काठमांडू। नेपाल में भोटेकोशी और त्रिशूली नदी तंत्र में आई विनाशकारी बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी है। 26 अगस्त को आई अचानक बाढ़ के बाद अब मृतकों और लापता लोगों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। नेपाल पुलिस के मुताबिक रविवार 30 अगस्त को दोपहर 3 बजे तक 788 शव बरामद किए जा चुके थे। वहीं, राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) के अनुसार 2,502 लोग अब भी लापता हैं।
रेस्क्यू एजेंसियां दुर्गम इलाकों, जलविद्युत परियोजनाओं और सुरंगों में फंसे लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं। नेपाल सरकार ने बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मियों और हेलीकॉप्टरों को अभियान में लगाया है।
चितवन में सबसे ज्यादा शव बरामद
नेपाल पुलिस के अनुसार प्रभावित जिलों में चितवन में सबसे ज्यादा 264 शव बरामद किए गए हैं। इसके बाद नवलपरासी ईस्ट में 194, नवलपरासी वेस्ट में 120, गोरखा में 58, नुवाकोट में 52, धाडिंग में 50, तनहुन में 37 और रसुवा में 13 शव बरामद हुए हैं।
आंकड़ों में अंतर इसलिए भी दिखाई दे रहा है क्योंकि पुलिस, NDRRMA और अन्य एजेंसियां अलग-अलग समय पर बरामद शवों और लापता लोगों की जानकारी अपडेट कर रही हैं। नेपाल सरकार ने भी लोगों और मीडिया से आधिकारिक रूप से सत्यापित आंकड़ों पर भरोसा करने की अपील की है।
2502 लोग अब भी लापता
NDRRMA के मुताबिक 2,502 लोगों का अब तक पता नहीं चल पाया है। लापता लोगों में बड़ी संख्या जलविद्युत परियोजनाओं से जुड़े कर्मचारियों की है। करीब 933 हाइड्रोपावर कर्मचारी लापता बताए गए हैं।
इसके अलावा सुरक्षा बलों, सीमा शुल्क और आव्रजन विभाग के कर्मचारियों तथा विदेशी नागरिकों के भी लापता होने की जानकारी सामने आई है। आपदा की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कई प्रभावित क्षेत्रों में संपर्क और सड़क मार्ग बुरी तरह बाधित हैं।
20 हजार के करीब सुरक्षाकर्मी रेस्क्यू में जुटे
नेपाल सरकार ने बड़े पैमाने पर बचाव अभियान शुरू किया है। विदेश मंत्रालय के अनुसार करीब 19,000 सुरक्षाकर्मी और 16 हेलीकॉप्टर प्रभावित क्षेत्रों में लगाए गए हैं। भारत, चीन और दक्षिण कोरिया के सुरंग बचाव विशेषज्ञ भी विशेष रूप से सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने में मदद कर रहे हैं।
नेपाल की एजेंसियों के अनुसार हजारों लोगों को अब तक सुरक्षित निकाला जा चुका है। नेपाल पुलिस द्वारा दोपहर 3 बजे जारी आंकड़ों में कुल 8,730 लोगों को बचाए जाने की जानकारी दी गई है।
जलविद्युत परियोजनाओं में फंसे लोगों की तलाश
बाढ़ का सबसे गंभीर असर जलविद्युत परियोजनाओं पर पड़ा है। कई परियोजनाओं के आसपास अचानक पानी और मलबा पहुंचने के बाद बड़ी संख्या में कर्मचारी लापता हुए हैं।
त्रिशूली क्षेत्र में सुरंगों में फंसे लोगों के परिवार लगातार अपने परिजनों की जानकारी का इंतजार कर रहे हैं। बचाव दल सुरंगों तक पहुंच बनाने और वहां फंसे लोगों को बाहर निकालने के लिए विशेषज्ञों और भारी उपकरणों की मदद ले रहे हैं।
एक परिवार के सदस्य ने समाचार एजेंसी ANI से बातचीत में बताया कि उनका बेटा त्रिशूली 3A परियोजना में मैकेनिकल इंजीनियर है और अभी तक बचाए गए लोगों में उसका नाम नहीं है। परिवार ने सरकार से बचाव अभियान में आवश्यक विशेषज्ञता और क्षमता तत्काल बढ़ाने की अपील की।
शवों की पहचान बनी बड़ी चुनौती
बाढ़ के बाद बड़ी संख्या में शव बरामद होने के कारण उनकी पहचान करना भी प्रशासन के लिए चुनौती बन गया है। कई अस्पतालों और शवगृहों में शव रखे जा रहे हैं। कुछ शवों की पहचान नहीं हो पाने के कारण डीएनए और फॉरेंसिक प्रक्रिया का सहारा लिया जा रहा है।
रिपोर्टों के मुताबिक, कई शवों की स्थिति खराब होने के कारण पहचान प्रक्रिया और भी कठिन हो गई है। इस बीच, परिवार अपने लापता परिजनों की तलाश में अस्पतालों और शवगृहों के चक्कर लगा रहे हैं।
भारत ने भी बढ़ाया मदद का हाथ
नेपाल की इस आपदा में भारत ने भी राहत और बचाव के प्रयासों में सहयोग बढ़ाया है। नेपाल के अधिकारियों ने बताया है कि भारत समेत कई देशों के विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है। इससे पहले नेपाल के रसुवा क्षेत्र में जलविद्युत परियोजना से जुड़े चार भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाले जाने की जानकारी भी सामने आई थी।
सुरंग बचाव के लिए भारतीय विशेषज्ञों की मदद खास तौर पर महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि कई स्थानों पर मलबा और क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचा बचाव कार्य को बेहद मुश्किल बना रहा है।
राहत सामग्री पहुंचाने के लिए लगातार अभियान
दुर्गम और कटे हुए इलाकों तक राहत सामग्री पहुंचाना भी प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती है। भोजन, दवाइयां, संचार उपकरण और अन्य जरूरी सामान हेलीकॉप्टरों तथा जमीन के रास्ते पहुंचाया जा रहा है।
कई इलाकों में सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त होने के कारण हवाई मार्ग पर निर्भरता बढ़ गई है। खराब मौसम और पहाड़ी भूगोल के कारण हेलीकॉप्टर संचालन भी आसान नहीं है।
नेपाल सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में राहत और पुनर्वास के लिए आपातकालीन वित्तीय सहायता भी जारी की है। अधिकारियों का कहना है कि प्राथमिकता अभी भी लापता लोगों को खोजने, घायलों का इलाज करने और प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाने की है।
रेस्क्यू के साथ बढ़ रही चुनौती
नेपाल में बचाव अभियान लगातार जारी है, लेकिन हर गुजरते घंटे के साथ लापता लोगों के परिवारों की चिंता बढ़ती जा रही है। प्रशासन के सामने एक साथ कई चुनौतियां हैं—दुर्गम इलाकों तक पहुंचना, सुरंगों में फंसे लोगों को निकालना, शवों की पहचान करना और प्रभावित लोगों तक भोजन एवं चिकित्सा सहायता पहुंचाना।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि बचाव और खोज अभियान जारी रहेगा तथा जैसे-जैसे सत्यापन होगा, मृतकों और लापता लोगों के आंकड़े भी अपडेट किए जाएंगे।
निष्कर्ष
नेपाल की यह त्रासदी अब एक बड़े मानवीय संकट में बदल चुकी है। 30 अगस्त की दोपहर तक नेपाल पुलिस ने 788 शव बरामद होने की पुष्टि की, जबकि 2,502 लोग अब भी लापता बताए गए हैं। हजारों सुरक्षाकर्मी, हेलीकॉप्टर और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ बचाव अभियान में जुटे हैं। सबसे बड़ी चुनौती अब उन लोगों तक पहुंचना है, जिनका अभी तक कोई पता नहीं चल पाया है। आने वाले दिनों में राहत, बचाव और शवों की पहचान का अभियान और तेज होने की उम्मीद है।


