मेरठ: उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले संगठनात्मक गतिविधियां तेज होती दिखाई दे रही हैं। इसी क्रम में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के पश्चिमी उत्तर प्रदेश दौरे के पहले दिन मेरठ में शक्ति केंद्र संयोजक सम्मेलन आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी शामिल हुए और उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं को संगठन तथा राष्ट्र प्रथम की सोच के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में भाजपा की संगठनात्मक कार्यप्रणाली और कार्यकर्ताओं की भूमिका पर जोर दिया। उनके भाषण का प्रमुख संदेश था—“व्यक्ति से बढ़कर दल और दल से बढ़कर देश।” मुख्यमंत्री ने कहा कि राजनीति में व्यक्तिगत हित से ऊपर संगठन और संगठन से ऊपर राष्ट्र को प्राथमिकता देने की भावना होनी चाहिए।
मेरठ में क्यों जुटे भाजपा के बड़े नेता?
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन 21 और 22 सितंबर को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के दौरे पर हैं। उनके दौरे में मेरठ और सहारनपुर में संगठनात्मक कार्यक्रम तथा कार्यकर्ताओं के साथ संवाद शामिल है। मेरठ में युवा संवाद और शक्ति केंद्र संयोजक सम्मेलन जैसे कार्यक्रम रखे गए। प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी भी इस दौरे में मौजूद रहे।
शक्ति केंद्र संयोजकों के सम्मेलन को पार्टी के जमीनी संगठन से जोड़कर देखा गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि शक्ति केंद्र संयोजक की भूमिका संगठन और चुनावी स्तर पर महत्वपूर्ण है। उनके मुताबिक, पार्टी की जमीनी व्यवस्था को मजबूत करने में इन कार्यकर्ताओं की बड़ी जिम्मेदारी है।
‘मुझे क्या’ नहीं, ‘देश के लिए क्या’ पर जोर
मुख्यमंत्री योगी ने अपने भाषण में राजनीतिक सोच को लेकर भी बात की। उन्होंने कहा कि सवाल यह नहीं होना चाहिए कि “मुझे क्या मिलेगा?”, बल्कि यह होना चाहिए कि “मैं अपने देश के लिए क्या कर रहा हूं?”
उन्होंने इसी विचार को भाजपा की राजनीतिक कार्यशैली से जोड़ते हुए कहा कि व्यक्ति का उद्देश्य देशहित से जुड़ा होना चाहिए। मुख्यमंत्री के मुताबिक, जब राजनीति और सार्वजनिक जीवन में व्यक्तिगत स्वार्थ प्रमुख हो जाता है तो समाज के विकास और पहचान से जुड़े सवाल भी प्रभावित होते हैं।

परिवारवाद और जातिवाद को लेकर विपक्ष पर निशाना
सीएम योगी ने अपने संबोधन में समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस सहित विपक्षी दलों पर परिवारवाद और जातिवाद को लेकर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि लंबे समय तक राजनीति में सत्ता को व्यक्तिगत और पारिवारिक हितों को आगे बढ़ाने के साधन के तौर पर इस्तेमाल किया गया।
यह मुख्यमंत्री का राजनीतिक आरोप और भाजपा की ओर से प्रस्तुत राजनीतिक दृष्टिकोण है। विपक्षी दल इन मुद्दों पर अलग-अलग राजनीतिक दृष्टिकोण रखते हैं। इसलिए इसे मुख्यमंत्री के भाषण के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए।
मिशन-2027 से पहले संगठन पर फोकस
मेरठ का कार्यक्रम ऐसे समय हुआ है जब उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दल अपनी संगठनात्मक तैयारियों पर जोर दे रहे हैं। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन का पश्चिमी यूपी दौरा भी इसी संगठनात्मक संपर्क अभियान का हिस्सा है। मेरठ के बाद सहारनपुर में भी कार्यक्रम प्रस्तावित हैं।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र है। भाजपा के कार्यक्रमों में बूथ, शक्ति केंद्र और जमीनी कार्यकर्ताओं की भूमिका पर लगातार जोर दिया जा रहा है। मेरठ में भी राष्ट्रीय अध्यक्ष और मुख्यमंत्री ने कार्यकर्ताओं के साथ संवाद के जरिए संगठन को सक्रिय रखने का संदेश दिया।
युवा संवाद भी कार्यक्रम का अहम हिस्सा
नितिन नवीन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मेरठ दौरे में युवाओं के साथ संवाद भी शामिल रहा। सुभारती विश्वविद्यालय में युवा सम्मेलन के कार्यक्रम की जानकारी पहले से दी गई थी। इसका उद्देश्य युवाओं से सीधे संवाद करना और संगठनात्मक गतिविधियों से उन्हें जोड़ना बताया गया।
इस दौरान कार्यक्रम स्थल पर सुरक्षा के भी व्यापक इंतजाम किए गए थे। स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक पुलिस, पीएसी, आरएएफ और अन्य सुरक्षा बलों की तैनाती की गई थी। कार्यक्रम स्थल को लेकर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई।
पश्चिमी यूपी में संगठन को मजबूत करने की कवायद
मेरठ का यह कार्यक्रम केवल एक भाषण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पार्टी के जमीनी संगठन से जुड़े कार्यकर्ताओं के साथ संवाद पर केंद्रित रहा। शक्ति केंद्र संयोजकों को संगठन की अहम कड़ी बताते हुए मुख्यमंत्री ने उनकी जिम्मेदारियों पर जोर दिया।
नितिन नवीन के दौरे में भी पार्टी नेताओं, शक्ति केंद्रों और जमीनी कार्यकर्ताओं से सीधे संवाद तथा संगठनात्मक तैयारियों की समीक्षा को प्रमुखता दी गई है।
ऐसे में मेरठ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का “व्यक्ति से बढ़कर दल और दल से बढ़कर देश” वाला संदेश भाजपा की संगठनात्मक सोच और कार्यकर्ताओं को सक्रिय रखने की रणनीति के रूप में सामने आया है। वहीं, परिवारवाद और जातिवाद को लेकर मुख्यमंत्री के हमले ने कार्यक्रम को राजनीतिक रूप से भी चर्चा में ला दिया।

