राम मंदिर में चढ़ावे को लेकर नया विवाद, आरोपों से मचा सियासी और धार्मिक हलचल
अयोध्या स्थित राम मंदिर एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार वजह मंदिर में आने वाले चढ़ावे और दान की राशि को लेकर सामने आए गंभीर आरोप हैं। मंदिर में कथित तौर पर करोड़ों रुपये की हेराफेरी और चोरी के दावों ने राजनीतिक गलियारों से लेकर धार्मिक जगत तक बहस छेड़ दी है।
मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने सार्वजनिक मंच से कहा कि राम मंदिर में अनियमितताओं के आरोप कोई नई बात नहीं हैं और इस तरह की शिकायतें पहले भी सामने आती रही हैं।
शंकराचार्य ने लगाए गंभीर आरोप
एटा में मीडिया से बातचीत करते हुए शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि मंदिर निर्माण से पहले और बाद में भी कई तरह के विवाद सामने आए। उन्होंने दावा किया कि भूमि खरीद से लेकर अन्य व्यवस्थाओं तक पर सवाल उठते रहे हैं।
हालांकि, इन आरोपों पर राम मंदिर ट्रस्ट की ओर से अब तक किसी नई आधिकारिक प्रतिक्रिया की जानकारी सामने नहीं आई है।
पूर्व लेखा प्रभारी का दावा- रोज होती थी चोरी
विवाद उस समय और बढ़ गया जब खुद को राम मंदिर का पूर्व लेखा प्रभारी बताने वाले महिपाल सिंह ने मीडिया से बातचीत में कई गंभीर आरोप लगाए।
महिपाल सिंह का दावा है कि मंदिर परिसर में चढ़ावे से जुड़ी अनियमितताएं पहले भी होती थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि जब उन्होंने कथित गड़बड़ियों की शिकायत वरिष्ठ पदाधिकारियों से की तो उन्हें पद से हटा दिया गया।
उन्होंने यह भी दावा किया कि मंदिर परिसर में लगे CCTV कैमरों की कई महीनों पुरानी फुटेज हटवा दी गई थी। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

जांच की मांग हुई तेज
राम मंदिर आंदोलन से जुड़े वरिष्ठ भाजपा नेता और बजरंग दल के संस्थापक विनय कटियार भी अयोध्या पहुंचे। उन्होंने कहा कि जिस तरह के आरोप सार्वजनिक रूप से लगाए जा रहे हैं, उनकी सच्चाई सामने आनी चाहिए।
कटियार ने कहा कि जब मामला करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा हो, तब पारदर्शिता सबसे महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने निष्पक्ष जांच की आवश्यकता पर जोर दिया।
सियासत भी हुई गर्म
राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर राजनीतिक दल भी आमने-सामने आ गए हैं।
समाजवादी पार्टी के नेताओं ने मामले में जांच की मांग करते हुए पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं। वहीं भाजपा नेताओं का कहना है कि मंदिर और ट्रस्ट की छवि खराब करने की कोशिश की जा रही है।
पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह और सपा सांसद अवधेश प्रसाद समेत कई नेताओं के बयान भी चर्चा का विषय बने हुए हैं।
पीएमओ ने भी मांगी रिपोर्ट
विवाद बढ़ने के बाद भाजपा नेता डॉ. रजनीश सिंह ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर मामले की जांच की मांग की थी।
इसके बाद प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) द्वारा मंदिर ट्रस्ट से रिपोर्ट मांगे जाने की जानकारी सामने आई। वहीं राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने भी ट्रस्ट सदस्यों के साथ बैठक कर वित्तीय प्रबंधन और चढ़ावे से जुड़े मुद्दों की समीक्षा की।
कैसे होती है चढ़ावे की गिनती?
राम मंदिर में आने वाले नकद दान और चढ़ावे की गिनती बैंक कर्मचारियों की मौजूदगी में की जाती है। पूरी प्रक्रिया CCTV निगरानी के तहत संचालित होती है।
गिनती के बाद राशि को सुरक्षित लॉकर में रखा जाता है और बाद में बैंक खाते में जमा कराया जाता है। ट्रस्ट का मुख्य बैंक खाता भारतीय स्टेट बैंक में संचालित होता है।
ट्रस्ट के अनुसार दान और चढ़ावे के ऑडिट की प्रक्रिया भी नियमित रूप से कराई जाती है।
करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा मामला
राम मंदिर देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर में करोड़ों हिंदुओं की आस्था का केंद्र है। ऐसे में दान और चढ़ावे से जुड़े किसी भी विवाद का सीधा असर श्रद्धालुओं के विश्वास पर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होने से सभी पक्षों के सामने तथ्य स्पष्ट हो सकेंगे और किसी भी तरह की आशंका को दूर किया जा सकेगा।
निष्कर्ष:
राम मंदिर चढ़ावा विवाद लगातार चर्चा में बना हुआ है। शंकराचार्य, पूर्व कर्मचारी और विभिन्न राजनीतिक नेताओं के आरोपों के बीच अब सभी की नजर संभावित जांच और ट्रस्ट की आधिकारिक रिपोर्ट पर टिकी हुई है। करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मामले में पारदर्शिता और तथ्यात्मक जांच ही आगे की स्थिति स्पष्ट कर सकती है।

