TMC में मचा भूचाल! ममता बनर्जी को बड़ा झटका, करीबी नेता ज्योति प्रिय मल्लिक ने छोड़े सभी पद
पश्चिम बंगाल: की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल देखने को मिला है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर लंबे समय से चल रही असंतोष की लहर अब खुलकर सामने आने लगी है। शुक्रवार को पार्टी की वरिष्ठ और प्रभावशाली हस्ती रहे पूर्व मंत्री ज्योति प्रिय मल्लिक ने पार्टी के सभी संगठनात्मक पदों से इस्तीफा दे दिया। वहीं दूसरी ओर सिलीगुड़ी नगर निगम के मेयर गौतम देब ने भी अपने पद से इस्तीफा देकर राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2026 के विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव में भाजपा के हाथों मिली करारी हार के बाद TMC अपने सबसे कठिन दौर से गुजर रही है। लगातार हो रहे इस्तीफों ने पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है।
बीमारी का हवाला देकर मल्लिक ने छोड़ी जिम्मेदारी
ज्योति प्रिय मल्लिक ने अपने इस्तीफे में स्वास्थ्य कारणों का उल्लेख किया है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ महीनों से उनकी तबीयत लगातार खराब चल रही है। ब्लड शुगर का स्तर असामान्य रूप से बढ़ गया है और किडनी संबंधी गंभीर समस्याओं से भी वे जूझ रहे हैं।
मल्लिक ने कहा कि ऐसी स्थिति में संगठनात्मक जिम्मेदारियों का निर्वहन करना संभव नहीं है। जब कोई व्यक्ति अपनी जिम्मेदारियां सही ढंग से नहीं निभा सकता तो पद पर बने रहने का कोई औचित्य नहीं रह जाता।
हालांकि राजनीतिक जानकारों का मानना है कि केवल स्वास्थ्य कारण ही इस्तीफे की वजह नहीं हो सकते। क्योंकि कुछ ही दिन पहले ममता बनर्जी ने पार्टी में बड़े फेरबदल के दौरान उन्हें दोबारा वर्किंग कमेटी में शामिल किया था।
ममता के सबसे भरोसेमंद नेताओं में थे शामिल
ज्योति प्रिय मल्लिक लंबे समय तक ममता बनर्जी के बेहद करीबी नेताओं में गिने जाते रहे हैं। वे पांच बार विधायक चुने गए और उत्तर 24 परगना जिले में पार्टी के मजबूत स्तंभ माने जाते थे।
उन्होंने 2011 से 2021 तक राज्य के खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री के रूप में काम किया। इसके बाद उन्हें वन मंत्री की जिम्मेदारी भी सौंपी गई थी।
मल्लिक का राजनीतिक करियर उस समय विवादों में आ गया जब अक्टूबर 2023 में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कथित राशन वितरण घोटाले में उन्हें गिरफ्तार कर लिया। लगभग 15 महीने जेल में बिताने के बाद जनवरी 2025 में उन्हें जमानत मिली थी।

चुनावी हार ने बढ़ाई मुश्किलें
2026 विधानसभा चुनाव में मल्लिक को अपने राजनीतिक गढ़ हाबड़ा सीट पर करारी हार का सामना करना पड़ा। भाजपा उम्मीदवार देवदास मंडल ने उन्हें 31 हजार से अधिक वोटों के अंतर से हराया।
यह हार केवल एक सीट की हार नहीं मानी गई, बल्कि TMC के लिए बड़ा राजनीतिक झटका साबित हुई। इसके बावजूद ममता बनर्जी ने सार्वजनिक मंचों पर उनका बचाव किया था और उन्हें राजनीतिक साजिश का शिकार बताया था।
गौतम देब का इस्तीफा भी बना चर्चा का विषय
ज्योति प्रिय मल्लिक के इस्तीफे के कुछ ही समय बाद उत्तर बंगाल के वरिष्ठ TMC नेता और सिलीगुड़ी के मेयर गौतम देब ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
उन्होंने नगर निगम आयुक्त को अपना त्यागपत्र सौंपते हुए तत्काल प्रभाव से सरकारी वाहन और सुरक्षा व्यवस्था भी छोड़ दी। इससे साफ संकेत मिला कि उनका निर्णय पूरी तरह सोच-समझकर लिया गया है।
गौतम देब का इस्तीफा इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि वे उत्तर बंगाल में पार्टी के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे हैं।
इस्तीफों की लंबी होती सूची
राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद TMC के कई बड़े नेता अपने पदों से हट चुके हैं। इससे पहले कोलकाता के पूर्व मेयर फिरहाद हकीम, बिधाननगर की मेयर कृष्णा चक्रवर्ती और GTA प्रमुख अनित थापा भी अपने पदों से इस्तीफा दे चुके हैं।
लगातार हो रहे इन इस्तीफों ने पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर असंतोष और संगठनात्मक कमजोरी की चर्चाओं को और हवा दे दी है।
भाजपा को मिल सकता है राजनीतिक फायदा
विशेषज्ञों का मानना है कि TMC के भीतर बढ़ती अस्थिरता का सबसे बड़ा फायदा भाजपा को मिल सकता है। आगामी स्थानीय निकाय चुनावों और भविष्य के राजनीतिक समीकरणों में भाजपा इन घटनाओं को TMC की कमजोरी के रूप में जनता के सामने रख सकती है।
वहीं TMC नेतृत्व के सामने सबसे बड़ी चुनौती पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं का मनोबल बनाए रखने की होगी।
निष्कर्ष
ज्योति प्रिय मल्लिक और गौतम देब के इस्तीफे ने साफ संकेत दे दिया है कि तृणमूल कांग्रेस के भीतर सब कुछ सामान्य नहीं है। 2026 चुनावी झटकों के बाद पार्टी में बढ़ती नाराजगी अब खुलकर सामने आ रही है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि ममता बनर्जी इस संकट से पार्टी को कैसे बाहर निकालती हैं और क्या यह राजनीतिक उथल-पुथल TMC के भविष्य को प्रभावित करेगी।

