कोलकाता। पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना से गिरफ्तार संदिग्ध ISI एजेंट राना रऊफ खालिद उर्फ सनी उर्फ वहाब आलम को लेकर जांच एजेंसियों की पूछताछ में कई अहम जानकारियां सामने आने का दावा किया जा रहा है। शुरुआती जांच में उसके कथित अंतरराष्ट्रीय संपर्कों की कड़ियां नेपाल और बांग्लादेश तक जुड़ने की बात सामने आई है।
जांच का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि कथित तौर पर सबूत मिटाने के लिए मोबाइल फोन तोड़ दिया गया था, लेकिन दो सिम कार्ड नष्ट नहीं किए गए। अब यही सिम कार्ड जांच एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण सुराग बन गए हैं।
नोटबुक में मिले छह नामों ने बढ़ाई जांच की दिशा
पूछताछ और तलाशी के दौरान राना की नोटबुक से नेपाल के पांच और बांग्लादेश के एक व्यक्ति का नाम मिलने की बात सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक नेपाल से जुड़े नामों में काशिफ, हनीफ चौधरी, सोहेल, जेडी और हारुन सफदार शामिल हैं, जबकि बांग्लादेश से पावेल नाम सामने आया है।
जांच एजेंसियां इन नामों की वास्तविक पहचान, राना से उनके संपर्क और कथित नेटवर्क में उनकी भूमिका की जांच कर रही हैं। अभी यह भी स्पष्ट किया जाना बाकी है कि नोटबुक में दर्ज सभी लोग वास्तव में किसी गैरकानूनी गतिविधि से जुड़े थे या नहीं।
संवेदनशील ठिकानों की तस्वीरें भेजने का आरोप
जांचकर्ताओं के अनुसार राना पर आरोप है कि वह संवेदनशील सैन्य और सुरक्षा प्रतिष्ठानों से जुड़ी जानकारी जुटाता था। इसमें बंगाल के अलग-अलग इलाकों में सेना की छावनियों, सीमा सुरक्षा बल यानी बीएसएफ की चौकियों, रेलवे स्टेशनों और रेल लाइनों की तस्वीरें, वीडियो तथा नक्शे कथित तौर पर साझा किए जाने की बात कही गई है।
हालांकि, इन आरोपों की पूरी पुष्टि जांच पूरी होने और कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ने के बाद ही हो सकेगी। एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि कथित तौर पर जुटाई गई जानकारी कहां भेजी जाती थी और इसके पीछे कौन-कौन लोग सक्रिय थे।
कोलकाता के दो लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में
इस मामले में कोलकाता के तपसिया इलाके से गिरफ्तार मोहम्मद इजाज का नाम भी सामने आया है। इसके अलावा पूर्वी कोलकाता के दो अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इन लोगों के बीच किस तरह का संपर्क था और क्या वे किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा थे। इस मामले में डिजिटल साक्ष्यों के साथ-साथ संदिग्धों के संपर्कों और वित्तीय लेनदेन की भी जांच महत्वपूर्ण हो सकती है।

मोबाइल तोड़ा, लेकिन सिम कार्ड रह गए
पूछताछ में सामने आए दावों के मुताबिक राना ने नेपाल में अपने संपर्कों से जुड़े साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से अपना मोबाइल फोन तोड़ दिया था। हालांकि, उसके पास मौजूद दो सिम कार्ड नष्ट नहीं हुए।
एसटीएफ ने दोनों सिम कार्ड बरामद कर लिए हैं। अब जांचकर्ताओं को उम्मीद है कि इन सिम कार्ड से जुड़े तकनीकी रिकॉर्ड, संपर्कों और अन्य उपलब्ध डिजिटल सुरागों के जरिए कथित नेटवर्क की कड़ियां सामने आ सकती हैं।
यही वजह है कि इस मामले में सिम कार्ड की बरामदगी को जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
काठमांडू के बाद बांग्लादेश जाने की थी कथित योजना
पूछताछ के दौरान राना ने कथित तौर पर बताया कि वह काठमांडू में अपने संपर्कों से मिलने के बाद उत्तर 24 परगना के बनगांव के रास्ते बांग्लादेश जाने वाला था। रिपोर्ट के अनुसार बांग्लादेश के यशोर में पावेल नाम के व्यक्ति से उसकी मुलाकात होनी थी।
कथित योजना के मुताबिक वहां उसे नया मोबाइल फोन दिया जाना था, जिसके बाद नेपाल और पाकिस्तान में मौजूद संपर्कों से दोबारा संपर्क स्थापित करने की बात सामने आई है।
जांच एजेंसियां अब इस दावे की भी पड़ताल कर रही हैं कि राना के बांग्लादेश जाने की वास्तविक योजना थी या पूछताछ को प्रभावित करने के लिए उसने यह जानकारी दी।
पैसों के लेनदेन की भी हो रही जांच
जांच में यह दावा भी सामने आया है कि राना कथित जासूसी गतिविधियों के बदले कुछ सूचनाएं साझा कर पैसे जुटाता था। हालांकि गिरफ्तारी के समय उसके पास से केवल 350 रुपये बरामद होने की बात कही गई है।
अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर सकती हैं कि कथित तौर पर उसे पैसे किस माध्यम से मिलते थे, किन लोगों से आर्थिक संपर्क था और क्या किसी डिजिटल भुगतान या अन्य वित्तीय चैनल का इस्तेमाल किया गया।
पहचान को लेकर भी सामने आया विवाद
उत्तर 24 परगना के हाबड़ा इलाके से गिरफ्तारी के बाद राना ने कथित तौर पर खुद को तपसिया निवासी वहाब आलम साबित करने की कोशिश की थी। पुलिस के अनुसार लगातार पूछताछ के बाद उसकी पहचान और नागरिकता को लेकर अलग जानकारी सामने आई।
उसके नाम, पहचान, दस्तावेजों और भारत में रहने की स्थिति की जांच भी मामले का अहम हिस्सा बन गई है। एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि वह भारत में कब आया और यहां किस पहचान के साथ रह रहा था।
स्लीपर सेल तैयार करने के आरोप की भी जांच
जांच एजेंसियों के अनुसार राना को पश्चिम बंगाल में कथित तौर पर एक स्लीपर सेल तैयार करने के लिए लगाया गया था। यदि यह आरोप जांच में पुष्ट होता है, तो मामला केवल एक संदिग्ध व्यक्ति की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि एक बड़े नेटवर्क की जांच का रूप ले सकता है।
फिलहाल एजेंसियों का फोकस उसके संपर्कों, बरामद सिम कार्ड, नोटबुक में मिले नामों, कथित सीमा-पार कनेक्शन और वित्तीय लेनदेन की कड़ियों को जोड़ने पर है।
इस मामले में आगे होने वाली गिरफ्तारियां और पूछताछ यह तय करेगी कि राना का कथित नेटवर्क कितना बड़ा था और क्या इसके तार भारत के अन्य हिस्सों तक भी जुड़े हुए हैं।
निष्कर्ष
पश्चिम बंगाल में संदिग्ध ISI एजेंट राना रऊफ खालिद की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियों के सामने कई सवाल खड़े हैं। नेपाल और बांग्लादेश से कथित संपर्क, नोटबुक में मिले नाम, संवेदनशील स्थानों की जानकारी साझा करने के आरोप और बरामद दो सिम कार्ड जांच के प्रमुख बिंदु बने हुए हैं।
सबसे अहम सुराग फिलहाल वे सिम कार्ड बताए जा रहे हैं, जिन्हें कथित तौर पर मोबाइल फोन नष्ट करने के बावजूद बचा लिया गया। हालांकि, सामने आए सभी आरोपों और दावों की अंतिम पुष्टि जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी। जांच आगे बढ़ने के साथ इस कथित नेटवर्क से जुड़े और नाम सामने आने की संभावना बनी हुई है।

