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Home - व्यापार - The Bonus Market Update: पश्चिम एशिया में जंग की आहट से बाजार में हड़कंप! सेंसेक्स 1048 अंक धड़ाम, निवेशकों के 5 लाख करोड़ स्वाहा?

The Bonus Market Update: पश्चिम एशिया में जंग की आहट से बाजार में हड़कंप! सेंसेक्स 1048 अंक धड़ाम, निवेशकों के 5 लाख करोड़ स्वाहा?

Rajat Kumar
Last updated: 2026/03/02 at 4:51 PM
Rajat Kumar
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6 Min Read
शेयर बाजार में गिरावट दर्शाता लाल ग्राफ, सेंसेक्स और निफ्टी में तेज गिरावट
वैश्विक अनिश्चितता और कच्चे तेल की कीमतों में संभावित उछाल के बीच भारतीय शेयर बाजार सोमवार को एक प्रतिशत से अधिक गिरकर बंद हुआ।
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वैश्विक अनिश्चितता: के बीच सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर उठी आशंकाओं ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। सप्ताह की शुरुआत ही लाल निशान के साथ हुई और कारोबार के अंत तक बाजार पर दबाव बना रहा।

Contents
प्री-ओपन में ही दिख गया था संकट का संकेतविशेषज्ञों की राय: अनिश्चित दुनिया में सहारे की तलाश1. कच्चे तेल की कीमतों में उछाल का खतराये भी पढ़ें: ईरान में सत्ता का बड़ा उलटफेर! खामेनेई के बाद अलीरेजा अराफी बने अंतरिम सुप्रीम लीडर, क्या बदल जाएगी पश्चिम एशिया की राजनीति?2. खाड़ी देशों से व्यापार पर असर3. 90 लाख भारतीयों की सुरक्षा और रेमिटेंस पर असरसेक्टरवार प्रदर्शन: किन शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट?विदेशी निवेशकों का रुखक्या यह करेक्शन है या बड़ी गिरावट की शुरुआत?निवेशकों के लिए रणनीतिये भी पढ़ें: ईरान में सत्ता का बड़ा उलटफेर! खामेनेई के बाद अलीरेजा अराफी बने अंतरिम सुप्रीम लीडर, क्या बदल जाएगी पश्चिम एशिया की राजनीति?आगे क्या?निष्कर्ष:

30 शेयरों वाला BSE Sensex 1048.34 अंक यानी 1.29 प्रतिशत गिरकर 80,238.85 पर बंद हुआ। वहीं 50 शेयरों वाला Nifty 50 312.95 अंक यानी 1.24 प्रतिशत फिसलकर 24,865.70 के स्तर पर आ गया। दिनभर उतार-चढ़ाव के बीच निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाए रखा।

प्री-ओपन में ही दिख गया था संकट का संकेत

कारोबार शुरू होने से पहले ही बाजार में भारी दबाव नजर आ गया था। प्री-ट्रेडिंग सत्र के दौरान सेंसेक्स 2,743.46 अंक तक टूटकर 78,543.73 पर आ गया था, जबकि निफ्टी 533.55 अंक गिरकर 24,645.10 तक पहुंच गया था। हालांकि दिन के दौरान कुछ रिकवरी देखने को मिली, लेकिन अंततः दोनों सूचकांक बड़े नुकसान के साथ बंद हुए।

विश्लेषकों का कहना है कि यह गिरावट केवल तकनीकी कारणों से नहीं, बल्कि वैश्विक जोखिमों की वजह से आई है। पश्चिम एशिया में ईरान-अमेरिका तनाव और होरमुज जलडमरूमध्य को लेकर अनिश्चितता ने निवेशकों को जोखिम से दूर रहने के लिए मजबूर किया।

विशेषज्ञों की राय: अनिश्चित दुनिया में सहारे की तलाश

मार्केट एक्सपर्ट अजय बग्गा ने मौजूदा परिस्थितियों पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर बाजार किसी ठोस सहारे की तलाश कर रहे हैं। उनके अनुसार, ईरान के विदेश मंत्री के इस बयान कि ईरान होरमुज जलडमरूमध्य को बंद नहीं करेगा और अमेरिका के साथ वार्ता फिर से शुरू करना चाहता है, से एशियाई बाजारों में शुरुआती भारी गिरावट के बाद थोड़ी राहत जरूर मिली। लेकिन अनिश्चितता अभी भी बनी हुई है।

अजय बग्गा के अनुसार, ईरान-अमेरिका तनाव का भारतीय बाजार पर तीन बड़े प्रभाव हो सकते हैं:

शेयर बाजार में गिरावट दर्शाता लाल ग्राफ, सेंसेक्स और निफ्टी में तेज गिरावट
वैश्विक अनिश्चितता और कच्चे तेल की कीमतों में संभावित उछाल के बीच भारतीय शेयर बाजार सोमवार को एक प्रतिशत से अधिक गिरकर बंद हुआ।

1. कच्चे तेल की कीमतों में उछाल का खतरा

होरमुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति का एक अहम मार्ग है। दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत कच्चा तेल इसी मार्ग से होकर गुजरता है। यदि यहां किसी तरह की बाधा उत्पन्न होती है तो तेल की कीमतों में तेज उछाल आ सकता है।

भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से:

  • महंगाई दर बढ़ सकती है

  • चालू खाता घाटा (CAD) पर दबाव बढ़ सकता है

  • रुपये पर दबाव आ सकता है

  • कंपनियों की लागत बढ़ सकती है

इसका सीधा असर शेयर बाजार पर पड़ेगा, खासकर ऑटो, एविएशन, पेंट और केमिकल सेक्टर पर।

ये भी पढ़ें: ईरान में सत्ता का बड़ा उलटफेर! खामेनेई के बाद अलीरेजा अराफी बने अंतरिम सुप्रीम लीडर, क्या बदल जाएगी पश्चिम एशिया की राजनीति?


2. खाड़ी देशों से व्यापार पर असर

भारत के लिए खाड़ी क्षेत्र एक बड़ा व्यापारिक साझेदार है। यदि शिपिंग रूट और सप्लाई चेन प्रभावित होती है, तो निर्यातकों को नुकसान झेलना पड़ सकता है। विशेष रूप से:

  • जेम्स एंड ज्वेलरी

  • टेक्सटाइल

  • फूड प्रोडक्ट्स

  • इंजीनियरिंग गुड्स

इन सेक्टरों की कंपनियों पर दबाव बढ़ सकता है। निवेशक फिलहाल इन सेक्टरों में सतर्क रुख अपना रहे हैं।


3. 90 लाख भारतीयों की सुरक्षा और रेमिटेंस पर असर

पश्चिम एशिया में करीब 90 लाख भारतीय काम करते हैं। यदि क्षेत्र में तनाव बढ़ता है, तो:

  • रोजगार पर असर पड़ सकता है

  • रेमिटेंस फ्लो घट सकता है

  • भारत की खपत आधारित अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है

रेमिटेंस भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में अहम योगदान देता है। इसमें गिरावट आने पर रुपये पर दबाव बढ़ सकता है।

शेयर बाजार में गिरावट दर्शाता लाल ग्राफ, सेंसेक्स और निफ्टी में तेज गिरावट
वैश्विक अनिश्चितता और कच्चे तेल की कीमतों में संभावित उछाल के बीच भारतीय शेयर बाजार सोमवार को एक प्रतिशत से अधिक गिरकर बंद हुआ।

सेक्टरवार प्रदर्शन: किन शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट?

सोमवार की गिरावट में बैंकिंग, आईटी और ऑटो सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित रहे। बड़े बैंकिंग शेयरों में बिकवाली देखी गई, जिससे वित्तीय सूचकांक नीचे आए। आईटी कंपनियों पर भी वैश्विक मंदी की आशंका का असर दिखा।

हालांकि, कुछ डिफेंसिव सेक्टर जैसे FMCG और फार्मा में सीमित गिरावट देखी गई, जिससे यह संकेत मिला कि निवेशक सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं।


विदेशी निवेशकों का रुख

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने हाल के सत्रों में सतर्क रुख अपनाया है। वैश्विक जोखिम बढ़ने की स्थिति में विदेशी निवेशक उभरते बाजारों से पैसा निकालकर सुरक्षित एसेट्स की ओर शिफ्ट करते हैं, जैसे अमेरिकी बॉन्ड या सोना।

यदि पश्चिम एशिया का तनाव लंबा खिंचता है, तो भारतीय बाजार से पूंजी का बहिर्वाह तेज हो सकता है।


क्या यह करेक्शन है या बड़ी गिरावट की शुरुआत?

विश्लेषकों का मानना है कि फिलहाल इसे एक भू-राजनीतिक करेक्शन के रूप में देखा जा सकता है। यदि स्थिति नियंत्रण में रहती है और तेल की कीमतें स्थिर रहती हैं, तो बाजार में रिकवरी संभव है।

तकनीकी विश्लेषण के अनुसार:

  • निफ्टी के लिए 24,600 एक अहम सपोर्ट लेवल है

  • इसके नीचे जाने पर 24,200 तक गिरावट संभव

  • ऊपर की ओर 25,200 एक मजबूत रेजिस्टेंस


निवेशकों के लिए रणनीति

  1. घबराकर बिकवाली न करें

  2. मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों में SIP जारी रखें

  3. पोर्टफोलियो में विविधता रखें

  4. तेल-आधारित कंपनियों से फिलहाल दूरी बनाए रखें

  5. डिफेंसिव सेक्टर में संतुलित निवेश करें

ये भी पढ़ें: ईरान में सत्ता का बड़ा उलटफेर! खामेनेई के बाद अलीरेजा अराफी बने अंतरिम सुप्रीम लीडर, क्या बदल जाएगी पश्चिम एशिया की राजनीति?


आगे क्या?

अब निवेशकों की नजरें तीन बातों पर टिकी हैं:

  • पश्चिम एशिया की स्थिति

  • कच्चे तेल की कीमतें

  • अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियां

यदि ईरान और अमेरिका के बीच वार्ता आगे बढ़ती है और तनाव कम होता है, तो बाजार में तेजी से रिकवरी संभव है। लेकिन यदि होरमुज जलडमरूमध्य को लेकर स्थिति बिगड़ती है, तो बाजार में और दबाव आ सकता है।

शेयर बाजार में गिरावट दर्शाता लाल ग्राफ, सेंसेक्स और निफ्टी में तेज गिरावट
वैश्विक अनिश्चितता और कच्चे तेल की कीमतों में संभावित उछाल के बीच भारतीय शेयर बाजार सोमवार को एक प्रतिशत से अधिक गिरकर बंद हुआ।

निष्कर्ष:

सोमवार का कारोबारी सत्र भारतीय बाजार के लिए चुनौतीपूर्ण रहा। सेंसेक्स 1048 अंक और निफ्टी 312 अंक की गिरावट के साथ बंद हुए। पश्चिम एशिया में तनाव और कच्चे तेल की अनिश्चितता ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। हालांकि विशेषज्ञ इसे अभी नियंत्रित जोखिम मान रहे हैं, लेकिन आने वाले दिनों में वैश्विक घटनाक्रम बाजार की दिशा तय करेंगे। निवेशकों को संयम और रणनीतिक दृष्टिकोण अपनाने की सलाह दी जा रही है।

TAGGED: कच्चा तेल कीमत, निफ्टी अपडेट, पश्चिम एशिया तनाव, बाजार विश्लेषण, भारतीय अर्थव्यवस्था, शेयर बाजार समाचार, सेंसेक्स गिरावट, होरमुज जलडमरूमध्य
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