Vande Mataram New Law 2026: राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ को लेकर केंद्र सरकार की ओर से लाया गया बड़ा कानूनी बदलाव अब प्रभावी हो गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने Prevention of Insults to National Honour (Amendment) Bill, 2026 को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही संशोधन कानून का हिस्सा बन गया है और ‘वंदे मातरम्’ को राष्ट्रीय सम्मान से जुड़े कानून के तहत स्पष्ट वैधानिक संरक्षण मिल गया है।
यह बदलाव ऐसे समय हुआ है जब देश 15 अगस्त को अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाने की तैयारी कर रहा है। इस साल स्वतंत्रता दिवस समारोह में लाल किले की प्राचीर से ‘वंदे मातरम्’ का गायन भी पहली बार कार्यक्रम का हिस्सा होगा।
आखिर नए कानून में क्या बदला?
1971 के Prevention of Insults to National Honour Act में राष्ट्रीय ध्वज, संविधान और राष्ट्रीय गान से जुड़े कुछ अपमान और व्यवधान को दंडनीय बनाया गया था। राष्ट्रीय गान के मामले में किसी व्यक्ति द्वारा जानबूझकर उसके गायन को रोकना या ऐसा व्यवधान पैदा करना जिससे कोई सभा राष्ट्रीय गान न गा सके, कानून के दायरे में आता था।
2026 के संशोधन के बाद इसी तरह का कानूनी संरक्षण राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के लिए भी लागू किया गया है। यानी किसी सभा में ‘वंदे मातरम्’ के गायन को जानबूझकर रोकना या उसके गायन में बाधा डालना अब दंडनीय प्रावधानों के दायरे में आएगा।
क्या ‘वंदे मातरम्’ का सम्मान न करने पर सीधे जेल होगी?
यहां कानून की भाषा को समझना बेहद जरूरी है। संशोधन का मुख्य फोकस जानबूझकर गायन रोकने या गायन में सभा को बाधित करने जैसे कृत्यों पर है। इसलिए इसे इस तरह समझना सही नहीं होगा कि ‘वंदे मातरम्’ से जुड़ी हर असहमति या हर व्यक्तिगत व्यवहार अपने आप अपराध बन गया है।
मौजूदा कानूनी प्रावधान के तहत संबंधित अपराधों के लिए तीन साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों का प्रावधान है। दूसरी और उसके बाद की दोषसिद्धि के लिए कम से कम एक साल की सजा का प्रावधान भी कानून में मौजूद है।

संसद के दोनों सदनों से पारित हुआ था बिल
इस संशोधन विधेयक को जुलाई 2026 में संसद में लाया गया था। राज्यसभा ने इसे 29 जुलाई को पारित किया। इसके बाद विधेयक को लोकसभा की मंजूरी मिली और राष्ट्रपति के पास भेजा गया।
राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद अब यह केवल प्रस्ताव या विधेयक नहीं रहा, बल्कि कानून का हिस्सा बन गया है। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय गीत को उस कानूनी ढांचे में शामिल करना है, जिसमें राष्ट्रीय गान को पहले से संरक्षण प्राप्त था।
‘वंदे मातरम्’ को क्यों दिया गया कानूनी संरक्षण?
‘वंदे मातरम्’ का भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में विशेष महत्व रहा है। बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित यह गीत स्वतंत्रता संग्राम के दौरान राष्ट्रीय चेतना और आंदोलन की भावना से जुड़ा रहा।
सरकार की ओर से विधेयक को आगे बढ़ाते समय इस ऐतिहासिक भूमिका का भी उल्लेख किया गया। संशोधन का उद्देश्य राष्ट्रीय गीत को कानूनी तौर पर अधिक स्पष्ट संरक्षण देना बताया गया है।
15 अगस्त पर लाल किले से पहली बार गूंजेगा ‘वंदे मातरम्’
इस कानून के साथ इस साल स्वतंत्रता दिवस समारोह में ‘वंदे मातरम्’ को लेकर भी खास बदलाव देखने को मिलेगा। रिपोर्टों के अनुसार, 15 अगस्त 2026 को लाल किले की प्राचीर से पहली बार राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ का गायन होगा।
इससे स्वतंत्रता दिवस समारोह में राष्ट्रीय गीत की भूमिका और प्रमुख हो गई है। आधिकारिक कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम्’ और राष्ट्रीय गान को लेकर प्रोटोकॉल भी जारी किए गए हैं।
राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रीय गान में क्या अंतर है?
भारत का राष्ट्रीय गान ‘जन गण मन’ है, जबकि ‘वंदे मातरम्’ राष्ट्रीय गीत है। दोनों का देश के इतिहास और राष्ट्रीय जीवन में महत्वपूर्ण स्थान है, लेकिन उनकी संवैधानिक और कानूनी स्थिति अब तक पूरी तरह समान नहीं थी।
2026 का संशोधन इसी कानूनी अंतर को कम करने की दिशा में बड़ा कदम है। संसद में पेश किए गए विधेयक का उद्देश्य ‘वंदे मातरम्’ को राष्ट्रीय गान के समान वैधानिक संरक्षण देना था।
स्कूलों और आधिकारिक कार्यक्रमों में क्या होगा?
केंद्र सरकार की ओर से ‘वंदे मातरम्’ के गायन को लेकर प्रोटोकॉल भी जारी किए गए हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, जब राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रीय गान दोनों प्रस्तुत किए जाएं तो ‘वंदे मातरम्’ को पहले प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है।
कुछ आधिकारिक कार्यक्रमों में इसके पूर्ण रूप से गायन को लेकर भी दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। ऐसे निर्देशों का उद्देश्य राष्ट्रीय गीत के गायन के लिए एक समान प्रोटोकॉल तैयार करना है।
निष्कर्ष
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी के बाद ‘वंदे मातरम्’ को लेकर 2026 का कानूनी बदलाव अब प्रभावी हो गया है। संशोधन के तहत राष्ट्रीय गीत के गायन को जानबूझकर रोकना या उसके गायन में सभा को बाधित करना दंडनीय दायरे में आता है। ऐसे अपराधों पर मौजूदा कानून के तहत तीन साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।
वहीं, 15 अगस्त 2026 को लाल किले से पहली बार ‘वंदे मातरम्’ का गायन इस बदलाव को और खास बना रहा है। अब राष्ट्रीय गीत को लेकर कानूनी संरक्षण और आधिकारिक प्रोटोकॉल—दोनों में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।

