लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने पार्टी कार्यकर्ताओं तथा समर्थकों के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश जारी किया है। उन्होंने दलित, पिछड़े और उपेक्षित वर्गों से भावनाओं में बहकर सड़क पर आंदोलन करने के बजाय संविधान और कानून के दायरे में रहकर अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ने की अपील की।
मायावती ने कहा कि सामाजिक न्याय और सम्मान की स्थायी लड़ाई केवल राजनीतिक सत्ता में भागीदारी से जीती जा सकती है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से संगठित होकर अपने मताधिकार का उपयोग करने और लोकतांत्रिक व्यवस्था के माध्यम से सत्ता की “मास्टर चाबी” अपने हाथ में लेने का आह्वान किया।
‘वोट की ताकत ही सबसे बड़ा हथियार’
लखनऊ स्थित पार्टी कार्यालय से जारी अपने संदेश में मायावती ने कहा कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर ने संविधान के माध्यम से दलितों, पिछड़ों और वंचित वर्गों को मतदान का अधिकार और समान अवसर प्रदान किए। इन अधिकारों का सही उपयोग करके ही समाज में वास्तविक परिवर्तन लाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि केवल भावनात्मक आंदोलनों से स्थायी समाधान नहीं निकलता, बल्कि राजनीतिक भागीदारी और संगठित मतदान ही समाज की स्थिति बदल सकता है।
कानून के दायरे में रहकर लड़ें अधिकारों की लड़ाई
बसपा प्रमुख ने किसी भी प्रकार के अत्याचार, भेदभाव या अन्याय की स्थिति में कानून को हाथ में न लेने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को न्याय नहीं मिलता है तो उसे न्यायालय का दरवाजा खटखटाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर निचली अदालत से लेकर उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय तक कानूनी लड़ाई लड़ी जा सकती है। उनका कहना था कि संवैधानिक संस्थाओं पर भरोसा बनाए रखना लोकतंत्र की मजबूती के लिए आवश्यक है।
आंदोलनों को लेकर जताई चिंता
अपने संदेश में मायावती ने आरोप लगाया कि कुछ संगठन और राजनीतिक दल अपने राजनीतिक हितों के लिए समाज के कमजोर वर्गों की भावनाओं का इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने कहा कि कई बार लोगों को आंदोलन के लिए उकसाया जाता है, लेकिन बाद में वही लोग राजनीतिक लाभ लेकर अलग हो जाते हैं, जबकि पीड़ित वर्ग की समस्याएं जस की तस बनी रहती हैं।
उन्होंने कार्यकर्ताओं से ऐसी परिस्थितियों में संयम और विवेक से काम लेने की अपील की।

विधानसभा चुनाव को लेकर दिया विशेष संदेश
मायावती ने आगामी विधानसभा, लोकसभा और स्थानीय निकाय चुनावों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह समय राजनीतिक रूप से जागरूक रहने का है। उन्होंने कहा कि यदि दलित, पिछड़े और अन्य उपेक्षित वर्ग संगठित होकर मतदान करेंगे, तभी वे अपनी राजनीतिक भागीदारी मजबूत कर सकेंगे।
उन्होंने कार्यकर्ताओं से बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने और अधिक से अधिक लोगों को मतदान के लिए प्रेरित करने का आह्वान किया।
बाबा साहेब और गौतम बुद्ध के मार्ग पर चलने की अपील
बसपा प्रमुख ने कहा कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर और भगवान गौतम बुद्ध ने समाज को शांति, समानता और संवैधानिक व्यवस्था का मार्ग दिखाया था। उन्होंने लोगों से इन्हीं आदर्शों का पालन करते हुए सामाजिक सद्भाव और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने की अपील की।
उनका कहना था कि संघर्ष अवश्य करें, लेकिन वह हमेशा संविधान और कानून के दायरे में रहकर होना चाहिए।
राजनीतिक हलकों में बयान के मायने
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विधानसभा चुनाव 2027 से पहले आया यह संदेश बसपा के संगठनात्मक अभियान का हिस्सा माना जा सकता है। पार्टी अपने पारंपरिक सामाजिक आधार को फिर से संगठित करने की दिशा में लगातार प्रयास कर रही है।
मायावती का यह संदेश पार्टी कार्यकर्ताओं को चुनावी तैयारियों के लिए सक्रिय करने और मतदाताओं के बीच संवैधानिक एवं लोकतांत्रिक तरीके से राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने पर केंद्रित दिखाई देता है।
निष्कर्ष:
मायावती ने अपने ताजा संदेश में स्पष्ट किया कि दलित, पिछड़े और उपेक्षित वर्गों के अधिकारों की स्थायी सुरक्षा राजनीतिक भागीदारी और वोट की ताकत से ही संभव है। उन्होंने संविधान, कानून और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर भरोसा रखते हुए संगठित मतदान के जरिए सत्ता में भागीदारी बढ़ाने का आह्वान किया।

