बिना इंश्योरेंस वाहन चलाना पड़ेगा भारी! सुप्रीम कोर्ट ने दिए बड़े निर्देश, कैमरों से कटेगा चालान और पेट्रोल पर भी लग सकती है रोक
नई दिल्ली। अगर आपकी कार या बाइक का इंश्योरेंस एक्सपायर हो चुका है और आप उसे बिना वैध बीमा के सड़क पर चला रहे हैं, तो आने वाले समय में आपको बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में बिना इंश्योरेंस वाले वाहनों की बढ़ती संख्या पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि सड़क पर बिना वैध बीमा वाले वाहन न केवल कानून का उल्लंघन करते हैं बल्कि दुर्घटना की स्थिति में पीड़ितों के लिए न्याय और मुआवजा प्राप्त करना भी बेहद कठिन बना देते हैं।
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस संजय करोल और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने कहा कि देश में बड़ी संख्या में वाहन बिना इंश्योरेंस के चल रहे हैं, जो मोटर व्हीकल एक्ट की भावना के विपरीत है। अदालत ने इस समस्या से निपटने के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग करने और सख्त निगरानी व्यवस्था लागू करने पर जोर दिया है।
56 फीसदी वाहनों के पास नहीं है वैध इंश्योरेंस
सुनवाई के दौरान अदालत के सामने प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार भारत में पंजीकृत लगभग 30.4 करोड़ वाहनों में से करीब 16.5 करोड़ वाहन ऐसे हैं जिनका वैध इंश्योरेंस नहीं है। यानी देश में लगभग 56 प्रतिशत वाहन बिना बीमा के सड़कों पर दौड़ रहे हैं।
कोर्ट ने इस स्थिति को बेहद चिंताजनक बताते हुए कहा कि सड़क दुर्घटनाओं से जुड़े लगभग 22 प्रतिशत मामलों में बिना इंश्योरेंस वाले वाहन शामिल होते हैं। ऐसी स्थिति में पीड़ितों और उनके परिवारों को समय पर मुआवजा नहीं मिल पाता, जिससे उन्हें लंबी कानूनी प्रक्रिया का सामना करना पड़ता है।
कैमरों से होगी पहचान, सीधे घर पहुंचेगा ई-चालान
सुप्रीम कोर्ट ने सुझाव दिया कि हाईवे और प्रमुख सड़कों पर लगे ANPR (Automatic Number Plate Recognition) कैमरों को VAHAN पोर्टल और इंश्योरेंस इंफॉर्मेशन ब्यूरो के डाटाबेस से जोड़ा जाए।
इस तकनीक की मदद से बिना इंश्योरेंस वाले वाहनों की स्वतः पहचान की जा सकेगी और वाहन मालिकों को ऑटोमैटिक ई-चालान जारी किया जाएगा। इससे ट्रैफिक नियमों का पालन सुनिश्चित करने के साथ-साथ कानून के प्रभावी क्रियान्वयन में भी मदद मिलेगी।

क्या पेट्रोल पंप पर नहीं मिलेगा ईंधन?
सुप्रीम कोर्ट ने इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (IRDAI) और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) को एक पायलट प्रोजेक्ट तैयार करने पर विचार करने को कहा है।
इस प्रस्ताव के तहत वाहन के वैध इंश्योरेंस स्टेटस को ईंधन वितरण प्रणाली से जोड़ा जा सकता है। यदि किसी वाहन का इंश्योरेंस समाप्त हो चुका है, तो उसे पेट्रोल या डीजल देने पर रोक लगाने की व्यवस्था विकसित की जा सकती है।
हालांकि, यह व्यवस्था फिलहाल केवल एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में विचाराधीन है और इसे तुरंत पूरे देश में लागू करने का आदेश नहीं दिया गया है।
ट्रैफिक पुलिस को मिलेंगे डिजिटल उपकरण
सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों की ट्रैफिक पुलिस को आधुनिक डिजिटल उपकरण उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए हैं। अदालत ने कहा कि पुलिसकर्मियों को ऐसे हैंडहेल्ड डिवाइस या मोबाइल एप उपलब्ध कराए जाएं, जो सीधे VAHAN पोर्टल और इंश्योरेंस डाटाबेस से जुड़े हों।
इससे सड़क पर वाहन रोककर तुरंत यह पता लगाया जा सकेगा कि संबंधित वाहन का इंश्योरेंस वैध है या नहीं।
कानून क्या कहता है?
मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 146 के अनुसार किसी भी सार्वजनिक सड़क पर बिना वैध थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस के वाहन चलाना कानूनन अपराध है।
यदि कोई व्यक्ति पहली बार बिना इंश्योरेंस वाहन चलाते हुए पकड़ा जाता है, तो उसे तीन महीने तक की जेल, 2,000 रुपये तक का जुर्माना या दोनों सजा हो सकती है।
दोबारा नियम तोड़ने पर 4,000 रुपये तक का जुर्माना, तीन महीने तक की जेल या दोनों का प्रावधान है।
नई गाड़ियों के लिए बढ़ी इंश्योरेंस अवधि
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी माना कि पहले तय की गई अनिवार्य बीमा अवधि पर्याप्त साबित नहीं हुई है। इसी कारण अदालत ने नई गाड़ियों के लिए थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस की न्यूनतम अवधि बढ़ा दी है।
अब:
- नई कार खरीदने पर 4 वर्ष का थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस अनिवार्य होगा।
- नई दोपहिया वाहन खरीदने पर 6 वर्ष का थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस लेना होगा।
इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि नए वाहन शुरुआती वर्षों में बिना बीमा के सड़क पर न चलें।
सड़क सुरक्षा को मिलेगा बड़ा फायदा
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कैमरा आधारित निगरानी, डिजिटल सत्यापन और ईंधन को इंश्योरेंस से जोड़ने जैसी व्यवस्थाएं प्रभावी रूप से लागू होती हैं, तो सड़क सुरक्षा में उल्लेखनीय सुधार हो सकता है। इससे दुर्घटना पीड़ितों को समय पर मुआवजा मिलने की संभावना बढ़ेगी और वाहन मालिक भी समय पर अपना बीमा नवीनीकरण कराने के लिए प्रेरित होंगे।
निष्कर्ष
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट संदेश दिया है कि बिना इंश्योरेंस वाहन चलाना केवल नियमों का उल्लंघन नहीं बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय है। कैमरों से निगरानी, ऑटोमैटिक ई-चालान, डिजिटल सत्यापन और ईंधन वितरण को इंश्योरेंस से जोड़ने जैसे सुझाव भविष्य में ट्रैफिक व्यवस्था को और अधिक सख्त बना सकते हैं। वाहन मालिकों के लिए समय पर इंश्योरेंस का नवीनीकरण कराना अब पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।

