Mathura News: उत्तर प्रदेश के धार्मिक और पर्यटन शहर वृंदावन से सीवेज व्यवस्था को लेकर एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। लंबे समय से सीवर लाइन की सीमित उपलब्धता और ओवरफ्लो की समस्या से जूझ रहे शहर के लिए अब सुधार की उम्मीद जगी है। शासन ने वृंदावन जोन में सीवेज व्यवस्था को मजबूत करने के लिए 240 करोड़ रुपये की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट यानी DPR तैयार करने के निर्देश दिए हैं। हालांकि, अभी यह परियोजना निर्माण स्तर पर नहीं पहुंची है। डीपीआर तैयार होने, शासन से मंजूरी मिलने और धनराशि आवंटित होने के बाद ही काम शुरू कराया जाएगा।
8.50 लाख की आबादी को मिल सकता है फायदा
नगर निगम क्षेत्र की वर्ष 2025 की आबादी करीब 8.50 लाख बताई गई है। इस क्षेत्र में लगभग 2.10 लाख भवन हैं। इसके बावजूद पूरे शहर के केवल करीब 22 प्रतिशत क्षेत्र में ही सीवर लाइन उपलब्ध होने की बात सामने आई है। यानी बड़ी आबादी और बड़ी संख्या में मकानों को अभी भी पूर्ण सीवेज नेटवर्क का लाभ नहीं मिल रहा है।
यही वजह है कि शहर के अलग-अलग हिस्सों में सीवेज व्यवस्था को लेकर समस्या सामने आती रहती है। खास तौर पर वृंदावन के प्रमुख धार्मिक क्षेत्रों में यह समस्या ज्यादा संवेदनशील हो जाती है, क्योंकि यहां सालभर बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं।
बांकेबिहारी मंदिर क्षेत्र में क्यों बढ़ी चिंता?
वृंदावन के बांकेबिहारी मंदिर और आसपास के इलाकों में सीवर ओवरफ्लो की समस्या का असर सड़क और आसपास के क्षेत्रों पर पड़ने की बात रिपोर्ट में कही गई है। सीवर का पानी बाहर आने से जलभराव और गंदगी की स्थिति पैदा होती है।
यह मामला केवल स्थानीय सुविधा तक सीमित नहीं है। बांकेबिहारी मंदिर वृंदावन के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है और यहां देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु आते हैं। ऐसे में मंदिर क्षेत्र में साफ-सफाई और सीवेज व्यवस्था का सीधा संबंध श्रद्धालुओं की सुविधा और शहर की छवि से भी जुड़ता है।

दिसंबर 2025 में भेजी गई थी 240 करोड़ की योजना
रिपोर्ट के अनुसार जल निगम नगरीय ने दिसंबर 2025 में अमृत-2 योजना के तहत वृंदावन जोन में सीवेज नेटवर्क विस्तार के लिए 240 करोड़ रुपये की कार्ययोजना भेजी थी। पूरे मथुरा-वृंदावन शहर को सीवेज लाइन से जोड़ने के लिए इससे कहीं बड़ी राशि की आवश्यकता का प्रस्ताव भी रखा गया था।
अब शासन की ओर से वृंदावन जोन के लिए डीपीआर तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। नगर निगम और जल निगम नगरीय ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है। प्रस्तावित डीपीआर केवल तत्काल जरूरतों को ध्यान में रखकर नहीं, बल्कि अगले करीब 30 वर्षों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की जानी है।
बांकेबिहारी कॉरिडोर को भी ध्यान में रखकर बनेगी DPR
इस परियोजना की तैयारी में बांकेबिहारी क्षेत्र का भविष्य भी महत्वपूर्ण है। उत्तर प्रदेश सरकार के ई-टेंडर रिकॉर्ड में वृंदावन के लगभग 370 किलोमीटर सीवरेज सिस्टम के लिए DPR तैयार करने से संबंधित कार्य का उल्लेख है। इसमें मौजूदा सीवर नेटवर्क को शामिल करने और बांकेबिहारी कॉरिडोर की योजना को ध्यान में रखकर डिजाइन तैयार करने की बात कही गई है।
इससे संकेत मिलता है कि आने वाले समय में वृंदावन के बढ़ते शहरी और धार्मिक दबाव को देखते हुए सीवेज नेटवर्क को व्यापक स्तर पर तैयार करने की योजना बनाई जा रही है।
सिर्फ 22 प्रतिशत क्षेत्र में सीवर लाइन
आंकड़े इस समस्या की गंभीरता को समझने में मदद करते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक नगर निगम क्षेत्र में अभी करीब 22 प्रतिशत क्षेत्र ही सीवर लाइन से जुड़ा है। इसका मतलब है कि लगभग 78 प्रतिशत शहरी क्षेत्र में सीवर नेटवर्क की कमी बनी हुई है।
वहीं, उत्तर प्रदेश के नमामि गंगे से जुड़े सरकारी रिकॉर्ड में मथुरा की मौजूदा सीवेज परियोजनाओं पर भी काम जारी दिखाई देता है। मथुरा की एक सीवरेज योजना में सितंबर 2026 तक करीब 97 प्रतिशत भौतिक प्रगति दर्ज की गई थी। इससे स्पष्ट है कि जिले में सीवेज नेटवर्क और संबंधित ढांचे पर अलग-अलग परियोजनाओं के माध्यम से काम चल रहा है।
सांसद हेमा मालिनी ने भी उठाया था मामला
रिपोर्ट के अनुसार पिछले महीने मथुरा सांसद हेमा मालिनी ने मुख्यमंत्री के सामने वृंदावन की सीवेज समस्या का मुद्दा रखा था। इसके बाद नगर विकास विभाग की ओर से डीपीआर तैयार करने के निर्देश दिए गए।
अब अगला महत्वपूर्ण चरण डीपीआर का तैयार होना है। इसके बाद प्रस्ताव शासन को स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा। मंजूरी और धनराशि आवंटन के बाद ही सीवर लाइन बिछाने का वास्तविक निर्माण कार्य शुरू होगा।
अभी राहत की उम्मीद, लेकिन काम के लिए मंजूरी जरूरी
फिलहाल इसे सीवर लाइन निर्माण शुरू होने की घोषणा के बजाय परियोजना को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम के रूप में देखा जाना चाहिए। डीपीआर में नेटवर्क की लंबाई, मौजूदा व्यवस्था का एकीकरण, भविष्य की जरूरत, बांकेबिहारी क्षेत्र की आवश्यकताओं और सीवेज प्रबंधन की तकनीकी व्यवस्था का विस्तृत खाका तैयार किया जाएगा।
अगर परियोजना को मंजूरी और बजट मिलता है तो आने वाले वर्षों में वृंदावन के बड़े हिस्से को बेहतर सीवेज नेटवर्क से जोड़े जाने की संभावना बनेगी।

