नई दिल्ली। दिमाग में गांठ या ब्रेन ट्यूमर का नाम सामने आते ही सबसे बड़ा सवाल अक्सर यही होता है कि क्या मरीज को ऑपरेशन कराना ही पड़ेगा? आधुनिक रेडियोसर्जरी तकनीकों ने कुछ मरीजों के लिए इस तस्वीर को जरूर बदला है। CyberKnife ऐसी तकनीक है, जिसमें बिना पारंपरिक चीरा लगाए लक्षित हिस्से तक सटीक रेडिएशन पहुंचाया जाता है। हालांकि, यह हर ब्रेन ट्यूमर या हर मरीज के लिए सर्जरी का विकल्प नहीं है। मरीज की जांच, ट्यूमर के प्रकार, आकार और स्थान के आधार पर विशेषज्ञ इसका इस्तेमाल करने का निर्णय लेते हैं।
CyberKnife से बिना चीर-फाड़ कैसे होता है इलाज?
CyberKnife एक रोबोटिक रेडियोसर्जरी सिस्टम है। इसमें कई दिशाओं से रेडिएशन बीम को लक्षित हिस्से पर केंद्रित किया जाता है। Mayo Clinic के अनुसार, stereotactic radiosurgery में अलग-अलग दिशाओं से आने वाली रेडिएशन बीम लक्ष्य पर मिलती हैं, जिससे वहां अपेक्षाकृत अधिक रेडिएशन पहुंचाया जा सकता है, जबकि आसपास के ऊतकों पर प्रभाव को सीमित रखने का प्रयास किया जाता है।
Artemis Hospitals के अनुसार CyberKnife उपचार से पहले CT, MRI जैसी इमेजिंग के आधार पर लक्षित क्षेत्र का विस्तृत मानचित्र तैयार किया जाता है। उपचार फ्रेमलेस तरीके से किया जा सकता है और जरूरत के अनुसार एक या कई सत्रों में रेडियोसर्जरी दी जा सकती है।
यानी यहां “सर्जरी” शब्द का मतलब पारंपरिक तरीके से शरीर को काटना नहीं है। यह मुख्य रूप से अत्यधिक लक्षित रेडिएशन आधारित उपचार है।
संवेदनशील जगह पर मौजूद ट्यूमर में क्यों महत्वपूर्ण?
ब्रेन में कई ऐसे हिस्से होते हैं जहां सामान्य सर्जरी के दौरान महत्वपूर्ण नसों या स्वस्थ मस्तिष्क ऊतकों को नुकसान का जोखिम हो सकता है। ऐसे मामलों में, यदि मरीज की स्थिति CyberKnife के लिए उपयुक्त हो, तो रेडियोसर्जरी पर विचार किया जा सकता है।
Artemis के अनुसार छोटे और सीमित आकार वाले कुछ benign brain tumors, जैसे meningioma, pituitary adenoma और schwannoma, CyberKnife के संभावित उपयोगों में शामिल हैं। हालांकि, यह निर्णय केवल ट्यूमर के नाम से नहीं होता; उसका आकार, स्थान और आसपास की संरचनाओं पर प्रभाव भी महत्वपूर्ण होता है।

डॉ. आदित्य गुप्ता ने बताई तकनीक की भूमिका
एम्स के पूर्व एसोसिएट प्रोफेसर और गुरुग्राम स्थित Artemis Hospitals में Neurosurgery एवं CNS Radiosurgery से जुड़े विशेषज्ञ डॉ. आदित्य गुप्ता CyberKnife Centre के Co-Chief हैं। अस्पताल की प्रोफाइल के अनुसार, उन्हें ब्रेन ट्यूमर सर्जरी, CyberKnife, Gamma Knife और अन्य रेडियोसर्जरी तकनीकों का लंबा अनुभव है। प्रोफाइल में उनके 10,000 से अधिक ब्रेन ट्यूमर ऑपरेशन और 6,000 से अधिक रेडियोसर्जरी प्रक्रियाओं का अनुभव दर्ज है।
आपके दिए विवरण के अनुसार, डॉ. गुप्ता ने बताया कि उन्होंने AIIMS में रहते हुए Gamma Knife से 3,000 से अधिक मरीजों का उपचार किया था और वर्तमान में CyberKnife के जरिए भी बड़ी संख्या में मरीजों का उपचार कर चुके हैं।
मिर्गी में भी कुछ मरीजों के लिए विकल्प
CyberKnife की चर्चा केवल ब्रेन ट्यूमर तक सीमित नहीं है। दवाओं से नियंत्रित न होने वाली मिर्गी के कुछ चुनिंदा मामलों में रेडियोसर्जरी उपचार के विकल्पों का हिस्सा हो सकती है। लेकिन यहां मरीज का चयन बेहद महत्वपूर्ण है।
सबसे पहले यह पता लगाना जरूरी होता है कि मिर्गी के दौरे मस्तिष्क के किस हिस्से से शुरू हो रहे हैं। इसके लिए मरीज की मेडिकल हिस्ट्री के साथ न्यूरोलॉजिकल जांच और आवश्यक परीक्षण किए जाते हैं। इसके बाद विशेषज्ञ यह तय करते हैं कि दवा, सर्जरी, रेडियोसर्जरी या कोई अन्य उपचार किस स्थिति में उचित रहेगा।
Artemis की विशेषज्ञ प्रोफाइल में drug-resistant epilepsy और epilepsy surgery दोनों को संबंधित विशेषज्ञता में शामिल किया गया है।
इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि CyberKnife से हर मिर्गी मरीज के दौरे बंद हो जाएंगे। कुछ उपयुक्त मरीजों में उपचार के बाद दौरे कम या नियंत्रित होने की संभावना हो सकती है, लेकिन परिणाम व्यक्ति और बीमारी की स्थिति पर निर्भर करते हैं।
क्या हर ब्रेन ट्यूमर में CyberKnife किया जा सकता है?
नहीं। यही इस तकनीक को समझने का सबसे जरूरी हिस्सा है।
ब्रेन ट्यूमर का आकार बहुत बड़ा हो, उससे मस्तिष्क पर दबाव पड़ रहा हो या तत्काल ट्यूमर निकालने की आवश्यकता हो, तो पारंपरिक सर्जरी या अन्य उपचार जरूरी हो सकते हैं। दूसरी ओर, कुछ छोटे या गहरे स्थान पर मौजूद ट्यूमर में stereotactic radiosurgery उपयोगी विकल्प हो सकती है। Artemis भी बताता है कि गैर-सर्जिकल उपचार का चयन विशेष रूप से उन परिस्थितियों में किया जा सकता है जहां ट्यूमर संवेदनशील या गहरे हिस्से में हो और सर्जरी अधिक जोखिम वाली हो।
इसलिए CyberKnife को “ऑपरेशन खत्म करने वाली तकनीक” के बजाय कुछ मरीजों के लिए उपलब्ध एक वैकल्पिक उपचार पद्धति के रूप में समझना अधिक सही है।
इलाज की प्रक्रिया और समय कितना हो सकता है?
CyberKnife उपचार की अवधि मरीज की स्थिति और उपचार योजना पर निर्भर करती है। Artemis के अनुसार एक सत्र लगभग 20 से 50 मिनट तक चल सकता है और कुछ मामलों में उपचार एक से अधिक सत्रों में दिया जाता है।
किसी मरीज को कितने सत्रों की जरूरत होगी, यह ट्यूमर के आकार, स्थान, बीमारी के प्रकार और निर्धारित रेडिएशन योजना पर निर्भर करता है।
खर्च ज्यादा, स्वदेशी तकनीक से भविष्य में राहत की उम्मीद
आपके दिए विवरण के अनुसार, डॉ. आदित्य गुप्ता ने बताया कि ऐसी अत्याधुनिक तकनीक की लागत फिलहाल अधिक है और उपकरणों/तकनीक के आयात पर निर्भरता इसका एक कारण है। उन्होंने स्वदेशी तकनीक के विकास की दिशा में हो रहे प्रयासों का भी उल्लेख किया।
भविष्य में स्वदेशी तकनीक और उपकरणों की उपलब्धता बढ़ने पर लागत कम होने की संभावना जताई जा सकती है, लेकिन किसी मरीज के लिए वास्तविक खर्च अस्पताल, बीमारी और उपचार योजना के अनुसार अलग-अलग होगा।
मरीजों के लिए सबसे जरूरी बात
CyberKnife के बारे में जानकारी मिलने के बाद किसी भी मरीज को केवल इंटरनेट या सामान्य जानकारी के आधार पर उपचार का फैसला नहीं करना चाहिए। MRI/CT रिपोर्ट, ट्यूमर का प्रकार, उसका आकार, स्थान और मरीज की पूरी मेडिकल स्थिति देखकर ही विशेषज्ञ तय कर सकते हैं कि रेडियोसर्जरी उपयुक्त है या नहीं।
इसी तरह मिर्गी में भी पहले यह पता लगाना जरूरी है कि दौरे कहां से शुरू होते हैं और दवाओं से बीमारी कितनी नियंत्रित है।


