नई दिल्ली। फ्लाईदुबई की उड़ान में भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार पर हुए हमले की कहानी जितनी खौफनाक है, उतनी ही हैरान करने वाली उनकी जिंदगी बचाने की जद्दोजहद भी है। 30 सितंबर को दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाइट FZ1073 में को-पायलट ने कथित तौर पर कॉकपिट के भीतर कैप्टन मच्छार पर हमला कर दिया था। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद कैप्टन ने विमान को बचाने और यात्रियों की जान सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसी दौरान विमान में मौजूद एक डेंटिस्ट अचानक उनके लिए पहली मेडिकल मदद बन गया।
चीख सुनकर कॉकपिट की तरफ दौड़े डॉ. मुसायेव
विमान में मौजूद 47 वर्षीय डॉ. शोता मुसायेव पेशे से डेंटिस्ट हैं और इजरायल में रहते हैं। वह अपनी पत्नी के साथ यात्रा कर रहे थे। अचानक विमान में चीख-पुकार सुनाई दी और डॉक्टर को बुलाने की आवाज आने लगी। आवाज सुनकर मुसायेव तुरंत आगे बढ़े।
जब उन्होंने कैप्टन स्मित मच्छार को देखा तो उनकी हालत बेहद गंभीर थी। सिर और बाएं हाथ से काफी खून बह रहा था। घाव गहरे थे और सामान्य तरीके से खून रोकना मुश्किल हो रहा था। ऐसे समय में विमान के भीतर उपलब्ध सीमित संसाधनों के बीच डॉ. मुसायेव ने तत्काल प्राथमिक उपचार शुरू किया।
टी-शर्ट बनी पट्टी, बर्फ से रोकने की कोशिश
डॉ. मुसायेव के सामने सबसे बड़ी चुनौती लगातार हो रहा रक्तस्राव था। उन्होंने टी-शर्ट का इस्तेमाल घावों पर दबाव बनाने के लिए किया। जब इससे पर्याप्त फायदा नहीं हुआ तो उन्होंने केबिन क्रू से बर्फ मंगाई।
डॉक्टर के मुताबिक, जब भी वह घाव देखने के लिए कपड़ा हटाते, खून फिर तेजी से निकलने लगता था। इसलिए उन्होंने दबाव और बर्फ की मदद से रक्तस्राव को नियंत्रित रखने की कोशिश जारी रखी। करीब 45 मिनट तक वह इसी तरह कैप्टन की स्थिति पर नजर रखते रहे।
‘सोना मत, हमें आपकी जरूरत है…’
उस समय केवल खून रोकना ही चुनौती नहीं थी। कैप्टन मच्छार को होश में रखना भी बेहद जरूरी था। डॉ. मुसायेव लगातार उनसे बातचीत करते रहे। उन्होंने कैप्टन से उनके बच्चों के बारे में पूछा और उनके नाम जानने की कोशिश की, ताकि उनका ध्यान जागा रहे।
डॉक्टर बार-बार उनसे कहते रहे कि सोना नहीं है और उन्हें उनकी जरूरत है। उन्होंने कैप्टन को भरोसा दिलाया कि वह जल्द अपने परिवार के पास लौटेंगे और विमान जल्द लैंड करेगा। इस बातचीत का उद्देश्य उन्हें बेहोशी की स्थिति में जाने से रोकना था।
‘मुझे बचाइए… मैं मरना नहीं चाहता’
हमले में घायल कैप्टन की हालत बेहद नाजुक थी। डॉ. मुसायेव के अनुसार, मच्छार ने उनसे मदद मांगी और दर्द की शिकायत की। उन्होंने यह भी कहा कि वह मरना नहीं चाहते।
डॉक्टर ने बताया कि वह लगातार कैप्टन की स्थिति पर नजर रख रहे थे। एक समय उनकी नाड़ी काफी कमजोर पड़ गई और उनके होंठ नीले पड़ते दिखाई दिए। स्थिति बिगड़ती देखकर डॉक्टर ने क्रू से जल्द लैंडिंग की जरूरत बताई। उन्होंने कैप्टन के पैर ऊपर उठाए, जिसके बाद नाड़ी में सुधार दिखाई दिया।

दवा देने से क्यों किया इनकार?
कैप्टन को दर्द हो रहा था और उन्हें दर्द की दवा देने की बात भी सामने आई। लेकिन डॉ. मुसायेव ने स्थिति को देखते हुए दवा देने से परहेज किया। उनका मानना था कि गंभीर रक्तस्राव के बीच घायल व्यक्ति को अनावश्यक रूप से हिलाना या दवा देना जोखिम बढ़ा सकता है।
उन्होंने कैप्टन को पानी की थोड़ी मात्रा दी और मुख्य ध्यान रक्तस्राव रोकने तथा उनकी चेतना और नाड़ी पर नजर रखने पर रखा।
हमलावर को काबू करने में यात्रियों ने भी दिखाई बहादुरी
इस घटना में केवल कैप्टन मच्छार और डॉ. मुसायेव ही नहीं, बल्कि कई यात्रियों ने भी असाधारण साहस दिखाया। हमले के बाद यात्रियों ने हमलावर को काबू करने की कोशिश की। रिपोर्टों के अनुसार, उसके हाथ-पैर बांधने के लिए हेडफोन की केबल तक का इस्तेमाल किया गया।
वहीं दो स्टैंडबाय पायलट और एक यात्री कॉकपिट तक पहुंचे और विमान को नियंत्रित करने में मदद की। विमान को अंततः सऊदी अरब के तबुक में सुरक्षित उतारा गया।
डॉक्टर बोले- ‘स्मित ने हमारी जान बचाई’
डॉ. मुसायेव ने पूरी घटना का श्रेय अकेले खुद को देने से इनकार किया। उनका कहना है कि विमान में मौजूद कई लोगों ने अपनी-अपनी भूमिका निभाई। उनके अनुसार, कैप्टन मच्छार ने यात्रियों की जान बचाने के लिए संघर्ष किया और इसके बाद यात्रियों तथा उन्होंने कैप्टन की जान बचाने की कोशिश की।
डॉक्टर ने कैप्टन को हीरो बताते हुए कहा कि उन्होंने यात्रियों की जिंदगी बचाई। उन्होंने यह भी कहा कि अगर समय पर मेडिकल मदद नहीं मिलती तो भारी रक्तस्राव के कारण कैप्टन की जान को गंभीर खतरा था।
घटना के बाद डॉक्टर और उनकी पत्नी पर भी पड़ा असर
यह घटना केवल विमान में मौजूद लोगों के लिए ही भयावह नहीं थी, बल्कि इसके बाद भी इसका मानसिक असर देखने को मिला। डॉ. मुसायेव और उनकी पत्नी ने घटना के बाद तनाव और नींद से जुड़ी परेशानियों का सामना किया। डॉक्टर ने बताया कि हादसे के बाद उन्हें पूरी तरह समझ आया कि वे किस तरह की भयावह स्थिति से गुजर चुके थे।

