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Home - अंतरराष्ट्रीय - “ट्रम्प ने भारत को ‘नरक का द्वार’ बताया: कहा- भारतीय अमेरिका में बच्चों को जन्म देकर नागरिकता लेते हैं, फिर परिवार बुलाते हैं”

“ट्रम्प ने भारत को ‘नरक का द्वार’ बताया: कहा- भारतीय अमेरिका में बच्चों को जन्म देकर नागरिकता लेते हैं, फिर परिवार बुलाते हैं”

Rajat Kumar
Last updated: 2026/04/23 at 4:53 PM
Rajat Kumar
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4 Min Read
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वॉशिंगटन डीसी: से एक बार फिर अमेरिकी राजनीति में बड़ा विवाद सामने आया है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने भारत और चीन को लेकर एक बेहद तीखा और विवादित बयान दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पत्र साझा करते हुए इन देशों को “हेल होल” यानी “नरक का द्वार” बताया और जन्म के आधार पर नागरिकता (बर्थराइट सिटिजनशिप) को लेकर अपनी आपत्ति दोहराई।

Contents
बर्थराइट सिटिजनशिप पर ट्रम्प का हमलाटेक सेक्टर में भारतीयों-चीनी लोगों पर टिप्पणीप्रवासी संगठनों पर भी निशानाक्या है बर्थराइट सिटिजनशिप?ट्रम्प का एक्जीक्यूटिव ऑर्डर और कानूनी चुनौतीवैश्विक और कूटनीतिक असर

ट्रम्प ने अपने बयान में कहा कि अमेरिका में जन्म के आधार पर नागरिकता मिलने की व्यवस्था का दुरुपयोग किया जा रहा है। उनके अनुसार, कई प्रवासी परिवार अपने बच्चों को अमेरिका में जन्म दिलाकर नागरिकता हासिल करते हैं और फिर उसी आधार पर पूरे परिवार को वहां बसाने का रास्ता बना लेते हैं।

बर्थराइट सिटिजनशिप पर ट्रम्प का हमला

ट्रम्प ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि यह मुद्दा केवल कानूनी नहीं, बल्कि राष्ट्रीय नीति का विषय है और इसका फैसला अदालतों के बजाय जनता की वोटिंग से होना चाहिए। उन्होंने एक सोशल मीडिया पोल का हवाला देते हुए दावा किया कि अधिकांश लोग जन्म के आधार पर मिलने वाली नागरिकता को सीमित करने के पक्ष में हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि अदालतों और वकीलों पर इस मुद्दे को सुलझाने के लिए पूरी तरह भरोसा नहीं किया जा सकता। उनका मानना है कि इस नीति के कारण अमेरिका की जनसंख्या संरचना और संसाधनों पर दबाव बढ़ रहा है।

टेक सेक्टर में भारतीयों-चीनी लोगों पर टिप्पणी

ट्रम्प ने अपने बयान में कैलिफोर्निया के टेक सेक्टर का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि वहां हाई-टेक नौकरियों में भारत और चीन के लोगों का “अत्यधिक दबदबा” है। उनके अनुसार, भर्ती प्रक्रिया इस तरह झुकी हुई है कि अन्य देशों के लोगों के लिए अवसर कम हो रहे हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनियों में चयन योग्यता के बजाय राष्ट्रीयता के आधार पर हो रहा है, जिससे सिस्टम की निष्पक्षता प्रभावित हो रही है। हालांकि, इस दावे के समर्थन में उन्होंने कोई ठोस आंकड़े पेश नहीं किए।

प्रवासी संगठनों पर भी निशाना

ट्रम्प ने American Civil Liberties Union (ACLU) जैसे संगठनों की भी आलोचना की, जो प्रवासियों के अधिकारों के लिए काम करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ये संगठन अवैध प्रवासियों को फायदा पहुंचाने वाली नीतियों का समर्थन करते हैं।

ट्रम्प ने यहां तक कहा कि ऐसे संगठनों के खिलाफ सख्त कानूनों के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने यह भी दावा किया कि प्रवासी अमेरिकी स्वास्थ्य सेवाओं और वेलफेयर सिस्टम का “अत्यधिक उपयोग” कर रहे हैं, जिससे करदाताओं पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है।

क्या है बर्थराइट सिटिजनशिप?

अमेरिका में जन्म के आधार पर नागरिकता का अधिकार Fourteenth Amendment के तहत मिलता है, जिसे 1868 में लागू किया गया था। इस संशोधन के अनुसार, अमेरिका में जन्म लेने वाला हर व्यक्ति स्वतः अमेरिकी नागरिक बन जाता है, चाहे उसके माता-पिता का इमिग्रेशन स्टेटस कुछ भी हो।

यह कानून मूल रूप से गृहयुद्ध के बाद अफ्रीकी-अमेरिकी लोगों को नागरिकता देने के लिए बनाया गया था। लेकिन समय के साथ इसकी व्याख्या व्यापक हो गई और अब यह सभी पर लागू होता है।

ट्रम्प का एक्जीक्यूटिव ऑर्डर और कानूनी चुनौती

20 जनवरी 2025 को सत्ता में आने के बाद ट्रम्प ने एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर हस्ताक्षर कर बर्थराइट सिटिजनशिप को सीमित करने की कोशिश की थी। हालांकि, इस आदेश को तुरंत कानूनी चुनौती मिली और कई फेडरल कोर्ट ने इसे लागू होने से रोक दिया।

फिलहाल यह मामला अमेरिकी अदालतों में लंबित है और इस पर अंतिम फैसला आना बाकी है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह मुद्दा अमेरिकी संविधान की मूल भावना से जुड़ा हुआ है, इसलिए इसमें बदलाव करना आसान नहीं होगा।

वैश्विक और कूटनीतिक असर

ट्रम्प का यह बयान केवल घरेलू राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर भारत-अमेरिका और चीन-अमेरिका संबंधों पर भी पड़ सकता है। भारत जैसे देश, जहां से बड़ी संख्या में पेशेवर और छात्र अमेरिका जाते हैं, इस बयान को गंभीरता से देख सकते हैं।

TAGGED: Birthright Citizenship, China US, Donald Trump, Global Politics, India US Relations, Trump Statement, USA Immigration
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