अयोध्या: में भगवान रामलला के भव्य मंदिर को लेकर एक बार फिर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। इस बार विवाद मंदिर में आने वाले चढ़ावे की राशि को लेकर खड़ा हुआ है। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और पूर्व मंत्री पवन पांडेय द्वारा करोड़ों रुपये के चढ़ावे में कथित चोरी का दावा किए जाने के बाद भाजपा, संत समाज और मंदिर ट्रस्ट की ओर से तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।
विवाद की शुरुआत तब हुई जब पूर्व मंत्री पवन पांडेय ने दावा किया कि राम मंदिर के चढ़ावे में 5 करोड़ से लेकर 7.5 करोड़ रुपये तक की गड़बड़ी या चोरी हुई है। इसके बाद सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी सोशल मीडिया पर पोस्ट कर मामले की निष्पक्ष जांच और न्यायालय से स्वतः संज्ञान लेने की मांग कर दी। उन्होंने सरकार की चुप्पी को भी संदिग्ध बताया।
इन आरोपों के बाद राजनीतिक माहौल गर्म हो गया। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने अखिलेश यादव पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि उनकी सोच “बाबरवादी” है। उन्होंने कहा कि जो लोग कभी राम मंदिर निर्माण के पक्ष में नहीं रहे, वे अब मंदिर को लेकर झूठी अफवाहें फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। पाठक ने कहा कि सनातन संस्कृति के खिलाफ राजनीति करने वालों को जनता आने वाले समय में जवाब देगी।
वहीं यूपी भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी ने कहा कि अभी तक किसी प्रकार की चोरी या गड़बड़ी का कोई प्रमाण सामने नहीं आया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मामला मंदिर ट्रस्ट और प्रशासन का है, जिसका जवाब संबंधित संस्थाएं देंगी।

दूसरी ओर, ज्योतिष पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने भी इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया दी। आगरा में मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि “जब चोर को ही रक्षक बना दिया जाएगा तो परिणाम ऐसा ही होगा। पहले जमीनों के नाम पर खेल हुआ और अब सीधे दान पेटी तक हाथ पहुंच गया है।” उनके इस बयान ने विवाद को और अधिक राजनीतिक और धार्मिक रंग दे दिया।
हालांकि मंदिर ट्रस्ट ने आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने कहा कि मंदिर के चढ़ावे का नियमित ऑडिट होता है। इस प्रक्रिया में भारतीय स्टेट बैंक और ट्रस्ट के अधिकृत प्रतिनिधि शामिल रहते हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में भी ऑडिट की प्रक्रिया चल रही है और अभी तक किसी प्रकार की अनियमितता सामने नहीं आई है।
जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने भी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि रामलला के दर्शन किए बिना आरोप लगाने वाले लोग केवल राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि “जब रामलला के दर्शन करेंगे तो आरोप लगाना बंद कर देंगे।”
केंद्रीय मंत्री संजय निषाद ने भी विपक्ष को घेरते हुए कहा कि बिना तथ्यों के आरोप लगाना उचित नहीं है। वहीं मंत्री सुनील कुमार शर्मा ने अखिलेश यादव को “राम विरोधी” बताते हुए कहा कि उनकी राजनीति केवल भ्रम और विवाद पैदा करने पर आधारित है।
दूसरी ओर कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा कि अखिलेश यादव बिना आधार के बात नहीं करते। यदि उन्होंने आरोप लगाया है तो संभव है कि उनके पास कुछ तथ्य हों, जिनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
फिलहाल मंदिर ट्रस्ट द्वारा चोरी या गड़बड़ी की किसी भी बात से इनकार किया गया है। लेकिन विपक्ष के आरोप और भाजपा की प्रतिक्रियाओं ने इस मुद्दे को बड़ा राजनीतिक विवाद बना दिया है। आने वाले दिनों में यह मामला और अधिक तूल पकड़ सकता है, खासकर तब जब ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक होगी।
निष्कर्ष:
राम मंदिर के चढ़ावे को लेकर उठे आरोपों ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। एक ओर विपक्ष जांच की मांग कर रहा है तो दूसरी ओर मंदिर ट्रस्ट और भाजपा आरोपों को राजनीति से प्रेरित बता रहे हैं। सच्चाई क्या है, इसका जवाब आधिकारिक ऑडिट और जांच रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

