Sudan Gold Mine Collapse: सूडान से एक बेहद दर्दनाक हादसे की खबर सामने आई है। पश्चिमी कोर्डोफान इलाके में स्थित एक सोने की खदान में सुरंगों के अचानक ढह जाने से बड़ी संख्या में खनिक मलबे के नीचे दब गए। हादसा अल-ज़ारा गोल्ड माइन, अल-नुहुद के पास हुआ, जहां कई छोटी-बड़ी खनन सुरंगें आपस में जुड़ी हुई थीं। सुरंगों के ढहने के बाद घटनास्थल पर अफरा-तफरी मच गई और स्थानीय लोग अपने स्तर पर फंसे हुए लोगों को निकालने में जुट गए।
खदान में कैसे हुआ बड़ा हादसा?
रिपोर्टों के अनुसार, खदान की एक सुरंग के ढहने के बाद आसपास की दूसरी आपस में जुड़ी सुरंगें भी इसकी चपेट में आ गईं। इस वजह से खदान का एक बड़ा हिस्सा मलबे में तब्दील हो गया। वहां काम कर रहे कई खनिक अचानक जमीन के नीचे फंस गए।
घटना के बाद राहत और बचाव अभियान शुरू किया गया, लेकिन चुनौती यह थी कि घटनास्थल दूरदराज के इलाके में था और भारी मशीनरी की उपलब्धता बेहद सीमित थी। कुछ बचे हुए खनिकों और स्थानीय लोगों ने सामान्य खनन उपकरणों की मदद से मलबा हटाकर लोगों को खोजने की कोशिश की।
मौतों के आंकड़े को लेकर अलग-अलग रिपोर्ट
इस हादसे में मृतकों की संख्या को लेकर अलग-अलग स्रोतों से अलग आंकड़े सामने आए हैं। Associated Press ने स्थानीय अधिकारियों और कार्यकर्ताओं के हवाले से कम से कम 82 शव बरामद होने की जानकारी दी, जबकि Sudan Doctors Network ने शुरुआती चरण में 67 शव मिलने की बात कही थी। Kordofan Observatory ने भी बड़ी संख्या में खनिकों के मारे जाने या लापता होने की जानकारी दी।
इसी वजह से हादसे में वास्तविक मृतकों की संख्या को लेकर अंतिम आंकड़ा स्पष्ट नहीं माना जा रहा है। राहत और बचाव अभियान जारी रहने के दौरान मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका भी जताई गई थी।

मलबे में अब भी फंसे लोगों की तलाश
हादसे के बाद सबसे बड़ी चिंता उन खनिकों को लेकर थी, जिनका अभी तक पता नहीं चल पाया था। प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, कुछ लोग मलबे के काफी नीचे फंसे हो सकते हैं।
बचाव अभियान में सबसे बड़ी परेशानी भारी उपकरणों की कमी रही। एक स्थानीय अधिकारी के मुताबिक, मलबे को हटाने के लिए उपलब्ध मशीनरी बहुत सीमित थी। एक survivor ने बताया कि कई जगहों पर 30 मीटर से ज्यादा गहराई तक मलबा मौजूद था, जिसे हटाना बिना भारी मशीनरी के बेहद मुश्किल था।
स्थानीय लोगों और साथी खनिकों ने रातभर खुदाई कर फंसे लोगों तक पहुंचने की कोशिश की। लेकिन ढीली और रेतीली जमीन के कारण बचाव अभियान के दौरान अतिरिक्त खतरा भी बना रहा।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
इस हादसे ने सूडान में छोटे और अनौपचारिक खनन कार्यों में सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, अल-ज़ारा जैसी कई खदानों में पर्याप्त सुरक्षा और बचाव उपकरण उपलब्ध नहीं होते।
Sudan Doctors Network ने भी हादसे के बाद खनन क्षेत्रों में सुरक्षा उपायों और बचाव संसाधनों की कमी को लेकर चिंता जताई थी। संगठन ने अनियमित खनन गतिविधियों को रोकने और खनिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जरूरत पर जोर दिया।
सूडान में खतरनाक है छोटे पैमाने का खनन
सूडान अफ्रीका के प्रमुख सोना उत्पादक देशों में शामिल है। देश में बड़ी संख्या में लोग छोटे स्तर के यानी artisanal mining पर निर्भर हैं। यह काम कई परिवारों के लिए रोजी-रोटी का साधन है, लेकिन पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने पर इसमें जान का खतरा भी बना रहता है।
रॉयटर्स के अनुसार, सूडान के बड़े हिस्से में सोने का उत्पादन छोटे और अपेक्षाकृत अनौपचारिक खनन से होता है। पश्चिमी कोर्डोफान जैसे इलाकों में चल रहा संघर्ष और कमजोर प्रशासनिक निगरानी इस समस्या को और जटिल बनाते हैं।
युद्ध के बीच सोने का कारोबार
सूडान अप्रैल 2023 से सेना और अर्धसैनिक बल Rapid Support Forces (RSF) के बीच संघर्ष से जूझ रहा है। पश्चिमी कोर्डोफान का यह क्षेत्र RSF के नियंत्रण में बताया गया है।
सोना सूडान की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और युद्ध के दौरान इसके कारोबार को लेकर भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता जताई गई है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा नियुक्त विशेषज्ञों के हवाले से AP ने बताया कि सूडान के सोने का बड़ा हिस्सा देश से बाहर तस्करी के जरिए जाने और संघर्षरत पक्षों की वित्तीय व्यवस्था से जुड़ने की रिपोर्टें रही हैं।
एक हफ्ते में दूसरा बड़ा खदान हादसा
सूडान में इसी दौरान एक और खदान हादसे की खबर सामने आई। 20 सितंबर को पूर्वोत्तर सूडान के रेड सी स्टेट में एक गोल्ड माइन शाफ्ट ढहने से कम से कम 11 लोगों की मौत और 30 लोगों के घायल होने की सूचना मिली। वहां भी मलबे के नीचे फंसे लोगों की तलाश जारी थी। AP के मुताबिक, यह एक सप्ताह के भीतर सूडान में दूसरा बड़ा अनौपचारिक गोल्ड माइन हादसा था।
लगातार सामने आ रहे इन हादसों ने देश में अनौपचारिक खनन स्थलों पर सुरक्षा मानकों और निगरानी को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
रेस्क्यू ऑपरेशन के सामने सबसे बड़ी चुनौती
अल-ज़ारा हादसे में सबसे बड़ी चुनौती मलबे की मात्रा और भारी मशीनरी की कमी रही। स्थानीय लोग और साथी खनिक अपनी उपलब्ध क्षमता के अनुसार बचाव कार्य में जुटे रहे, लेकिन बड़े पैमाने पर ढही सुरंगों को सुरक्षित तरीके से हटाना विशेषज्ञ उपकरणों के बिना बेहद कठिन है।
जिन लोगों के परिजन अब भी लापता हैं, उनके लिए हर गुजरता घंटा उम्मीद और चिंता दोनों बढ़ा रहा है। बचाव अभियान में मलबे को हटाने के साथ-साथ यह भी चुनौती है कि ढही हुई सुरंगों के कारण आगे कोई और हादसा न हो।

