लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में शुक्रवार को प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और NEET समेत विभिन्न भर्ती एवं प्रवेश परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर हजारों छात्र सड़कों पर उतर आए। राजधानी के ईको गार्डन में आयोजित इस प्रदर्शन के दौरान छात्रों और शिक्षकों की बड़ी संख्या मौजूद रही। हालांकि, आंदोलन के बीच सबसे ज्यादा चर्चा कॉकरोच जनता पार्टी के प्रमुख अभिजीत दीपके को लेकर हुई, जिनके बारे में दावा किया गया कि वे प्रदर्शन स्थल पर महज 28 मिनट ही रुके और उसके बाद एयरकंडीशंड गाड़ी में बैठकर रवाना हो गए।
इस दावे के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है। कई छात्र संगठनों और शिक्षकों ने आंदोलन को राजनीतिक रंग देने की कोशिश का आरोप लगाया है, जबकि कॉकरोच जनता पार्टी का कहना है कि वह छात्रों के मुद्दों के समर्थन में मैदान में उतरी है।
प्रदर्शन में उमड़ी छात्रों की भीड़
ईको गार्डन में आयोजित प्रदर्शन में विभिन्न जिलों से आए छात्र शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि कई प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार गड़बड़ियां सामने आ रही हैं, जिससे लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है। छात्रों ने पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था, निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग उठाई।
छात्रों का कहना है कि यह आंदोलन पूरी तरह छात्रों और शिक्षकों द्वारा संचालित है और इसका उद्देश्य युवाओं की आवाज को सरकार तक पहुंचाना है।
अभिजीत दीपके की एंट्री और नया विवाद
प्रदर्शन के दौरान कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके भी कार्यक्रम स्थल पहुंचे। उन्होंने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि देशभर में जहां भी छात्र अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाएंगे, उनकी पार्टी उनके साथ खड़ी दिखाई देगी।
उन्होंने NEET पेपर लीक और अन्य परीक्षा विवादों का मुद्दा उठाते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग भी की। साथ ही युवाओं के रोजगार और शिक्षा संबंधी मुद्दों पर समर्थन का भरोसा दिलाया।
लेकिन कार्यक्रम के कुछ समय बाद ही नया विवाद खड़ा हो गया। छात्र संगठनों ने दावा किया कि अभिजीत दीपके प्रदर्शन स्थल पर केवल 28 मिनट तक ही मौजूद रहे। इसके बाद वे एयरकंडीशंड इनोवा कार में बैठकर वहां से चले गए।

छात्रों ने लगाया आंदोलन का श्रेय लेने का आरोप
कुछ छात्र नेताओं का आरोप है कि इस आंदोलन की योजना पहले से छात्रों और शिक्षकों द्वारा बनाई गई थी। उनका कहना है कि प्रयागराज में हुई बैठकों के बाद 12 जून को लखनऊ में प्रदर्शन करने का फैसला लिया गया था।
छात्रों का आरोप है कि कॉकरोच जनता पार्टी ने आंदोलन में शामिल होकर उसका राजनीतिक लाभ लेने और श्रेय हासिल करने की कोशिश की। कई छात्रों ने कहा कि उनका संघर्ष लंबे समय से चल रहा है और इसे किसी राजनीतिक दल से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।
शिक्षकों ने भी जताई नाराजगी
प्रदर्शन में मौजूद कुछ कोचिंग संस्थानों के शिक्षकों ने भी आंदोलन को गैर-राजनीतिक बताते हुए अपनी बात रखी। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में एक शिक्षक कहते दिखाई दे रहे हैं कि यह आंदोलन पूरी तरह छात्रों और शिक्षकों का है।
उन्होंने कहा कि आंदोलन का उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था और प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता की मांग करना है, न कि किसी राजनीतिक दल को मंच उपलब्ध कराना।
कुछ शिक्षकों ने व्यंग्य करते हुए यह भी कहा कि जो लोग लंबे समय तक खुले मैदान में नहीं टिक सकते, वे छात्रों के संघर्ष को कैसे समझ पाएंगे।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो
अभिजीत दीपके के कार्यक्रम स्थल से रवाना होने का कथित वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो को लेकर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
एक वर्ग का कहना है कि किसी भी नेता की उपस्थिति का समय आंदोलन की गंभीरता तय नहीं करता, जबकि दूसरे पक्ष का मानना है कि यदि कोई छात्र आंदोलन का समर्थन करने आता है तो उसे छात्रों के साथ मैदान में अधिक समय बिताना चाहिए।
हालांकि वायरल वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और न ही इस पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है।
प्रशासन ने खाली कराया ईको गार्डन
प्रशासन की ओर से प्रदर्शन के लिए सीमित समय की अनुमति दी गई थी। निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने प्रदर्शन स्थल को खाली कराया।
प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा और किसी प्रकार की अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली। हालांकि आंदोलन और उससे जुड़े राजनीतिक विवाद को लेकर चर्चाएं देर शाम तक जारी रहीं।
छात्रों की मांग क्या है?
प्रदर्शन में शामिल छात्रों ने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, पेपर लीक मामलों की निष्पक्ष जांच, भर्ती परीक्षाओं की समयबद्ध प्रक्रिया और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठाई। छात्रों का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो भविष्य में आंदोलन और तेज किया जाएगा।
निष्कर्ष:
लखनऊ के ईको गार्डन में आयोजित छात्र प्रदर्शन ने एक बार फिर प्रतियोगी परीक्षाओं और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय बहस का विषय बना दिया है। वहीं अभिजीत दीपके के 28 मिनट रुकने के दावे ने आंदोलन को नया राजनीतिक मोड़ दे दिया। अब देखना होगा कि छात्रों की मांगों पर क्या कार्रवाई होती है और यह आंदोलन आगे किस दिशा में बढ़ता है।

