्ली में राम मंदिर निर्माण समिति के प्रमुख नृपेंद्र मिश्र द्वारा दोनों के इस्तीफे की पुष्टि किए जाने की बात सामने आई है।
हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि इस्तीफा नैतिक जिम्मेदारी के आधार पर दिया गया है या जांच को निष्पक्ष बनाए रखने के उद्देश्य से।
निष्पक्ष जांच की मांग तेज
मामले के सामने आने के बाद विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक वर्गों की ओर से निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है। कई लोगों का कहना है कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक संबंधित पदाधिकारियों का पद पर बने रहना जांच की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर सकता है।
इसी संदर्भ में पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी के जैन हवाला प्रकरण का उदाहरण भी दिया जा रहा है। उस समय उन्होंने आरोप लगने के बाद नैतिक आधार पर इस्तीफा दिया था और अदालत से बेदाग साबित होने के बाद ही चुनाव लड़ा था। इसी तर्ज पर कुछ लोग चंपत राय के इस्तीफे को नैतिक जिम्मेदारी की दिशा में उठाया गया कदम बता रहे हैं।
SIT की जांच अभी जारी
सूत्रों के अनुसार, SIT अभी पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रही है। जांच का दायरा केवल आठ आरोपियों तक सीमित नहीं है। यदि जांच के दौरान नए तथ्य सामने आते हैं, तो अन्य लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।
जांच एजेंसियां दान पेटियों से प्राप्त नकदी, बैंक रिकॉर्ड, CCTV फुटेज, लेखा अभिलेख और संबंधित कर्मचारियों से पूछताछ के आधार पर पूरे मामले की तह तक पहुंचने का प्रयास कर रही हैं।

ट्रस्ट की साख पर असर
राम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। ऐसे में चढ़ावे से जुड़े किसी भी विवाद ने ट्रस्ट की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच ही श्रद्धालुओं का विश्वास बनाए रखने का सबसे प्रभावी तरीका होगा।
वहीं दूसरी ओर, ट्रस्ट से जुड़े कुछ लोगों का कहना है कि जांच पूरी होने से पहले किसी भी व्यक्ति को दोषी मानना उचित नहीं होगा। अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
निष्कर्ष
राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण अब केवल प्रशासनिक मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह देशभर में चर्चा का विषय बन चुका है। आठ लोगों पर FIR, दो वरिष्ठ पदाधिकारियों के इस्तीफे और SIT की सक्रिय जांच ने इस मामले को बेहद संवेदनशील बना दिया है। अब सभी की नजर जांच एजेंसियों की अंतिम रिपोर्ट और आगे होने वाली कानूनी कार्रवाई पर टिकी है।

