LRN24LRN24
Notification Show More
Font ResizerAa
  • होम
  • राष्ट्रीय
  • अंतरराष्ट्रीय
  • राजनीति
  • अपराध
  • खेल
  • मनोरंजन
  • व्यापार
  • टेक्नोलॉजी
  • स्वास्थ्य
  • शिक्षा
Search News

Archives

  • August 2026
  • July 2026
  • June 2026
  • May 2026
  • April 2026
  • March 2026
  • February 2026
  • January 2026

Categories

  • AI
  • अजमेर
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अपराध
  • अयोध्या
  • अरुणाचल प्रदेश
  • अलीगढ़
  • असम
  • आगरा
  • आन्ध्र प्रदेश
  • उत्तर प्रदेश
  • उत्तराखंड
  • उन्नाव
  • ओडिशा
  • कर्नाटक
  • कानपुर
  • कार
  • केरल
  • कोलकाता
  • खेल
  • गाजियाबाद
  • गुजरात
  • गोंडा
  • चंडीगढ़
  • चेन्नई
  • जम्मू और कश्मीर
  • झारखंड
  • टेक्नोलॉजी
  • तथ्य
  • तमिलनाडु
  • तेलंगाना
  • दिल्ली
  • दौसा
  • धर्म
  • नोएडा
  • पंजाब
  • पश्चिम बंगाल
  • पुरी
  • प्रयागराज
  • बरेली
  • बिहार
  • बुलंदशहर
  • बेंगलुरु
  • भोपाल
  • मथुरा
  • मध्य प्रदेश
  • मनोरंजन
  • महाराष्ट्र
  • मेरठ
  • मौसम
  • राजनीति
  • राजस्थान
  • राज्य
  • राशिफल
  • राष्ट्रीय
  • रिजल्ट
  • लखनऊ
  • वायरल न्यूज़
  • वाराणसी ( बनारस )
  • व्यापार
  • शिक्षा
  • सरकारी योजनाएँ
  • सीकर
  • स्वास्थ्य
  • हरियाणा
  • हाथरस
  • हिमाचल प्रदेश
  • हैदराबाद
  • About Us
  • Contact Us
  • Privacy Policy
© LRN24 News Network
Reading: मां ने ठुकराया, खिलौने से लिपटकर जी रहा ‘पंच-कुन’: क्या बंदर भी इंसानों जैसी भावनाएं रखते हैं?
Share
Font ResizerAa
LRN24LRN24
  • होम
  • राष्ट्रीय
  • अंतरराष्ट्रीय
  • राजनीति
  • अपराध
  • खेल
  • मनोरंजन
  • व्यापार
  • टेक्नोलॉजी
  • स्वास्थ्य
  • शिक्षा
Search News
  • होम
  • राष्ट्रीय
  • अंतरराष्ट्रीय
  • राजनीति
  • अपराध
  • खेल
  • मनोरंजन
  • व्यापार
  • टेक्नोलॉजी
  • स्वास्थ्य
  • शिक्षा
Follow US
  • About Us
  • Contact Us
  • Privacy Policy
© LRN24 News Network

Home - अंतरराष्ट्रीय - मां ने ठुकराया, खिलौने से लिपटकर जी रहा ‘पंच-कुन’: क्या बंदर भी इंसानों जैसी भावनाएं रखते हैं?

मां ने ठुकराया, खिलौने से लिपटकर जी रहा ‘पंच-कुन’: क्या बंदर भी इंसानों जैसी भावनाएं रखते हैं?

Rajat Kumar
Last updated: 2026/02/22 at 2:44 PM
Rajat Kumar
Share
7 Min Read
इचिकावा सिटी जू में बेबी मकाक पंच-कुन अपने ओरांगुटान खिलौने से चिपका हुआ
मां द्वारा ठुकराए जाने के बाद पंच-कुन ओरांगुटान खिलौने से लगाव दिखाते हुए
SHARE

मां ने ठुकराया, खिलौने से लिपटकर जी रहा ‘पंच-कुन’: क्या बंदर भी इंसानों जैसी भावनाएं रखते हैं?

सोशल मीडिया: पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ। वीडियो में मकाक प्रजाति का एक छोटा बंदर कुछ खा रहा है। तभी एक बड़ा बंदर उसे पकड़कर जमीन पर घसीटता है और गोल-गोल घुमा देता है। छूटते ही वह नन्हा बंदर दौड़कर एक कोने में पड़े ऑरेंज रंग के ओरांगुटान खिलौने से लिपट जाता है — मानो वही उसकी मां हो।

Contents
मां ने ठुकराया, खिलौने से लिपटकर जी रहा ‘पंच-कुन’: क्या बंदर भी इंसानों जैसी भावनाएं रखते हैं?सवाल 1: पंच-कुन की कहानी क्या है?सवाल 2: पंच-कुन ने खिलौने को ही मां क्यों समझ लिया?अटैचमेंट थ्योरी क्या कहती है?ये भी पढ़ें: एक और भारतीय क्रिकेटर का तलाक, 22 की उम्र में शादी करने वाले राहुल चाहर पत्नी से अलग हुएसवाल 3: क्या बंदर सचमुच इंसानों जैसी भावनाएं रखते हैं?निष्पक्षता और सहानुभूति के प्रयोगसवाल 4: साथी बंदरों ने पंच-कुन को क्यों घायल किया?ये भी पढ़ें: मोदी ने मेरठ में मेट्रो-रैपिड रेल को दिखाई हरी झंडी: 82 किमी का सफर 55 मिनट में, बच्चों संग किया सफरसवाल 5: अब पंच-कुन की हालत कैसी है?मकाक बंदरों की खासियतनिष्कर्ष:

इस भावुक वीडियो का केंद्र है जापान के इचिकावा सिटी जू का बेबी मकाक, जिसका नाम है पंच-कुन। अब उसे देखने के लिए चिड़ियाघर में भीड़ उमड़ रही है। लोग उसे ‘ओरा-मां’ नाम के स्टफ्ड खिलौने से चिपके हुए देखते हैं और सवाल पूछते हैं — क्या बंदर भी इंसानों जैसी भावनाएं महसूस करते हैं?

आइए, इस पूरी कहानी और इसके पीछे छिपे वैज्ञानिक पहलुओं को विस्तार से समझते हैं।


सवाल 1: पंच-कुन की कहानी क्या है?

26 जुलाई 2025 को इचिकावा सिटी जू में करीब 6 महीने की गर्भवती एक मादा मकाक ने बच्चे को जन्म दिया। जन्म के समय उसका वजन लगभग 500 ग्राम था। उसका नाम रखा गया — पंच-कुन।

भीषण गर्मी और प्रसव की थकान के कारण मां बेहद कमजोर हो गई। उसने बच्चे की देखभाल नहीं की। मकाक बंदर समूह में रहते हैं, लेकिन किसी दूसरी मादा ने भी पंच-कुन को अपनाने की कोशिश नहीं की। अगले दिन से जू कर्मचारियों ने उसे बोतल से दूध पिलाना शुरू किया।

साइंस डायरेक्ट में प्रकाशित बंदर व्यवहार पर शोध करने वाले वैज्ञानिकों का कहना है कि मकाक मादाएं कभी-कभी जन्म के शुरुआती घंटों या दिनों में बच्चों को छोड़ देती हैं। यह दुर्लभ नहीं है।

कम उम्र की मादाएं अनुभव की कमी, प्रसव के तनाव या हार्मोनल बदलावों के कारण ऐसा व्यवहार दिखा सकती हैं। रीसस मकाक मादाओं में कॉर्टिसोल हार्मोन का स्तर तनाव की स्थिति में बढ़ जाता है, जिससे वे आक्रामक या उदासीन हो सकती हैं।

इचिकावा सिटी जू में बेबी मकाक पंच-कुन अपने ओरांगुटान खिलौने से चिपका हुआ
मां द्वारा ठुकराए जाने के बाद पंच-कुन ओरांगुटान खिलौने से लगाव दिखाते हुए

सवाल 2: पंच-कुन ने खिलौने को ही मां क्यों समझ लिया?

जब जू कर्मचारियों ने उसके सामने कंबल और कई खिलौने रखे, तो पंच-कुन ने एक मुलायम ओरांगुटान टॉय चुना। वह उससे चिपकने लगा। सोशल मीडिया पर लोग इसे ‘ओरा-मां’ कहने लगे।

वैज्ञानिक मानते हैं कि मां-बच्चे का रिश्ता केवल भोजन से नहीं, बल्कि ‘टच कम्फर्ट’ यानी स्पर्श से मिलने वाले सुकून से बनता है।

1958 में अमेरिकी वैज्ञानिक Harry Harlow ने अपने मशहूर ‘मंकी एक्सपेरिमेंट’ में यह साबित किया था। उन्होंने छोटे बंदरों को उनकी असली मां से अलग कर दिया और दो नकली मांएं दीं—एक तार की बनी, जिसमें दूध की बोतल लगी थी, और दूसरी मुलायम कपड़े की, जिसमें खाना नहीं था।

बंदरों ने अपना ज्यादातर समय मुलायम कपड़े वाली मां के साथ बिताया। वे दूध पीने के लिए तार वाली मां के पास जाते, लेकिन तुरंत वापस कपड़े वाली मां से चिपक जाते। डर लगने पर भी वे मुलायम मां के पास भागते।

इस प्रयोग ने साबित किया कि स्पर्श और भावनात्मक सुरक्षा भोजन से ज्यादा महत्वपूर्ण है।

मां द्वारा ठुकराए जाने के बाद पंच-कुन ओरांगुटान खिलौने से लगाव दिखाते हुए
मां द्वारा ठुकराए जाने के बाद पंच-कुन ओरांगुटान खिलौने से लगाव दिखाते हुए

अटैचमेंट थ्योरी क्या कहती है?

ब्रिटिश मनोचिकित्सक John Bowlby ने ‘अटैचमेंट थ्योरी’ दी। इसके अनुसार, बच्चे जन्म से ही देखभाल करने वाले के पास रहने के लिए प्रोग्राम्ड होते हैं। यह ‘सिक्योर बेस’ उन्हें मानसिक और सामाजिक विकास में मदद करता है।

पंच-कुन के मामले में खिलौना उसका ‘सिक्योर बेस’ बन गया। वह उसी से सुरक्षा और सुकून महसूस करता है।

मनोवैज्ञानिक इसे ‘कम्फर्ट ऑब्जेक्ट’ कहते हैं — ऐसी वस्तु जिससे बच्चा भावनात्मक जुड़ाव महसूस करता है। जैसे इंसानी बच्चों का पसंदीदा तकिया या कंबल।

ये भी पढ़ें: एक और भारतीय क्रिकेटर का तलाक, 22 की उम्र में शादी करने वाले राहुल चाहर पत्नी से अलग हुए


सवाल 3: क्या बंदर सचमुच इंसानों जैसी भावनाएं रखते हैं?

प्राइमेटोलॉजिस्ट Frans de Waal कहते हैं, “इंसानों की भावनाएं सिर्फ इंसानों की नहीं हैं। हमारी भावनाएं ज्यादा परिष्कृत हो चुकी हैं, लेकिन मूल रूप से वे बंदरों से अलग नहीं हैं।”

न्यूरोइमेजिंग स्टडीज बताती हैं कि बंदरों के दिमाग में भी वही हिस्से मौजूद हैं, जो इंसानों में भावनाएं नियंत्रित करते हैं — जैसे प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स, एंटीरियर सिंगुलेट कॉर्टेक्स और एमिग्डाला।

तनाव की स्थिति में बंदरों में भी कॉर्टिसोल बढ़ता है। दुख या डर की स्थिति में उनके व्यवहार और शारीरिक स्थिति में बदलाव दिखता है।

वैज्ञानिक Charles Darwin ने 1871 में लिखा था कि मादा बंदरों में बच्चे की मृत्यु के बाद शोक के स्पष्ट संकेत दिखते हैं। कई बार वे मृत शिशु को लंबे समय तक साथ लेकर चलती रहती हैं।

मां द्वारा ठुकराए जाने के बाद पंच-कुन ओरांगुटान खिलौने से लगाव दिखाते हुए
मां द्वारा ठुकराए जाने के बाद पंच-कुन ओरांगुटान खिलौने से लगाव दिखाते हुए

निष्पक्षता और सहानुभूति के प्रयोग

एक प्रयोग में कैपुचिन बंदर को खीरा दिया गया, जबकि उसके पड़ोसी को अंगूर। अंगूर देखकर उसने खीरा खाना बंद कर दिया — यह ‘फेयरनेस’ यानी निष्पक्षता की भावना का उदाहरण है।

एक अन्य प्रयोग में बंदरों को चेन खींचने पर खाना मिलता था, लेकिन उससे दूसरे बंदर को झटका लगता था। बंदरों ने खाना छोड़ दिया, लेकिन साथी को झटका नहीं लगने दिया।

ये उदाहरण दिखाते हैं कि बंदरों में सहानुभूति और सामाजिक समझ मौजूद है।


सवाल 4: साथी बंदरों ने पंच-कुन को क्यों घायल किया?

19 जनवरी 2026 को पंच-कुन को 60 मकाक बंदरों के झुंड में शामिल किया गया। वहां उसे परेशान किया गया। एक वयस्क मादा ने उसे घसीटा, क्योंकि वह उसके बच्चे के पास जा रहा था।

सामाजिक हायरार्की वाले समूहों में नए या अलग दिखने वाले सदस्य अक्सर निशाना बनते हैं। पंच-कुन का खिलौने से असामान्य लगाव उसे समूह में अलग बनाता था। वह सामाजिक संकेतों को पूरी तरह समझ नहीं पा रहा था, इसलिए आसान लक्ष्य बन गया।

ये भी पढ़ें: मोदी ने मेरठ में मेट्रो-रैपिड रेल को दिखाई हरी झंडी: 82 किमी का सफर 55 मिनट में, बच्चों संग किया सफर


सवाल 5: अब पंच-कुन की हालत कैसी है?

जू कर्मचारियों ने उसके लिए विशेष दिनचर्या बनाई है। जब भी कोई कर्मचारी बाड़े में जाता है, पंच-कुन उसके पैर से चिपक जाता है। धीरे-धीरे वह दूसरे बंदरों से बातचीत बढ़ा रहा है।

अधिकारियों का कहना है कि उसे समूह में सामान्य सामाजिक व्यवहार सिखाया जा रहा है। उम्मीद है कि वह धीरे-धीरे झुंड में घुल-मिल जाएगा।

मां द्वारा ठुकराए जाने के बाद पंच-कुन ओरांगुटान खिलौने से लगाव दिखाते हुए
मां द्वारा ठुकराए जाने के बाद पंच-कुन ओरांगुटान खिलौने से लगाव दिखाते हुए

मकाक बंदरों की खासियत

मकाक दुनिया के सबसे अनुकूलनशील बंदरों में गिने जाते हैं। वे सामाजिक समूहों में रहते हैं, जहां स्पष्ट पदक्रम होता है। एक नेता, उसके बाद मादाएं और फिर बच्चे।

वे एक-दूसरे के बाल साफ करते हैं — यह उनका सामाजिक बंधन मजबूत करने का तरीका है। भारत में आमतौर पर दिखने वाले रीसस मकाक भी इसी परिवार से हैं।


निष्कर्ष:

पंच-कुन की कहानी सिर्फ एक वायरल वीडियो नहीं, बल्कि भावनात्मक जुड़ाव और सामाजिक व्यवहार की गहरी वैज्ञानिक सच्चाई को उजागर करती है। मां के अभाव में एक खिलौना उसका सहारा बन गया — यह दर्शाता है कि स्पर्श और सुरक्षा की जरूरत सिर्फ इंसानों तक सीमित नहीं।

वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि बंदर भी दुख, डर, खुशी और लगाव महसूस करते हैं। हालांकि उनकी भावनाएं इंसानों जितनी जटिल नहीं, लेकिन मूल रूप से वे हमारी तरह ही भावनात्मक प्राणी हैं।

पंच-कुन की ‘ओरा-मां’ से लिपटी तस्वीर हमें याद दिलाती है कि भावनाएं प्रजातियों की सीमाओं से परे होती हैं।

TAGGED: अटैचमेंट थ्योरी, जापान जू, पंच-कुन, पशु व्यवहार, फ्रांस डी वाल, बंदरों की भावनाएं, मकाक बंदर, साइंस एक्सप्लेनर, हैरी हार्लो
Share This Article
Facebook Twitter Whatsapp Whatsapp Email Copy Link Print
What do you think?
Love0
Sad0
Happy0
Sleepy0
Angry0
Joy0
Dead0
Wink0
Rajat Kumar
By Rajat Kumar
Follow:
Lrn24 News Editor
Leave a comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Advertisments

क्रिकेट लाइव

Live Cricket Scores

ज्योतिष

आज का मौसम

Widget weather

सोने की कीमत

You Might Also Like

नेपाल में तबाही का सबसे खौफनाक आंकड़ा! 788 मौतें, 2500 से ज्यादा लापता; सुरंगों में फंसे लोगों के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन तेज
मौसमअंतरराष्ट्रीय

नेपाल में तबाही का सबसे खौफनाक आंकड़ा! 788 मौतें, 2500 से ज्यादा लापता; सुरंगों में फंसे लोगों के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन तेज

3 hours ago
नीरज चोपड़ा को बड़ा झटका! टखने का लिगामेंट फटा, एशियन गेम्स से बाहर; डायमंड लीग फाइनल भी नहीं खेलेंगे
खेलअंतरराष्ट्रीयदिल्लीराष्ट्रीयवायरल न्यूज़

नीरज चोपड़ा को बड़ा झटका! टखने का लिगामेंट फटा, एशियन गेम्स से बाहर; डायमंड लीग फाइनल भी नहीं खेलेंगे

14 hours ago
‘मुसलमानों को भारत से निकालना हिंदुत्व नहीं’, न्यूयॉर्क में मोहन भागवत का बड़ा बयान; बोले- धर्म अलग हो सकते हैं, मानवता एक
राष्ट्रीयअंतरराष्ट्रीयधर्मराजनीतिवायरल न्यूज़

‘मुसलमानों को भारत से निकालना हिंदुत्व नहीं’, न्यूयॉर्क में मोहन भागवत का बड़ा बयान; बोले- धर्म अलग हो सकते हैं, मानवता एक

14 hours ago
अंतरराष्ट्रीयराजनीतिराष्ट्रीयवायरल न्यूज़व्यापार

‘इतिहास की सबसे बड़ी तेल डील!’ ट्रंप का बड़ा दांव, वेनेजुएला के 65 अरब बैरल भंडार पर अमेरिका की नजर

2 days ago
Lrn24 logo Lrn24 logo

About US

LRN24 is a digital news platform committed to delivering fast, accurate, and unbiased news from India and around the world. Our goal is to keep our readers informed with verified facts, meaningful stories, and real-time updates that matter.

Important Pages
  • About Us
  • Contact Us
  • Privacy Policy
Usefull Links

Contact Address

Lrn24
(MSME UDYAM-UP-01-0000389)
E-162, Rambagh Agra,UP
MOB : +91-9058005498
Email : liverealnews24official@gmail.com

© 2024, LRN24.com | All Rights Reserved.

Follow US
© 2026 LRN24 News Network. All Rights Reserved.
  • About Us
  • Contact Us
  • Privacy Policy

WhatsApp us