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Home - तथ्य - सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश: अब कोर्ट की वीडियो रिकॉर्डिंग सोशल मीडिया पर डालने से पहले लेनी होगी अनुमति

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश: अब कोर्ट की वीडियो रिकॉर्डिंग सोशल मीडिया पर डालने से पहले लेनी होगी अनुमति

Rajat Kumar
Last updated: 2026/07/24 at 6:02 PM
Rajat Kumar
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3 Min Read
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नई दिल्ली: देश की सर्वोच्च अदालत ने न्यायिक कार्यवाही की रिकॉर्डिंग के उपयोग को लेकर एक महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अदालत की कार्यवाही की ऑडियो या वीडियो रिकॉर्डिंग को बिना पूर्व अनुमति सोशल मीडिया, वीडियो प्लेटफॉर्म या किसी अन्य डिजिटल माध्यम पर पोस्ट, रीपोस्ट या अपलोड नहीं किया जा सकेगा।

अदालत का यह निर्देश न्यायिक कार्यवाही की रिकॉर्डिंग के कथित दुरुपयोग और संदर्भ से हटाकर प्रसारित किए जाने की चिंताओं के बीच आया है। कोर्ट का कहना है कि न्यायिक प्रक्रिया की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है।

Contents
नई दिल्ली: देश की सर्वोच्च अदालत ने न्यायिक कार्यवाही की रिकॉर्डिंग के उपयोग को लेकर एक महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अदालत की कार्यवाही की ऑडियो या वीडियो रिकॉर्डिंग को बिना पूर्व अनुमति सोशल मीडिया, वीडियो प्लेटफॉर्म या किसी अन्य डिजिटल माध्यम पर पोस्ट, रीपोस्ट या अपलोड नहीं किया जा सकेगा।क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने?क्यों जरूरी पड़ा यह आदेश?याचिका में क्या उठाया गया मुद्दा?क्या लाइव स्ट्रीमिंग बंद होगी?इस फैसले का क्या होगा असर?आगे क्या होगा?निष्कर्ष

क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने?

मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने अपने अंतरिम आदेश में कहा कि न्यायिक कार्यवाही की रिकॉर्डिंग को सार्वजनिक मंचों पर साझा करने से पहले संबंधित सक्षम अधिकारी की पूर्व अनुमति आवश्यक होगी।

सुप्रीम कोर्ट के मामलों में यह अनुमति संबंधित महासचिव से और हाईकोर्ट के मामलों में संबंधित हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल से प्राप्त करनी होगी।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि बिना अनुमति रिकॉर्डिंग निकालना, उसमें बदलाव करना, उसे वायरल करना या किसी भी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर साझा करना प्रतिबंधित रहेगा।

क्यों जरूरी पड़ा यह आदेश?

हाल के वर्षों में अदालतों की लाइव स्ट्रीमिंग और डिजिटल रिकॉर्डिंग की सुविधा बढ़ी है। इससे न्यायिक प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनी है, लेकिन इसके साथ कुछ चुनौतियां भी सामने आई हैं।

कई मामलों में अदालत की कार्यवाही के छोटे-छोटे हिस्से संदर्भ से अलग करके सोशल मीडिया पर साझा किए गए, जिससे भ्रम की स्थिति पैदा हुई। अदालत का मानना है कि अधूरी या संपादित क्लिप न्यायिक प्रक्रिया की गलत व्याख्या कर सकती हैं।

याचिका में क्या उठाया गया मुद्दा?

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि न्यायिक कार्यवाही के वीडियो सोशल मीडिया पर बिना किसी नियंत्रण के साझा किए जा रहे हैं। इससे कई बार भ्रामक जानकारी फैलती है और अदालत की कार्यवाही का वास्तविक संदर्भ बदल जाता है।

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से भी इस विषय पर स्पष्ट नियम बनाने की आवश्यकता जताई गई।

क्या लाइव स्ट्रीमिंग बंद होगी?

अदालत के अंतरिम आदेश का उद्देश्य लाइव स्ट्रीमिंग व्यवस्था को समाप्त करना नहीं है। इसका मकसद केवल यह सुनिश्चित करना है कि रिकॉर्डिंग का उपयोग निर्धारित नियमों और उचित प्रक्रिया के तहत ही किया जाए।

इसका अर्थ यह नहीं है कि न्यायिक पारदर्शिता कम होगी, बल्कि रिकॉर्ड किए गए कंटेंट के अनधिकृत और भ्रामक उपयोग पर नियंत्रण रहेगा।

इस फैसले का क्या होगा असर?

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह आदेश न्यायपालिका की गरिमा बनाए रखने और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जिम्मेदार उपयोग को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

इसके बाद मीडिया संस्थानों, कंटेंट क्रिएटर्स और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं को अदालत की रिकॉर्डिंग साझा करने से पहले निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा।

हालांकि अंतिम नियम और विस्तृत दिशा-निर्देश इस मामले की आगे की सुनवाई और न्यायालय के अंतिम निर्णय के बाद स्पष्ट हो सकते हैं।

आगे क्या होगा?

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार और अन्य संबंधित पक्षों से जवाब भी मांगा है। मामले की अगली सुनवाई में अदालत इस विषय पर विस्तृत दिशा-निर्देश या स्थायी व्यवस्था पर विचार कर सकती है।

कानूनी समुदाय की नजर अब इस बात पर रहेगी कि डिजिटल युग में न्यायिक पारदर्शिता और रिकॉर्डिंग के उपयोग के बीच संतुलन कैसे बनाया जाता है।


निष्कर्ष

सुप्रीम कोर्ट का यह अंतरिम आदेश अदालत की कार्यवाही के डिजिटल उपयोग से जुड़े नियमों को स्पष्ट करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। अब न्यायिक कार्यवाही की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग को सोशल मीडिया या अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर साझा करने से पहले सक्षम अधिकारी की अनुमति लेना आवश्यक होगा। आने वाले समय में इस विषय पर और विस्तृत दिशा-निर्देश सामने आ सकते हैं, जिनका उद्देश्य न्यायिक प्रक्रिया की गरिमा और पारदर्शिता दोनों को बनाए रखना होगा।

TAGGED: Breaking News, Court Live Streaming, Court Proceedings, India News, Judiciary, Law News, Legal News, Social Media Rules, Supreme Court
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