आगरा: बढ़ते तापमान, बार-बार आने वाली आंधियां, हीटवेव और मौसम के बदलते स्वरूप को लेकर आगरा के प्रसिद्ध पर्यावरण कार्यकर्ता एवं ‘ट्री मैन’ के नाम से पहचान रखने वाले Trimohan Mishra ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जंगलों की अंधाधुंध कटाई नहीं रोकी गई तो आने वाले वर्षों में प्राकृतिक आपदाओं की तीव्रता और अधिक बढ़ सकती है।
31 मई 2026 को Red Fort पर आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में अपनी टीम के साथ पहुंचे त्रिमोहन मिश्रा ने कहा कि इंसान विकास की दौड़ में प्रकृति के उन सुरक्षा कवचों को नष्ट कर रहा है जो सदियों से पृथ्वी की रक्षा करते आए हैं। उनके अनुसार घने जंगल और विशाल पेड़ प्राकृतिक “विंडब्रेक” यानी हवा की गति को नियंत्रित करने वाली दीवार की तरह काम करते थे, लेकिन लगातार कटाई के कारण यह प्राकृतिक सुरक्षा तंत्र कमजोर हो गया है।

जंगलों के खत्म होने से बढ़ रहा मौसम का प्रकोप
त्रिमोहन मिश्रा ने कहा कि पहले घने वन क्षेत्रों के कारण तेज हवाओं की रफ्तार नियंत्रित रहती थी। पेड़ हवा की ऊर्जा को कम कर देते थे, जिससे बड़े स्तर की तबाही से बचाव होता था। लेकिन अब जब जंगल तेजी से खत्म हो रहे हैं, तो सामान्य हवाएं भी बवंडर और विनाशकारी आंधियों का रूप लेने लगी हैं।
उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में देश के विभिन्न हिस्सों में तेज आंधी, धूल भरी हवाओं और असामान्य मौसम की घटनाओं में वृद्धि देखी गई है। इसके पीछे जलवायु परिवर्तन के साथ-साथ जंगलों की कटाई भी एक प्रमुख कारण है।

केवल पेड़ काटना ही नहीं, चुप रहना भी अपराध
पर्यावरण कार्यकर्ता ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं होना चाहिए। उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि पेड़ों की कटाई पर चुप रहना, पौधारोपण न करना और केवल दिखावटी हरियाली अभियान चलाना भी पर्यावरण के प्रति अपराध के समान है।
उन्होंने कहा कि यदि समाज सचमुच पृथ्वी को बचाना चाहता है तो प्रत्येक व्यक्ति को अपने स्तर पर जिम्मेदारी निभानी होगी। जन्मदिन, विवाह, वर्षगांठ या किसी भी यादगार अवसर पर पौधे लगाने और उनकी देखभाल करने का संकल्प लेना चाहिए।

हीटवेव और कंक्रीट के जंगलों पर जताई चिंता
त्रिमोहन मिश्रा ने बढ़ती गर्मी और हीटवेव के लिए तेजी से फैलते कंक्रीट के जंगलों को भी जिम्मेदार ठहराया। उनका कहना है कि शहरों में पेड़ों की संख्या घट रही है जबकि सीमेंट और कंक्रीट के निर्माण लगातार बढ़ रहे हैं। इससे स्थानीय तापमान बढ़ता है और गर्मी का प्रभाव अधिक महसूस होता है।
विशेषज्ञ भी मानते हैं कि शहरी क्षेत्रों में हरित क्षेत्र कम होने से “अर्बन हीट आइलैंड” प्रभाव बढ़ता है, जिससे तापमान आसपास के ग्रामीण इलाकों की तुलना में अधिक हो जाता है।

पर्यावरण संरक्षण को सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ा
ट्री मैन ने पर्यावरण संरक्षण को केवल पेड़ लगाने तक सीमित न रखते हुए स्वच्छता, जल संरक्षण और सामाजिक सेवा से भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि नदियों की सफाई, पशु-पक्षियों के लिए भोजन और पानी की व्यवस्था, स्वच्छ वातावरण, निःशुल्क शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं जैसी गतिविधियां भी पर्यावरण संरक्षण की व्यापक अवधारणा का हिस्सा हैं।
उनका मानना है कि स्वस्थ समाज और स्वस्थ पर्यावरण एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। यदि प्रकृति सुरक्षित रहेगी तो मानव जीवन भी सुरक्षित रहेगा।

‘पहले पृथ्वी बचाओ, मंगल ग्रह नहीं’
कार्यक्रम के दौरान त्रिमोहन मिश्रा ने अपने अभियान “Tree Man – The Power of Earth” के माध्यम से लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक किया। उन्होंने एक भावनात्मक संदेश देते हुए कहा, “पहले पृथ्वी बचाओ, मंगल ग्रह नहीं।”
उन्होंने कहा कि जब तक पृथ्वी पर जीवन सुरक्षित नहीं होगा, तब तक दूसरे ग्रहों पर जीवन खोजने की चर्चा अधूरी रहेगी। वर्तमान समय की सबसे बड़ी जरूरत पृथ्वी के प्राकृतिक संसाधनों, जंगलों, जल स्रोतों और जैव विविधता को बचाना है।
कार्यक्रम में पर्यावरण जागरूकता के लिए कई सामाजिक कार्यकर्ता और स्वयंसेवक भी शामिल हुए। इस दौरान पौधों और ऑक्सीजन मास्क के माध्यम से लोगों को पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया।
निष्कर्ष
आगरा के ट्री मैन त्रिमोहन मिश्रा की चेतावनी केवल एक पर्यावरणीय संदेश नहीं बल्कि भविष्य के लिए एक गंभीर संकेत है। जंगलों की कटाई, बढ़ते कंक्रीट के ढांचे और घटते हरित क्षेत्र जलवायु परिवर्तन को और खतरनाक बना रहे हैं। यदि समय रहते व्यापक स्तर पर पौधारोपण, जंगल संरक्षण और पर्यावरणीय जागरूकता को प्राथमिकता नहीं दी गई, तो आने वाली पीढ़ियों को इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

