नई दिल्ली: घर में दाल बनाना भारतीय रसोई की रोजमर्रा की प्रक्रिया का हिस्सा है। लेकिन दाल को उबालते समय कई लोगों के मन में एक सवाल जरूर आता है। जैसे ही बर्तन में दाल उबलती है, उसके ऊपर सफेद या हल्के पीले रंग का झाग दिखाई देने लगता है। इसे देखकर कुछ लोग तुरंत समझ लेते हैं कि दाल खराब हो गई है या इसमें कुछ गड़बड़ है।
अगर आपके साथ भी ऐसा होता है तो हर बार घबराने की जरूरत नहीं है। दाल में उबाल के दौरान झाग आना अपने आप में दाल खराब होने का प्रमाण नहीं है। कई सामान्य कारणों से दाल की सतह पर झाग बन सकता है। हालांकि, दाल इस्तेमाल करने से पहले उसकी गंध, रंग और स्थिति को देखना भी जरूरी है।
दाल में आखिर झाग बनता क्यों है?
जब दाल को पानी में उबालना शुरू किया जाता है तो उसमें मौजूद कुछ प्राकृतिक घटक पानी के साथ मिलकर बुलबुले बनाने लगते हैं। उबाल बढ़ने पर ये छोटे-छोटे बुलबुले ऊपर की सतह पर जमा होकर झाग जैसा दिखाई दे सकते हैं।
दाल की किस्म, उसकी सफाई, उसमें मौजूद स्टार्च और पकाने के तरीके के आधार पर झाग की मात्रा अलग-अलग हो सकती है। इसलिए किसी दाल में ज्यादा झाग दिखाई देने का मतलब यह नहीं है कि वह खराब है।
यानी सिर्फ बर्तन के ऊपर जमा सफेद झाग देखकर दाल को फेंक देना जरूरी नहीं है।

दाल को पकाने से पहले अच्छी तरह धोना क्यों जरूरी?
दाल को पकाने से पहले उसे साफ पानी से अच्छी तरह धोना एक अच्छी आदत है। दाल में बारीक धूल, छोटे कण और उसकी सतह से निकलने वाला कुछ स्टार्च मौजूद हो सकता है। पानी में धोने के बाद इनका एक हिस्सा निकल जाता है।
अगर दाल को दो या तीन बार पानी बदलकर धोकर पकाया जाए तो पकाते समय बनने वाला झाग कुछ कम दिखाई दे सकता है। हालांकि, झाग पूरी तरह खत्म हो जाए, यह जरूरी नहीं है।
इसलिए दाल धोने का मुख्य उद्देश्य उसे साफ करना है, न कि केवल झाग रोकना।
क्या दाल के ऊपर आया झाग निकालना जरूरी है?
अगर दाल उबलते समय ऊपर झाग जमा हो रहा है तो उसे चम्मच से हटाया जा सकता है। कई लोग स्वाद या दाल की दिखावट के कारण ऐसा करना पसंद करते हैं।
लेकिन अगर दाल सामान्य है और उसमें खराब होने के कोई दूसरे संकेत नहीं हैं, तो केवल झाग की वजह से उसे निकालना अनिवार्य नहीं है। खाना पकने के साथ झाग अक्सर कम हो जाता है और दाल सामान्य दिखाई देने लगती है।
इसलिए झाग दिखना और दाल खराब होना दो अलग-अलग बातें हैं।
इन संकेतों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें
हालांकि, दाल में झाग आने को सामान्य मानकर हर स्थिति में दाल खाना सही नहीं होगा। अगर दाल पकाने से पहले ही उसमें कोई असामान्य बदलाव नजर आ रहा है तो सावधानी जरूरी है।
अगर दाल से खट्टी, सड़ी हुई या बहुत अजीब गंध आ रही है, उसका रंग असामान्य तरीके से बदल गया है, उसमें नमी के कारण फफूंद दिखाई दे रही है या दाल सामान्य से चिपचिपी अथवा खराब नजर आ रही है, तो उसे इस्तेमाल करने से बचना चाहिए।
ऐसी स्थिति में सिर्फ ऊपर का झाग निकालकर दाल को पकाना सुरक्षित विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।
पुरानी या गलत तरीके से रखी दाल में भी बरतें सावधानी
दाल को लंबे समय तक नमी वाली जगह पर रखने से उसकी गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। इसलिए दाल को हमेशा सूखी और साफ जगह पर, उचित तरीके से स्टोर करना चाहिए।
पकाने से पहले दाल को एक बार ध्यान से देख लें। उसमें कीड़े, फफूंद, असामान्य रंग या गंध जैसी समस्या दिखाई दे तो उसका इस्तेमाल न करें।
अगली बार झाग देखकर न हों परेशान
अब अगली बार जब दाल उबलते समय ऊपर सफेद झाग दिखाई दे तो तुरंत यह निष्कर्ष न निकालें कि दाल खराब है। अगर दाल सामान्य दिख रही है, उसमें कोई अजीब गंध नहीं है और उसमें फफूंद या अन्य खराबी के संकेत नहीं हैं, तो उबाल के दौरान बनने वाला झाग सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है।
दाल को अच्छी तरह धोकर पकाएं और जरूरत लगे तो ऊपर का झाग चम्मच से हटा दें। लेकिन असली सावधानी झाग को लेकर नहीं, बल्कि दाल की गंध, रंग, नमी और कुल स्थिति को देखकर बरतनी चाहिए।

