राजस्थान: की राजधानी जयपुर में कोर्ट कर्मचारी नीरज शर्मा की मौत का मामला अब एक साधारण सड़क हादसे से कहीं अधिक गंभीर रूप ले चुका है। शुरुआती जांच में इसे हिट एंड रन दुर्घटना माना गया था, लेकिन पुलिस की विस्तृत पड़ताल में सामने आया कि यह कथित तौर पर करोड़ों रुपये की पैतृक संपत्ति के लिए रची गई सुनियोजित साजिश थी। जांच में मृतका की बेटी सहित कई लोगों की भूमिका सामने आने का दावा किया गया है, जबकि कुछ आरोपी अभी भी फरार बताए जा रहे हैं।
पहले भी हुई थी कथित हत्या की कोशिश
पुलिस जांच के अनुसार, नीरज शर्मा पर जानलेवा हमला पहली बार घटना से कुछ दिन पहले किया गया था। आरोप है कि उनके घर के बाहर किराये की एक महिंद्रा थार से उन्हें टक्कर मारने की कोशिश की गई, लेकिन वे सतर्कता के कारण बच गईं।
इस घटना के बाद नीरज शर्मा ने अपने घर के बाहर सीसीटीवी कैमरे लगवा दिए थे। पुलिस का कहना है कि कैमरे लगने के बाद आरोपियों ने अपना कथित प्लान बदल दिया और वारदात को किसी दूसरी जगह अंजाम देने की रणनीति बनाई।
परिवार की पृष्ठभूमि और विवाद
जांच में सामने आया कि नीरज शर्मा के पति विजय कुमार शर्मा राजस्थान हाईकोर्ट में एलडीसी के पद पर कार्यरत थे। उनके निधन के बाद परिवार ने अनुकंपा नियुक्ति के तहत नौकरी नीरज शर्मा को दिलाने का निर्णय लिया, ताकि परिवार और उनके दिव्यांग बेटे का भविष्य सुरक्षित रह सके।
पुलिस का आरोप है कि इस फैसले से उनकी 23 वर्षीय बेटी आयुषी शर्मा नाराज थी। बाद में वह अपने चाचा के घर रहने लगी, जहां कथित तौर पर उसे संपत्ति को लेकर उकसाया गया।

5 बीघा जमीन के लिए रची गई कथित साजिश
जांच एजेंसियों के अनुसार, आगरा हाईवे के पास स्थित करीब 5 बीघा कीमती पैतृक जमीन इस पूरे विवाद का केंद्र थी। पुलिस का दावा है कि संपत्ति में हिस्सेदारी के लालच में कथित तौर पर हत्या की योजना बनाई गई।
आरोप है कि वारदात वाले दिन आयुषी ने अपनी मां को फोन कर घर बुलाया और फिर कुछ देर बाद वापस जाने के लिए कहा। जैसे ही नीरज शर्मा पैदल लौट रही थीं, पहले से निगरानी कर रहे लोगों ने हमलावरों को सूचना दी।
तेज रफ्तार SUV से मारी गई टक्कर
पुलिस के मुताबिक, इसके बाद एक तेज रफ्तार स्कॉर्पियो ने पीछे से नीरज शर्मा को जोरदार टक्कर मारी। बताया जा रहा है कि वाहन की रफ्तार लगभग 130 किलोमीटर प्रति घंटा थी।
टक्कर इतनी भीषण थी कि नीरज शर्मा कई फीट दूर जा गिरीं और उनकी मौके पर ही मौत हो गई। शुरुआत में इसे सामान्य सड़क दुर्घटना के रूप में पेश करने की कोशिश की गई।
डिजिटल सबूतों ने खोली परतें
जांच आगे बढ़ने पर पुलिस को कई महत्वपूर्ण डिजिटल सबूत मिले। कॉल रिकॉर्ड, मोबाइल लोकेशन, सीसीटीवी फुटेज और आरोपियों के बीच हुई बातचीत की जांच के बाद पुलिस ने कथित साजिश की कड़ियां जोड़ीं।
अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी साक्ष्यों ने इस मामले को साधारण दुर्घटना से हत्या की दिशा में मोड़ दिया। पुलिस अब सभी आरोपियों की भूमिका की विस्तार से जांच कर रही है।
फरार आरोपियों की तलाश जारी
पुलिस ने मामले में कई लोगों से पूछताछ की है और कुछ आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। वहीं, फरार आरोपियों की तलाश के लिए लगातार दबिश दी जा रही है।
जांच एजेंसियों का कहना है कि मामले में आर्थिक लेन-देन, संपत्ति विवाद और अन्य संभावित पहलुओं की भी जांच की जा रही है। यदि नए तथ्य सामने आते हैं तो जांच का दायरा और बढ़ाया जा सकता है।
पुलिस की अपील
पुलिस ने कहा है कि मामला अभी जांच के अधीन है और सभी आरोप न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार परखे जाएंगे। अंतिम निष्कर्ष अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों और सुनवाई के बाद ही तय होगा।
जयपुर का नीरज शर्मा हत्याकांड अब केवल एक सड़क दुर्घटना का मामला नहीं रह गया है। पुलिस जांच में सामने आए कथित डिजिटल साक्ष्यों और संपत्ति विवाद के पहलुओं ने इस केस को बेहद संवेदनशील बना दिया है। फिलहाल जांच जारी है और फरार आरोपियों की तलाश की जा रही है। अंतिम सच्चाई अदालत में सुनवाई और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी।


