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Reading: ‘गाय को भी नहीं बख्शा तो जनता को क्या छोड़ेंगे!’ शंकराचार्य का CM योगी पर बड़ा हमला, बोले- सत्ता में रहने का अधिकार नहीं
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Home - राज्य - ‘गाय को भी नहीं बख्शा तो जनता को क्या छोड़ेंगे!’ शंकराचार्य का CM योगी पर बड़ा हमला, बोले- सत्ता में रहने का अधिकार नहीं

‘गाय को भी नहीं बख्शा तो जनता को क्या छोड़ेंगे!’ शंकराचार्य का CM योगी पर बड़ा हमला, बोले- सत्ता में रहने का अधिकार नहीं

Rajat Kumar
Last updated: 2026/06/08 at 4:27 PM
Rajat Kumar
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3 Min Read
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उत्तर प्रदेश: की राजनीति में उस समय नई बहस छिड़ गई जब ज्योतिष पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने आगरा में आयोजित गो-रक्षार्थ धर्मयुद्ध यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जो सरकार गाय को राष्ट्रमाता का दर्जा नहीं दे सकती और गोवध रोकने में सफल नहीं हो सकती, उसे सत्ता में रहने का कोई अधिकार नहीं है।

रविवार को आगरा के धाकरान चौराहे पर आयोजित धर्मसभा में पहुंचे शंकराचार्य ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गाय के नाम पर सत्ता में आए थे, लेकिन आज जब गाय को राष्ट्रमाता घोषित करने की मांग उठ रही है तो सरकार इससे पीछे हटती दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि आर्थिक लाभ और अपने धंधे के लिए अगर गाय को भी नहीं बख्शा गया तो आम जनता को क्या छोड़ा जाएगा।

शंकराचार्य ने कहा कि सभी मुख्यमंत्री और राजनीतिक नेता शंकराचार्यों का सम्मान करते हैं। उन्होंने यहां तक कहा कि मुगल और अंग्रेज शासकों ने भी कभी शंकराचार्यों का अपमान नहीं किया, लेकिन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अहंकार में चूर दिखाई देते हैं।

धर्मसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि वह सामान्यतः बिना निमंत्रण कहीं नहीं जाते, लेकिन गोमाता की रक्षा और राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाने के लिए उन्हें गांव-गांव और गली-गली जाना पड़ रहा है। उनका उद्देश्य हिंदू समाज को जागरूक करना और गोसंरक्षण के महत्व को समझाना है।

उन्होंने कहा कि गाय केवल दूध देने वाला पशु नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति और कृषि व्यवस्था की आधारशिला रही है। किसान और गाय का रिश्ता सदियों पुराना है। भारतीय किसान की ताकत गाय और उसके बछड़ों से जुड़ी रही है, जिन्होंने खेतों में हल खींचकर देश का पेट भरा है।

सभा के दौरान शंकराचार्य को प्रतीकात्मक रूप से हल भेंट किया गया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि हल भारतीय किसान की पहचान और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। उन्होंने उपस्थित लोगों को गोमाता की रक्षा और राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाने के लिए संकल्प भी दिलाया।

राजनीतिक संदर्भ में बोलते हुए शंकराचार्य ने कहा कि आगामी चुनावों में जनता को नेताओं की परीक्षा लेनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि अब तक केवल महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने गोमाता को राष्ट्रमाता का दर्जा देने के समर्थन में स्पष्ट रुख अपनाया है। बाकी नेताओं को भी इस मुद्दे पर अपना दृष्टिकोण स्पष्ट करना चाहिए।

इस कार्यक्रम में एक दिलचस्प पहलू तब सामने आया जब भारतीय मुस्लिम विकास परिषद ने भी गो-रक्षार्थ धर्मयुद्ध यात्रा का समर्थन किया। परिषद के राष्ट्रीय महासचिव सैयद इरफान अहमद सलीम ने शंकराचार्य को समर्थन पत्र सौंपते हुए कहा कि गाय करोड़ों हिंदुओं की आस्था का केंद्र है और मुस्लिम समाज भी उसके सम्मान के पक्ष में है।

उन्होंने कहा कि गाय को राष्ट्रमाता घोषित करने की मांग केवल किसी एक समुदाय की मांग नहीं है, बल्कि यह सामाजिक और सांस्कृतिक सम्मान से जुड़ा विषय है। इस बयान के बाद कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने तालियों के साथ समर्थन जताया।

धर्मसभा में दिनेश पचौरी, सुरेश पचौरी, आशीष बल्लभ पचौरी, आदित्य, आयुष, मनीष धाकड़, नवीन शर्मा और अन्य बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे।

शंकराचार्य के इस बयान के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि गोमाता और धार्मिक मुद्दों को लेकर आने वाले दिनों में राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो सकती है।

निष्कर्ष:

आगरा में आयोजित गो-रक्षार्थ धर्मयुद्ध यात्रा के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर तीखा हमला बोलते हुए गोमाता को राष्ट्रमाता घोषित करने की मांग दोहराई। उनके बयान ने धार्मिक और राजनीतिक दोनों क्षेत्रों में नई बहस को जन्म दे दिया है। आने वाले समय में यह मुद्दा प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

TAGGED: Avimukteshwaranand Saraswati, CM Yogi News, Cow National Mother Demand, Go Raksha Dharmyudh Yatra, Shankaracharya Statement, UP Politics News
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