लखनऊ के लोहिया संस्थान में इलाज पर उठे सवाल, ऑपरेशन के बाद युवक का काटना पड़ा हाथ
उत्तर प्रदेश: की राजधानी लखनऊ स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार मामला कथित चिकित्सा लापरवाही से जुड़ा है। फिरोजाबाद निवासी एक युवक ने आरोप लगाया है कि पेट के ऑपरेशन के दौरान इलाज में हुई गंभीर चूक के कारण उसके बाएं हाथ में संक्रमण फैल गया और अंततः डॉक्टरों को उसका हाथ काटना पड़ा। इस घटना के बाद पीड़ित परिवार ने अस्पताल प्रशासन से लेकर राज्य सरकार तक न्याय की गुहार लगाई है।
हालांकि, अस्पताल प्रशासन का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई गई तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होगी।
पेट के ऑपरेशन के लिए हुआ था भर्ती
पीड़ित अंकित राठौर, जो फिरोजाबाद के रहने वाले हैं, के अनुसार उन्हें खाने की नली (इसोफेगस) से जुड़ी समस्या के इलाज के लिए 2 जून को लखनऊ के लोहिया संस्थान में भर्ती कराया गया था। चिकित्सकीय जांच के बाद 8 जून को उनका ऑपरेशन किया गया।
अंकित का आरोप है कि ऑपरेशन के बाद उन्हें बाएं हाथ में लगातार दर्द और सूजन की शिकायत होने लगी। धीरे-धीरे हाथ ने काम करना बंद कर दिया और स्थिति लगातार बिगड़ती चली गई।
परिजनों ने लगाया गंभीर आरोप
परिजनों का कहना है कि ऑपरेशन के दौरान हाथ में लगाए गए इंजेक्शन या कैनुला के कारण संक्रमण फैल गया। उनका आरोप है कि समय रहते संक्रमण का सही इलाज नहीं किया गया, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई।
परिवार का कहना है कि यदि समय पर उचित उपचार मिलता तो शायद हाथ को बचाया जा सकता था।

दूसरे अस्पतालों में रेफर किया गया
पीड़ित परिवार के मुताबिक, 19 जून को लोहिया संस्थान ने यह कहते हुए मरीज को संजय गांधी पीजीआई (SGPGI) और किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) रेफर कर दिया कि वहां प्लास्टिक सर्जरी और वैस्कुलर सर्जरी की बेहतर सुविधा उपलब्ध है।
परिजनों का आरोप है कि दोनों संस्थानों में तत्काल भर्ती नहीं मिल सकी। इसके बाद 24 जून को अंकित को दोबारा लोहिया संस्थान लाया गया, जहां जांच में हाथ में गंभीर संक्रमण पाया गया।
डॉक्टरों ने संक्रमण को शरीर में फैलने से रोकने के लिए अंततः मरीज का बायां हाथ काटने (एम्प्यूटेशन) का फैसला लिया।
स्थायी दिव्यांगता का दर्द
हाथ कटने के बाद अंकित अब स्थायी रूप से दिव्यांग हो गए हैं। उनका कहना है कि एक सामान्य ऑपरेशन के लिए अस्पताल आए थे, लेकिन अब पूरी जिंदगी अपंगता के साथ बितानी पड़ेगी।
पीड़ित ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए दोषी डॉक्टरों और संबंधित मेडिकल स्टाफ के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। साथ ही उन्होंने सरकार से उचित मुआवजा और परिवार के भरण-पोषण के लिए सरकारी नौकरी देने की भी मांग की है।
अस्पताल प्रशासन ने क्या कहा?
डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के प्रवक्ता डॉ. भुवन चंद्र तिवारी ने बताया कि मामला संस्थान के संज्ञान में आ गया है।
उन्होंने कहा कि निदेशक के निर्देश पर एक जांच समिति गठित की जाएगी, जो पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच करेगी। यदि जांच में किसी डॉक्टर या कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
जांच के बाद ही स्पष्ट होगी सच्चाई
फिलहाल इस मामले में मरीज और परिजनों ने गंभीर आरोप लगाए हैं, जबकि अस्पताल प्रशासन ने जांच पूरी होने तक किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से इनकार किया है।
चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी ऑपरेशन के बाद संक्रमण कई कारणों से हो सकता है। ऐसे मामलों में वास्तविक कारण का पता चिकित्सकीय रिकॉर्ड, विशेषज्ञों की राय और जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर ही लगाया जा सकता है।
इसलिए यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि चिकित्सा लापरवाही के आरोपों की पुष्टि अभी जांच के बाद ही हो सकेगी।
स्वास्थ्य सेवाओं पर फिर उठे सवाल
इस घटना ने सरकारी अस्पतालों में मरीजों की सुरक्षा और उपचार की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर बहस छेड़ दी है। यदि जांच में लापरवाही साबित होती है तो यह मामला स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय बन सकता है। वहीं, यदि आरोप गलत साबित होते हैं तो जांच रिपोर्ट स्थिति स्पष्ट करेगी।
निष्कर्ष:
फिरोजाबाद के युवक द्वारा लगाए गए आरोप बेहद गंभीर हैं। हालांकि फिलहाल यह मामला जांच के दायरे में है और अंतिम सच्चाई जांच रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएगी। अस्पताल प्रशासन ने निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया है। ऐसे मामलों में पारदर्शी जांच और दोषियों पर उचित कार्रवाई ही पीड़ित को न्याय दिला सकती है तथा स्वास्थ्य व्यवस्था पर जनता का भरोसा बनाए रख सकती है।

