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Home - राज्य - जाति जनगणना 2027 पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, PIL खारिज; केंद्र को दिए अहम सुझावों पर विचार के निर्देश

जाति जनगणना 2027 पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, PIL खारिज; केंद्र को दिए अहम सुझावों पर विचार के निर्देश

Rajat Kumar
Last updated: 2026/02/02 at 5:57 PM
Rajat Kumar
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3 Min Read
जाति जनगणना 2027 पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, PIL खारिज; केंद्र को दिए अहम सुझावों पर विचार के निर्देश
जाति जनगणना 2027 पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, PIL खारिज; केंद्र को दिए अहम सुझावों पर विचार के निर्देश
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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने 2027 में होने वाली जाति आधारित जनगणना को लेकर दाखिल जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई से इनकार कर दिया है। यह याचिका नागरिकों की जाति दर्ज करने, उनके वर्गीकरण और सत्यापन की प्रक्रिया को चुनौती देती थी। हालांकि, शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार और भारत के रजिस्ट्रार जनरल एवं जनगणना आयुक्त के कार्यालय से याचिकाकर्ता द्वारा दिए गए सुझावों पर विचार करने को कहा है।

Contents
अदालत ने जताया भरोसाये भी पढ़ें: Budget 2026: कैंसर–डायबिटीज की दवाएं होंगी सस्ती, युवाओं पर बड़ा दांव; निर्मला सीतारमण के 6 संकल्पों से बदलेगा भारतPIL का निपटारा, केंद्र को दिए निर्देशयाचिका में क्या उठाए गए थे सवालनिष्कर्ष:

मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट किया कि फिलहाल जाति आंकड़ों की पहचान के लिए कोई पूर्व-निर्धारित या मानकीकृत डेटा मौजूद नहीं है। अदालत ने कहा कि जनगणना की पूरी प्रक्रिया जनगणना अधिनियम, 1958 और उसके तहत बने 1990 के नियमों के अनुसार संचालित की जाती है। इन नियमों के तहत संबंधित प्राधिकरणों को यह अधिकार प्राप्त है कि वे तय करें कि जनगणना किन बिंदुओं पर और किस तरीके से की जाएगी।

अदालत ने जताया भरोसा

सुप्रीम कोर्ट ने भरोसा जताया कि जनगणना से जुड़े अधिकारी और प्राधिकरण विषय विशेषज्ञों की सहायता से एक मजबूत और विश्वसनीय व्यवस्था विकसित करेंगे, जिससे आंकड़ों में किसी भी प्रकार की त्रुटि की संभावना न रहे। पीठ ने यह भी माना कि याचिकाकर्ता द्वारा उठाए गए कुछ मुद्दे प्रासंगिक हैं और उन्हें पहले ही रजिस्ट्रार जनरल के समक्ष रखा जा चुका है।

ये भी पढ़ें: Budget 2026: कैंसर–डायबिटीज की दवाएं होंगी सस्ती, युवाओं पर बड़ा दांव; निर्मला सीतारमण के 6 संकल्पों से बदलेगा भारत

PIL का निपटारा, केंद्र को दिए निर्देश

इन टिप्पणियों के साथ सुप्रीम कोर्ट ने जनहित याचिका का निपटारा कर दिया। अदालत ने केंद्र सरकार से कहा कि वह कानूनी नोटिस और याचिका में दिए गए सुझावों पर उचित विचार कर सकती है।

गौरतलब है कि वर्ष 2027 की जनगणना भारत की 16वीं राष्ट्रीय जनगणना होगी। यह 1931 के बाद पहली बार होगी, जब व्यापक स्तर पर जाति आधारित आंकड़े एकत्र किए जाएंगे। साथ ही, यह भारत की पहली पूरी तरह डिजिटल जनगणना भी होगी, जिससे आंकड़ों के संग्रह, सत्यापन और विश्लेषण की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है।

जाति जनगणना 2027 पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, PIL खारिज; केंद्र को दिए अहम सुझावों पर विचार के निर्देश
जाति जनगणना 2027 पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, PIL खारिज; केंद्र को दिए अहम सुझावों पर विचार के निर्देश

याचिका में क्या उठाए गए थे सवाल

यह याचिका शिक्षाविद आकाश गोयल द्वारा दायर की गई थी, जिनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुक्ता गुप्ता ने पक्ष रखा। याचिका में मांग की गई थी कि जाति संबंधी जानकारी दर्ज करने, वर्गीकरण और सत्यापन के लिए अपनाई जाने वाली प्रश्नावली को सार्वजनिक किया जाए, ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे।

याचिकाकर्ता का आरोप था कि जनगणना संचालन निदेशालय ने अब तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि नागरिकों की जाति पहचान दर्ज करने के लिए कौन-से मानदंड अपनाए जाएंगे, जबकि इस बार जाति गणना का दायरा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति से आगे बढ़ाया जा रहा है।


निष्कर्ष:

सुप्रीम कोर्ट ने जाति जनगणना 2027 की प्रक्रिया में फिलहाल न्यायिक हस्तक्षेप से इनकार करते हुए इसे कानूनी ढांचे के तहत संचालित करने का भरोसा जताया है। हालांकि, अदालत ने केंद्र सरकार को याचिकाकर्ता के सुझावों पर विचार करने का निर्देश देकर यह संकेत दिया है कि प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाने की गुंजाइश बनी हुई है।

TAGGED: Caste Census, Census 2027, Central Government, Digital Census, Indian Judiciary, PIL News, Registrar General of India, Supreme Court
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