Rajasthan Mayor Election 2026: राजस्थान में स्थानीय निकाय चुनाव के बाद अब नगर निगमों के मेयर पद के चुनाव की तस्वीर साफ होने जा रही है। सोमवार, 21 सितंबर 2026 को प्रदेश के पांच नगर निगमों—उदयपुर, बीकानेर, अलवर, पाली और अजमेर—में मेयर पद के लिए मतदान हो रहा है। इन पांचों निगमों के कुल 370 पार्षद अपने-अपने मेयर का चुनाव करेंगे। मतदान के बाद मतगणना होगी और दोपहर तक पांचों नगर निगमों में मेयर पद की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
इस चुनाव को लेकर भाजपा और कांग्रेस दोनों ने अपने-अपने पार्षदों को एकजुट रखने के लिए बाड़ाबंदी की है। ऐसे में मतदान के दौरान पार्षदों के रुख पर नजर रहेगी। खासकर उन निगमों में मुकाबला दिलचस्प है, जहां दोनों प्रमुख दलों के बीच पार्षदों की संख्या का अंतर ज्यादा नहीं है और निर्दलीय पार्षद निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।
सुबह 10 बजे से मतदान, दोपहर तक नतीजे
पांचों नगर निगमों में मेयर चुनाव के लिए मतदान सुबह 10 बजे से शुरू हुआ। मतदान पूरा होने के बाद मतगणना की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। यानी लंबे इंतजार के बाद सोमवार को उदयपुर, बीकानेर, अलवर, पाली और अजमेर के नगर निगमों को अपना नया मेयर मिल जाएगा।
राजस्थान के निकाय चुनाव में यह चरण इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि नगर निगम का मेयर शहर के स्थानीय प्रशासन और नगर निगम बोर्ड के कामकाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
उदयपुर में भाजपा के 53 पार्षद
उदयपुर नगर निगम में कुल 80 वार्ड हैं। यहां भाजपा के 53 पार्षद हैं। भाजपा ने पारस सिंघवी को मेयर पद का प्रत्याशी बनाया है, जबकि कांग्रेस की ओर से डॉ. पूनम कंवर मैदान में हैं।
पार्षदों की संख्या के लिहाज से दोनों प्रमुख दलों की स्थिति यहां अलग-अलग है, लेकिन मतदान के अंतिम परिणाम के लिए सभी पार्षदों का वोट महत्वपूर्ण होगा।

बीकानेर में कांग्रेस के पास ज्यादा पार्षद
बीकानेर नगर निगम में कुल 80 वार्ड हैं। यहां कांग्रेस के 42, भाजपा के 27 और अन्य दलों/निर्दलीय के 11 पार्षद हैं।
भाजपा ने सुरेंद्र सिंह को और कांग्रेस ने अनिल कल्ला को मेयर पद का उम्मीदवार बनाया है। ऐसे में यहां 11 अन्य पार्षदों की भूमिका पर भी राजनीतिक नजरें टिकी हुई हैं।
अलवर में भी करीबी गणित
अलवर नगर निगम में कुल 65 वार्ड हैं। भाजपा के 28 और कांग्रेस के 23 पार्षद हैं। बाकी पार्षदों की स्थिति भी चुनावी गणित में महत्व रखती है।
यहां भाजपा ने सुमनलता अग्रवाल और कांग्रेस ने कमलेश शर्मा को उम्मीदवार बनाया है। दोनों दलों के बीच पार्षदों की संख्या में अंतर सीमित होने के कारण मतदान पर खास नजर है।
पाली में कांग्रेस के ज्यादा पार्षद
पाली नगर निगम में भी 65 वार्ड हैं। यहां कांग्रेस के 29 और भाजपा के 21 पार्षद हैं।
मेयर पद के लिए भाजपा ने नमिता बुबकिया और कांग्रेस ने सुमित्रा जैन को उम्मीदवार बनाया है। पाली में भी बाकी पार्षदों का रुख परिणाम में महत्वपूर्ण हो सकता है।
अजमेर में भी मुकाबला रोचक
अजमेर नगर निगम में कांग्रेस के 37 और भाजपा के 32 पार्षद हैं। यहां भाजपा ने अनामिका शर्मा और कांग्रेस ने किरण गढ़वाल को प्रत्याशी बनाया है।
पार्षदों की संख्या में अंतर बहुत ज्यादा नहीं होने के कारण अजमेर का मेयर चुनाव भी मतदान के स्तर पर खासा महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भरतपुर और भीलवाड़ा में पहले ही निर्विरोध चुनाव
राजस्थान के कुल नगर निगमों में भरतपुर और भीलवाड़ा में मेयर पद के लिए मतदान की जरूरत नहीं पड़ी। यहां भाजपा की महिला उम्मीदवार क्रमशः अनुराधा और जसवंत कंवर निर्विरोध मेयर चुनी जा चुकी हैं।
इसलिए 21 सितंबर को होने वाला मतदान पांच अन्य नगर निगमों तक सीमित है।
273 निकायों में अध्यक्ष पद के लिए भी चुनाव
मेयर चुनाव के साथ ही राजस्थान की 273 नगरीय निकायों में अध्यक्ष, सभापति और चेयरमैन पद के लिए भी मतदान हो रहा है। इनमें 41 नगर परिषदों में सभापति और 262 नगर पालिकाओं में चेयरमैन चुने जाने हैं।
राज्य के कुल 305 नगरीय निकायों में 32 जगह अध्यक्ष पहले ही निर्विरोध चुने जा चुके हैं। इनमें भाजपा के 28, कांग्रेस के दो और भाजपा समर्थित दो निर्दलीय उम्मीदवार शामिल हैं।
जयपुर समेत तीन नगर निगमों में अभी इंतजार
राजस्थान के जयपुर, जोधपुर और कोटा नगर निगमों में मेयर चुनाव 21 सितंबर को नहीं हो रहा है। इन निकायों के कुछ वार्डों में दोबारा मतदान के कारण यहां मेयर चुनाव की प्रक्रिया बाद में होगी।
इन तीन नगर निगमों के लिए चुनाव प्रक्रिया 25 सितंबर को होने वाली है। जयपुर नगर निगम में 150 वार्ड हैं, जबकि जोधपुर और कोटा नगर निगम में 100-100 वार्ड हैं।
क्रॉस वोटिंग पर सबसे ज्यादा नजर
पांच नगर निगमों में मतदान से पहले भाजपा और कांग्रेस दोनों ने अपने पार्षदों की बाड़ाबंदी की है। इसका मकसद अपने-अपने खेमे के पार्षदों को एकजुट रखना बताया गया है।
मेयर चुनाव में यदि किसी दल के पार्षदों के वोट अपेक्षित तरीके से अलग जाते हैं तो उसका असर सीधे नतीजे पर पड़ सकता है। इसी वजह से मतदान के दौरान क्रॉस वोटिंग और निर्दलीय पार्षदों के रुख पर विशेष नजर रहेगी। हालांकि अंतिम तस्वीर मतदान और मतगणना पूरी होने के बाद ही साफ होगी।

