न्यूयॉर्क। दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल अमेरिका के सामने राष्ट्रीय कर्ज को लेकर चिंता लगातार बढ़ रही है। अमेरिकी राष्ट्रीय कर्ज पहली बार 40 ट्रिलियन डॉलर यानी करीब 40 लाख करोड़ डॉलर के स्तर को पार कर गया है। खास बात यह है कि पिछले करीब एक दशक में अमेरिकी कर्ज लगभग दोगुना हो चुका है।
कर्ज में इस तेजी ने अमेरिका की आर्थिक नीतियों और सरकारी खर्च को लेकर नई बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर कर्ज बढ़ने की मौजूदा रफ्तार जारी रहती है, तो आने वाले वर्षों में यह और बड़े स्तर पर पहुंच सकता है।
एक दशक में दोगुना हुआ अमेरिका का कर्ज
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक 2016 में अमेरिका का राष्ट्रीय कर्ज 20 ट्रिलियन डॉलर से कम था। अब यह 40 ट्रिलियन डॉलर के पार पहुंच चुका है। यानी करीब दस वर्षों के भीतर अमेरिकी सरकार के कर्ज में लगभग 20 ट्रिलियन डॉलर की बढ़ोतरी हुई है।
यह बढ़ोतरी किसी एक सरकार की नीतियों का परिणाम नहीं है। पिछले वर्षों में अलग-अलग प्रशासन के दौरान बड़े पैमाने पर सरकारी खर्च, आर्थिक सहायता और अन्य वित्तीय फैसलों का असर राष्ट्रीय कर्ज पर पड़ा है।
ब्याज चुकाने में ही अरबों डॉलर खर्च
अमेरिका के लिए चिंता सिर्फ कर्ज की कुल रकम नहीं, बल्कि उस पर चुकाया जाने वाला ब्याज भी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार अमेरिकी सरकार रोजाना अरबों डॉलर ब्याज भुगतान में खर्च कर रही है।
जैसे-जैसे कर्ज बढ़ता है और ब्याज दरों का असर बना रहता है, सरकार के बजट का बड़ा हिस्सा कर्ज की लागत पूरी करने में जा सकता है। इससे भविष्य में शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचे और अन्य सरकारी कार्यक्रमों पर खर्च के लिए उपलब्ध संसाधनों पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है।
पिछले कुछ महीनों में ही 1 ट्रिलियन डॉलर की बढ़ोतरी
अमेरिकी वित्त विभाग के आंकड़ों के हवाले से बताया गया है कि राष्ट्रीय कर्ज में हाल के महीनों में भी तेज वृद्धि हुई है। पिछले करीब पांच महीनों में ही इसमें लगभग 1 ट्रिलियन डॉलर की बढ़ोतरी हुई।
यानी कर्ज का आंकड़ा केवल लंबे समय में ही नहीं बढ़ रहा, बल्कि हाल के दौर में भी इसकी रफ्तार काफी तेज रही है। यही वजह है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर नजर रखने वाले विशेषज्ञ इस स्थिति को गंभीरता से देख रहे हैं।

क्या छह साल में 50 ट्रिलियन डॉलर होगा कर्ज?
पीटर जी. पीटरसन फाउंडेशन के सीईओ माइकल पीटरसन ने चिंता जताई है कि यदि कर्ज बढ़ने की मौजूदा गति बनी रहती है, तो अमेरिका करीब छह वर्षों में 50 ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े तक पहुंच सकता है।
उनके मुताबिक इतनी तेजी से बढ़ता कर्ज अमेरिका की अर्थव्यवस्था और देश के भविष्य के लिए चुनौती बन सकता है। उनका तर्क है कि सरकार को खर्च और कर्ज की बढ़ती लागत को लेकर लंबे समय की रणनीति तैयार करनी होगी।
बुजुर्ग आबादी भी बढ़ा रही है दबाव
अमेरिका के बढ़ते कर्ज के पीछे सिर्फ सरकारी खर्च ही एक कारण नहीं है। देश में बुजुर्ग आबादी बढ़ने से सामाजिक सुरक्षा और मेडिकेयर जैसे कार्यक्रमों पर भी सरकार का खर्च बढ़ रहा है।
हर साल बड़ी संख्या में बेबी बूमर्स सेवानिवृत्त हो रहे हैं। इसके साथ ही वरिष्ठ नागरिकों की जीवन प्रत्याशा बढ़ने से सामाजिक सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर लंबे समय तक खर्च करना पड़ता है।
इसका सीधा असर संघीय बजट पर पड़ता है। लाभार्थियों की संख्या बढ़ने के साथ इन योजनाओं के लिए ज्यादा धन की आवश्यकता होती है।
ट्रंप और बाइडन की नीतियों पर भी चर्चा
अमेरिका के राष्ट्रीय कर्ज में बढ़ोतरी को लेकर पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन और मौजूदा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल की आर्थिक नीतियों पर भी चर्चा हो रही है।
हालांकि, विशेषज्ञों के अनुसार अमेरिका का कर्ज किसी एक राष्ट्रपति के कार्यकाल की वजह से नहीं बढ़ा है। लंबे समय से जारी बजट घाटा, सामाजिक सुरक्षा और स्वास्थ्य कार्यक्रमों का बढ़ता खर्च, रक्षा एवं अन्य सरकारी व्यय तथा ब्याज भुगतान इसके पीछे कई प्रमुख कारण हैं।
इसलिए कर्ज की समस्या को समझने के लिए केवल किसी एक प्रशासन को जिम्मेदार ठहराने के बजाय अमेरिका की लंबे समय से चली आ रही वित्तीय व्यवस्था को देखना जरूरी है।
आम अमेरिकी पर कितना बोझ?
40 ट्रिलियन डॉलर के राष्ट्रीय कर्ज का आकार इतना बड़ा है कि प्रति अमेरिकी नागरिक के हिसाब से भी इसका बोझ काफी अधिक बैठता है। उपलब्ध अनुमान के मुताबिक प्रत्येक अमेरिकी नागरिक पर करीब 1.19 लाख डॉलर के बराबर राष्ट्रीय कर्ज का हिस्सा आता है।
हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि प्रत्येक नागरिक को सीधे इतनी रकम सरकार को चुकानी है। यह राष्ट्रीय सरकार के कुल कर्ज को आबादी के आधार पर बांटकर निकाला गया एक औसत आंकड़ा है।
दुनिया पर भी पड़ सकता है असर
अमेरिका की अर्थव्यवस्था का आकार और वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में डॉलर की भूमिका देखते हुए अमेरिकी कर्ज का असर केवल अमेरिका तक सीमित नहीं रहता।
यदि कर्ज और ब्याज भुगतान का दबाव लगातार बढ़ता है, तो अमेरिकी बजट, ब्याज दरों और आर्थिक नीतियों में बदलाव का असर वैश्विक बाजारों पर भी पड़ सकता है। निवेशक अमेरिकी ट्रेजरी, डॉलर और ब्याज दरों से जुड़े फैसलों पर नजर रखते हैं।
निष्कर्ष:
अमेरिका का राष्ट्रीय कर्ज 40 ट्रिलियन डॉलर के पार पहुंचना दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा वित्तीय संकेत है। बढ़ता सरकारी खर्च, बजट घाटा, सामाजिक सुरक्षा और मेडिकेयर पर दबाव तथा ब्याज भुगतान इस चुनौती को और जटिल बना रहे हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि अमेरिका इस बढ़ते कर्ज को नियंत्रित करने के लिए क्या कदम उठाता है और क्या वह आने वाले वर्षों में 50 ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े तक पहुंचने से पहले अपनी वित्तीय दिशा बदल पाता है।

