लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। सुशांत गोल्फ सिटी इलाके के अहिमामऊ में पुलिस मुख्यालय में तैनात एक जांबाज एएसआई (ASI) सत्येंद्र वर्मा ने मौत को गले लगा लिया। शुक्रवार को उनका शव उनके किराए के कमरे में फंदे से लटकता मिला। कमरे की तलाशी के दौरान पुलिस को 4 पन्नों का एक सुसाइड नोट बरामद हुआ है, जिसमें उन्होंने अपनी मानसिक स्थिति और ‘जीने की इच्छा खत्म होने’ की बात लिखी है।
ममता का आरोप: ‘प्यार के नाम पर मिला धोखा और ब्लैकमेलिंग’
मृतक सत्येंद्र वर्मा के परिजनों ने इस मामले में गंभीर आरोप लगाए हैं। मां सुखरानी देवी के अनुसार, सत्येंद्र की पहचान करीब डेढ़ साल पहले इंस्टाग्राम के जरिए एक युवती से हुई थी, जो खुद को कवयित्री बताती है और सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय है। दोनों के बीच प्रेम संबंध थे और वे शादी करना चाहते थे।
परिजनों का दावा है कि युवती के पिता और भाई इस रिश्ते के खिलाफ थे। रिश्ता टूटने के बाद युवती ने सत्येंद्र को मानसिक रूप से प्रताड़ित करना शुरू कर दिया और कथित तौर पर रुपयों की मांग करने लगी। मां ने आरोप लगाया कि युवती और उसके परिजन सत्येंद्र को जान से मारने की धमकी भी दे रहे थे, जिससे वह गहरे तनाव में था।

कमरे का मंजर: जब दरवाजा तोड़ा गया
सत्येंद्र वर्मा मूल रूप से फतेहपुर के तामेश्वर नगर के निवासी थे। वह घर के इकलौते कमाने वाले सदस्य थे और 2023 में पुलिस विभाग में भर्ती हुए थे। पिछले दो दिनों से जब सत्येंद्र ने मां का फोन नहीं उठाया, तो चचेरे भाई देवेंद्र वर्मा उनके कमरे पर पहुंचे। कमरा अंदर से बंद था। पुलिस की मौजूदगी में जब दरवाजा तोड़ा गया, तो सत्येंद्र का शव फंदे से लटका मिला।
सुसाइड नोट: ‘मैं अब थक चुका हूँ’
पुलिस को मिले 4 पन्नों के सुसाइड नोट में सत्येंद्र ने किसी को सीधे तौर पर जिम्मेदार नहीं ठहराया है। उन्होंने लिखा है कि वह पिछले कुछ समय से किसी निजी बात को लेकर बहुत तनाव में थे और अब उनके अंदर जीने की कोई इच्छा शेष नहीं बची है। नोट में उन्होंने अपनी पुरानी मानसिक परेशानियों (2014 के समय की) का भी जिक्र किया है और परिवार से माफी मांगी है। हालांकि, पुलिस अब इस नोट की हैंडराइटिंग और कॉल डिटेल्स की गहनता से जांच कर रही है।
सियासी गलियारों में हलचल: कांग्रेस का सरकार पर हमला
इस घटना ने राजनीतिक रूप भी ले लिया है। यूपी कांग्रेस ने एक्स (Twitter) पर पोस्ट करते हुए भाजपा सरकार को घेरा है। कांग्रेस ने लिखा कि “खाकी के रक्षक ही अब असुरक्षित हैं।” पार्टी ने सवाल उठाया कि क्या यह मौत वर्क प्रेशर के कारण हुई है या सिस्टम की घुटन के कारण? कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार इवेंटबाजी में व्यस्त है और पुलिसकर्मियों के मानसिक स्वास्थ्य पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
पुलिस की कार्रवाई
सुशांत गोल्फ सिटी के इंस्पेक्टर राजीव रंजन उपाध्याय ने बताया कि मृतक की मां की तहरीर पर ‘आत्महत्या के लिए उकसाने’ (Abetment to Suicide) की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। जिस युवती पर आरोप लगे हैं, उसके सोशल मीडिया प्रोफाइल और सत्येंद्र के साथ हुई बातचीत के रिकॉर्ड्स खंगाले जा रहे हैं।
निष्कर्ष:
34 साल के एक होनहार अधिकारी का इस तरह चले जाना न केवल एक परिवार के लिए अपूरणीय क्षति है, बल्कि यह सोशल मीडिया पर बनने वाले रिश्तों के स्याह पक्ष को भी उजागर करता है। क्या सत्येंद्र सच में किसी बड़ी ब्लैकमेलिंग का शिकार थे या उनके तनाव की वजह कुछ और थी? पुलिस की जांच ही इस ‘सुसाइड मिस्ट्री’ से पर्दा उठाएगी।


