सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं, कांग्रेस को बड़ा झटका
मध्य प्रदेश: राज्यसभा चुनाव को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच कांग्रेस को शुक्रवार को बड़ा झटका लगा। सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने राज्यसभा चुनाव के लिए अपना नामांकन रद्द किए जाने को चुनौती दी थी।
सर्वोच्च अदालत ने स्पष्ट किया कि चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मामलों में सीधे रिट याचिका पर सुनवाई नहीं की जा सकती। अदालत ने कहा कि यदि उम्मीदवार को किसी फैसले पर आपत्ति है तो वह चुनाव याचिका दाखिल कर सकती हैं।
जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एएस चंदूरकर की पीठ ने संविधान के अनुच्छेद 329 का हवाला देते हुए कहा कि चुनावी प्रक्रिया में न्यायिक हस्तक्षेप सीमित है और ऐसे मामलों का समाधान चुनाव याचिका के माध्यम से ही किया जाना चाहिए।
‘इस बार वोट नहीं, सीट चोरी हुई’
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मीनाक्षी नटराजन ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में पहले वोट चोरी की बातें सुनाई देती थीं, लेकिन इस बार पूरी सीट ही चोरी कर ली गई।
दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने दावा किया कि उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला नहीं है, बल्कि केवल एक कानूनी नोटिस था जिसकी जानकारी चुनाव आयोग को उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों में पहले ही दी जा चुकी थी।
मीनाक्षी ने कहा कि नामांकन फॉर्म-26 में ऐसा कोई कॉलम ही नहीं था जिसमें निजी शिकायत (Private Complaint) का उल्लेख किया जा सके। इसके बावजूद उनके नामांकन को खारिज कर दिया गया।

क्या था पूरा विवाद?
मध्य प्रदेश की तीसरी राज्यसभा सीट के लिए कांग्रेस ने मीनाक्षी नटराजन को उम्मीदवार बनाया था। विधानसभा में कांग्रेस के पास पर्याप्त संख्या बल होने के कारण मुकाबला रोचक माना जा रहा था।
हालांकि 9 जून को भाजपा ने उनके नामांकन पर आपत्ति दर्ज कराई। आरोप लगाया गया कि मीनाक्षी ने अपने खिलाफ दर्ज एक मामले की जानकारी नामांकन पत्र में नहीं दी।
आपत्ति स्वीकार करते हुए रिटर्निंग अधिकारी अरविंद शर्मा ने उनका नामांकन निरस्त कर दिया। इसके बाद मामला सीधे सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।
लेकिन अदालत ने हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए चुनाव याचिका का रास्ता सुझाया।
तीनों सीटों पर भाजपा उम्मीदवार निर्विरोध विजयी
मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज होने के बाद मध्य प्रदेश की तीनों राज्यसभा सीटों पर भाजपा उम्मीदवारों का निर्विरोध निर्वाचन सुनिश्चित हो गया।
11 जून को भाजपा उम्मीदवार रजनीश अग्रवाल, तरुण चुग और महेश केवट को निर्वाचित घोषित कर प्रमाण पत्र सौंप दिए गए।
कांग्रेस का आरोप है कि यदि नामांकन स्वीकार किया जाता तो चुनाव होता और परिणाम अलग हो सकते थे।
दिल्ली में कांग्रेस का प्रदर्शन, पुलिस से झड़प
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कांग्रेस ने राष्ट्रीय स्तर पर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।
दिल्ली पहुंचे मध्य प्रदेश कांग्रेस के विधायक और वरिष्ठ नेता राष्ट्रपति भवन तक मार्च निकालने निकले। पुलिस ने बैरिकेडिंग कर उन्हें रोक दिया, जिसके बाद नेताओं और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक हुई।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और कई अन्य नेताओं को हिरासत में लिया गया। हालांकि कुछ समय बाद सभी को रिहा कर दिया गया।
जंतर-मंतर पर भी कांग्रेस समर्थक संगठनों ने धरना देकर चुनाव आयोग और भाजपा के खिलाफ नारेबाजी की।
उमंग सिंघार का आरोप- दबाव में लिया गया फैसला
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि रिटर्निंग अधिकारी ने दबाव में आकर नामांकन खारिज किया।
उन्होंने दावा किया कि जब अधिकारियों से फैसले का कारण पूछा गया तो उन्होंने कथित तौर पर कहा कि उन्हें अपनी नौकरी भी बचानी है।
सिंघार ने चुनाव आयोग पर भी गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में तथ्यात्मक रूप से गलत जानकारी प्रस्तुत की और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित किया।
भाजपा का पलटवार
दूसरी ओर भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया।
मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि कांग्रेस को पहले से पता था कि उसके विधायकों में क्रॉस वोटिंग हो सकती है, इसलिए जानबूझकर नामांकन में त्रुटियां छोड़ी गईं।
भाजपा नेता कृष्णा गौर ने कहा कि मीनाक्षी नटराजन की हार के लिए कांग्रेस के अंदरूनी नेता ही जिम्मेदार हैं।
अब आगे क्या होगा?
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार अब मीनाक्षी नटराजन के पास चुनाव याचिका दायर करने का विकल्प बचा है। यदि चुनाव याचिका में उन्हें राहत मिलती है तो मामला फिर से न्यायिक समीक्षा के दायरे में आ सकता है।
हालांकि फिलहाल राज्यसभा की तीनों सीटों पर भाजपा उम्मीदवारों का निर्वाचन वैध माना जाएगा।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह विवाद आने वाले दिनों में मध्य प्रदेश की राजनीति को और गर्मा सकता है।
निष्कर्ष
मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव का विवाद अब सिर्फ एक नामांकन रद्द होने तक सीमित नहीं रह गया है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कांग्रेस इसे लोकतंत्र और चुनावी पारदर्शिता का मुद्दा बना रही है, जबकि भाजपा इसे कांग्रेस की प्रशासनिक लापरवाही बता रही है। मीनाक्षी नटराजन की “सीट चोरी” वाली टिप्पणी ने इस विवाद को और अधिक राजनीतिक रंग दे दिया है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या कांग्रेस चुनाव याचिका दाखिल करेगी और इस लड़ाई को आगे बढ़ाएगी।

