कराकस, वेनेजुएला: दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला में बुधवार शाम आए दो शक्तिशाली भूकंपों ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया। महज एक मिनट के अंतराल में आए 7.2 और 7.5 तीव्रता के भूकंपों ने राजधानी कराकस सहित कई शहरों में व्यापक तबाही मचाई। अब तक 32 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 700 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। राहत एजेंसियों का कहना है कि मृतकों की संख्या बढ़ सकती है क्योंकि कई लोग अभी भी मलबे में दबे होने की आशंका है।
सबसे चिंताजनक बात यह रही कि भूकंप ऐसे समय आया जब पूरे देश में राष्ट्रीय अवकाश था। 1821 में स्पेन के खिलाफ स्वतंत्रता संग्राम में ऐतिहासिक जीत की वर्षगांठ के कारण स्कूल, कॉलेज, सरकारी कार्यालय और अधिकांश संस्थान बंद थे। इस वजह से लाखों लोग अपने घरों में मौजूद थे, जिससे जान-माल का नुकसान बढ़ गया।
एक मिनट में दो बड़े झटकों ने मचाई तबाही
अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के अनुसार पहला भूकंप 7.2 तीव्रता का था, जबकि उसके एक मिनट बाद 7.5 तीव्रता का दूसरा झटका आया। दोनों भूकंपों का केंद्र राजधानी कराकस से लगभग 290 किलोमीटर पश्चिम में स्थित क्षेत्र में दर्ज किया गया।
भूकंप के झटके इतने शक्तिशाली थे कि कई बहुमंजिला इमारतें देखते ही देखते ढह गईं। कई भवनों में बड़ी दरारें आ गईं और कुछ संरचनाएं खतरनाक रूप से झुक गईं। राजधानी कराकस के अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट की छत का हिस्सा भी गिर गया, जिससे वहां अफरा-तफरी मच गई।
126 साल का सबसे बड़ा भूकंप
विशेषज्ञों के अनुसार यह वेनेजुएला में पिछले 126 वर्षों का सबसे शक्तिशाली भूकंप माना जा रहा है। इससे पहले वर्ष 1900 में 7.7 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था। इस बार आए झटकों ने देश की आपदा प्रबंधन क्षमता को गंभीर चुनौती दी है।
कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज ने तत्काल राष्ट्रीय आपातकाल घोषित कर दिया। उन्होंने सभी सरकारी एजेंसियों, अस्पतालों और राहत संगठनों को युद्धस्तर पर काम करने के निर्देश दिए हैं।

ला गुआइरा सबसे ज्यादा प्रभावित
भूकंप का सबसे अधिक असर उत्तरी तटीय राज्य ला गुआइरा में देखा गया है। यहां कई रिहायशी और व्यावसायिक इमारतें पूरी तरह ढह गईं। प्रशासन ने पूरे क्षेत्र को “डिजास्टर जोन” घोषित कर दिया है।
राहत और बचाव दल लगातार मलबे में फंसे लोगों को निकालने में जुटे हैं। इसी बीच मलबे में दबे तीन बच्चों को जीवित बचा लिया गया, जिससे राहत कर्मियों का उत्साह बढ़ा है।
पूरी रात सड़कों पर गुजारी
भूकंप के बाद हजारों लोग अपने घरों से बाहर निकल आए। लगातार आ रहे आफ्टरशॉक के डर से लोगों ने पूरी रात सड़कों, पार्कों और खुले मैदानों में बिताई।
कराकस की निवासी लुइसा मार्टिनेज ने कहा,
“ऐसा लग रहा था कि पूरा घर हमारे ऊपर गिर जाएगा। जिंदगी में पहली बार लगा कि शायद अब हम बच नहीं पाएंगे।”
कई परिवार बच्चों और जरूरी सामान के साथ खुले आसमान के नीचे रातभर डटे रहे। लोगों को डर है कि क्षतिग्रस्त इमारतें कभी भी गिर सकती हैं।
बिजली, पानी और परिवहन व्यवस्था प्रभावित
भूकंप के बाद राजधानी के कई इलाकों में बिजली आपूर्ति ठप हो गई। कई पानी की पाइपलाइनें टूट गईं, जिससे सड़कों पर जलभराव हो गया। एहतियात के तौर पर मेट्रो और ट्रेन सेवाएं भी रोक दी गईं।
सरकार ने गैस सप्लाई अस्थायी रूप से बंद कर दी है ताकि गैस रिसाव या विस्फोट जैसी घटनाओं को रोका जा सके।
अंतरराष्ट्रीय मदद के लिए आगे आए देश
इस बड़ी आपदा के बाद दक्षिण अमेरिका के कई देशों ने वेनेजुएला की मदद का आश्वासन दिया है। ब्राजील, अर्जेंटीना, कोलंबिया, पेरू, मेक्सिको, बोलीविया, कोस्टा रिका और एल सल्वाडोर ने राहत सामग्री और बचाव दल भेजने की पेशकश की है।
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी दुख व्यक्त करते हुए कहा कि भारत इस कठिन समय में वेनेजुएला के साथ खड़ा है और जरूरत पड़ने पर हरसंभव सहायता प्रदान करेगा।
क्यों आया इतना विनाशकारी भूकंप?
विशेषज्ञों के अनुसार वेनेजुएला कैरीबियन और दक्षिण अमेरिकी टेक्टोनिक प्लेटों के संगम पर स्थित है। इन प्लेटों के बीच अचानक हुई तीव्र हलचल के कारण इतना शक्तिशाली भूकंप आया। वैज्ञानिकों ने आगे भी तेज आफ्टरशॉक आने की संभावना जताई है।
निष्कर्ष:
वेनेजुएला में आया 7.5 तीव्रता का भूकंप हाल के वर्षों की सबसे बड़ी प्राकृतिक आपदाओं में से एक माना जा रहा है। राष्ट्रीय अवकाश के कारण अधिकतर लोग घरों में मौजूद थे, जिससे नुकसान बढ़ गया। 32 लोगों की मौत और 700 से अधिक लोगों के घायल होने की पुष्टि हो चुकी है, जबकि राहत और बचाव अभियान अभी भी जारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में वास्तविक नुकसान का आंकड़ा और बढ़ सकता है।

