नई दिल्ली: रात के आसमान में दिखाई देने वाले सितारों को देखकर अक्सर लगता है कि ब्रह्मांड में हमारी पृथ्वी जैसे ही ग्रह होंगे। लेकिन जैसे-जैसे वैज्ञानिक दूर की दुनिया यानी Exoplanets की खोज कर रहे हैं, तस्वीर बिल्कुल अलग सामने आ रही है। हमारी सौर व्यवस्था से बाहर ऐसे ग्रह मिले हैं जिनकी परिस्थितियां विज्ञान-कथा जैसी लगती हैं—कहीं चट्टानों से बनी धूल और बेहद तेज हवाएं हैं, कहीं पूरी सतह लावा के महासागर जैसी हो सकती है और कहीं ग्रह का घनत्व इतना कम है कि वैज्ञानिक उसकी तुलना ‘मार्शमैलो’ से करते हैं। NASA के मुताबिक 2026 तक 6,000 से ज्यादा एक्सोप्लैनेट की पुष्टि हो चुकी है।
आखिर क्या होते हैं Exoplanets?
Exoplanet ऐसे ग्रहों को कहा जाता है जो हमारे सूर्य के बजाय किसी दूसरे तारे की परिक्रमा करते हैं। वैज्ञानिकों ने इन ग्रहों को खोजने के लिए कई तकनीकों का इस्तेमाल किया है। इनमें Transit Method और Gravitational Microlensing जैसी तकनीकें शामिल हैं।
जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप, हबल और अन्य आधुनिक वेधशालाओं ने वैज्ञानिकों को इन दूर की दुनियाओं के वातावरण और उनके आकार-प्रकार को समझने में महत्वपूर्ण मदद दी है। NASA का कहना है कि इन खोजों ने ग्रहों की विविधता को समझने के तरीके को काफी विस्तृत किया है।
1. ऐसा ग्रह जहां होती है ‘कांच की बारिश’
ब्रह्मांड के सबसे रहस्यमय ग्रहों में HD 189733b का नाम अक्सर लिया जाता है। यह ग्रह अपनी नीली दिखाई देने वाली उपस्थिति के कारण पहली नजर में बेहद खूबसूरत लग सकता है, लेकिन इसकी वास्तविक परिस्थितियां बेहद खतरनाक हैं।
इस ग्रह का वातावरण सिलिकेट यानी चट्टानी पदार्थों से जुड़ा है। अत्यधिक तापमान के कारण इन पदार्थों से कांच जैसे कण बनने की परिस्थितियां पैदा हो सकती हैं। इसकी तेज हवाओं के कारण ये गर्म सिलिकेट कण बेहद तेज गति से वातावरण में घूम सकते हैं। वैज्ञानिकों ने इसी वजह से इसे ‘ग्लास रेन’ वाली दुनिया के रूप में लोकप्रिय बनाया है।
यहां की परिस्थितियां पृथ्वी से बिल्कुल अलग हैं और यह उदाहरण दिखाता है कि दूसरे तारों के आसपास बनने वाले ग्रह कितने अलग हो सकते हैं।
2. ‘मार्शमैलो प्लैनेट’ ने वैज्ञानिकों को चौंकाया
अब आते हैं उस ग्रह पर जिसे सुनकर ही सवाल उठता है—क्या कोई ग्रह सच में मार्शमैलो जैसा हो सकता है?
WASP-193b को बेहद कम घनत्व वाले गैस दानव के रूप में जाना जाता है। इसका आकार बृहस्पति से काफी बड़ा है, लेकिन इसका द्रव्यमान उसके मुकाबले बेहद कम है। इसी असामान्य संयोजन के कारण वैज्ञानिकों ने इसकी तुलना एक बेहद फूले हुए, हल्के ‘मार्शमैलो’ से की।
दरअसल यह कोई ठोस मार्शमैलो नहीं है। यह नाम इसकी असाधारण कम density को समझाने के लिए एक उपमा है। ग्रह का विस्तारित वातावरण मुख्य रूप से हल्की गैसों से जुड़ा है और इसके निर्माण व वातावरण को लेकर वैज्ञानिक अभी भी सवालों का अध्ययन कर रहे हैं।

3. कुछ ग्रहों का आकार ही बदल जाता है
कुछ एक्सोप्लैनेट अपने तारे के इतने करीब होते हैं कि उनके ऊपर जबरदस्त गुरुत्वाकर्षण बल काम करता है। WASP-103b इसका चर्चित उदाहरण है।
वैज्ञानिकों के मुताबिक इसके तारे का गुरुत्वाकर्षण ग्रह को पूरी तरह गोल आकार में रहने के बजाय कुछ हद तक खिंचे हुए रूप में बदल सकता है। इसे अक्सर नींबू या फुटबॉल जैसे आकार से समझाया जाता है।
NASA के Hubble से जुड़ी जानकारी भी बताती है कि कुछ दूर की दुनिया हमारे सौरमंडल में मौजूद किसी भी ग्रह से बेहद अलग आकार और वातावरण दिखा सकती हैं।
4. लावा से भरी दुनिया
कुछ ग्रहों पर तापमान इतना अधिक हो सकता है कि चट्टानें तक पिघलने की स्थिति में पहुंच जाएं। इन्हें आमतौर पर Lava Worlds कहा जाता है।
NASA के जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप ने TOI-561 b जैसे अत्यधिक गर्म चट्टानी ग्रहों का अध्ययन किया है। NASA के अनुसार इसके बारे में किए गए अवलोकनों से एक संभावित मोटे वातावरण और वैश्विक magma ocean यानी पिघली हुई चट्टान के महासागर के संकेत मिले हैं।
इस तरह की दुनिया पृथ्वी से बिल्कुल अलग है, जहां चट्टानें सामान्य तापमान पर ठोस अवस्था में रहती हैं। इन ग्रहों का अध्ययन वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद करता है कि अत्यधिक गर्म वातावरण में चट्टानी ग्रह किस तरह विकसित हो सकते हैं।
5. तारे के बिना भटकते हैं Rogue Planets
ब्रह्मांड की सबसे रहस्यमय श्रेणियों में Rogue Planets भी शामिल हैं। ये ऐसे ग्रह हैं जो किसी तारे की परिक्रमा नहीं करते बल्कि अंतरिक्ष में स्वतंत्र रूप से घूम सकते हैं।
सितारे से मिलने वाली रोशनी और गर्मी के बिना इन ग्रहों की परिस्थितियां बेहद अलग हो सकती हैं। वैज्ञानिक यह भी अध्ययन कर रहे हैं कि क्या ऐसे ग्रहों के साथ मौजूद किसी चंद्रमा पर जीवन के लिए उपयुक्त परिस्थितियां संभव हो सकती हैं। सितंबर 2026 की National Geographic रिपोर्ट ने भी Rogue Planets को लेकर वैज्ञानिकों के इसी सवाल को प्रमुखता दी है।
इन ग्रहों को खोजना भी आसान नहीं है, क्योंकि अधिकांश एक्सोप्लैनेट खोजने वाली तकनीकें किसी तारे पर उनके प्रभाव को देखती हैं। Rogue Planet के पास अपना कोई तारा नहीं होता, इसलिए ऐसे ग्रहों को पहचानना और भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
6. अंतरिक्ष में अंधेरी और बेहद गर्म दुनियाएं
कुछ एक्सोप्लैनेट इतने कम प्रकाश को वापस प्रतिबिंबित करते हैं कि वे लगभग काले दिखाई दे सकते हैं। वहीं कुछ गैस दानव अपने तारों के बेहद करीब होने के कारण हजारों डिग्री तक गर्म हो जाते हैं।
NASA के Hubble ने ऐसे कई असामान्य संसारों का अध्ययन किया है। NASA के अनुसार Hubble की मदद से वैज्ञानिकों ने फुटबॉल जैसे आकार वाले ग्रह, अंतरिक्ष में अपना वातावरण खोते ग्रह और बेहद गहरे रंग वाली दुनियाओं का अध्ययन किया है।
इन अजीब ग्रहों की खोज क्यों जरूरी है?
इन ग्रहों की खोज सिर्फ इसलिए महत्वपूर्ण नहीं है कि वे बेहद अजीब हैं। इनके जरिए वैज्ञानिक यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि ग्रह बनते कैसे हैं, उनका वातावरण किस तरह विकसित होता है और अलग-अलग तारों के आसपास ग्रहों की परिस्थितियां कितनी विविध हो सकती हैं।
हमारे सौरमंडल में पृथ्वी, मंगल, बृहस्पति और नेपच्यून जैसे ग्रह एक निश्चित व्यवस्था दिखाते हैं। लेकिन दूसरे तारों के आसपास मिले एक्सोप्लैनेट बताते हैं कि ग्रह निर्माण के लिए इससे कहीं ज्यादा संभावनाएं मौजूद हैं। NASA भी एक्सोप्लैनेट के अध्ययन को भविष्य में संभावित रहने योग्य दुनियाओं की खोज से जोड़ता है।
आगे क्या खोज सकते हैं वैज्ञानिक?
जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप और आने वाली नई अंतरिक्ष वेधशालाएं दूर के ग्रहों के वातावरण को और अधिक बारीकी से देखने में मदद करेंगी। वैज्ञानिक खास तौर पर उन ग्रहों की तलाश कर रहे हैं जहां वातावरण में ऐसे रासायनिक संकेत मिल सकें जो जीवन की संभावनाओं के बारे में जानकारी दे सकें।
लेकिन किसी ग्रह को पृथ्वी जैसा या रहने योग्य घोषित करना बेहद जटिल प्रक्रिया है। केवल पानी या किसी एक गैस के संकेत से जीवन की पुष्टि नहीं होती। इसके लिए कई स्वतंत्र प्रमाण और लंबे समय तक अध्ययन जरूरी होगा।

